रिपोर्टर – लोकेश मिश्रा मध्य प्रदेश के दतिया-भिंड लोकसभा क्षेत्र से सांसद संध्या राय ने बिहार चुनाव परिणामों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया को लेकर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि NDA की बड़े अंतर से जीत जनता का भरोसा दर्शाती है, लेकिन विपक्ष चुनाव हारते ही निर्वाचन आयोग और मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगता है, जो लोकतंत्र के लिए सही संदेश नहीं है।
सांसद संध्या राय दतिया के प्रसिद्ध सूर्य नगरी बालाजी धाम निरीक्षण के दौरान मीडिया से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने विकास और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट जनादेश दिया है। ऐसे में विपक्ष की ओर से लगातार आरोप-प्रत्यारोप करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर अविश्वास का माहौल पैदा करता है।
उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यशैली की भी प्रशंसा की और कहा कि देश में चुनाव प्रणाली दुनिया में सबसे पारदर्शी और मजबूत है। “जब जीतते हैं तो सब ठीक लगता है, और जब हारते हैं तो कमियां दिखने लगती हैं… विपक्ष को आत्ममंथन करना चाहिए,” सांसद संध्या राय ने कहा।
सांसद इन दिनों दतिया और भिंड क्षेत्र में लगातार विकास कार्यों की समीक्षा कर रही हैं। बालाजी धाम निरीक्षण के बाद वह क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगी, जहाँ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, और जलापूर्ति जैसे कई प्रोजेक्टों की प्रगति पर चर्चा की जाएगी।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सांसद संध्या राय लगातार फील्ड में रहकर सरकारी योजनाओं की स्थिति को समझती हैं और जरूरत के मुताबिक तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित कराती हैं। उनके इस सक्रिय दौरे को स्थानीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के रुझानों में एनडीए को मिल रही भारी बढ़त के बीच राजनीति में हलचल तब बढ़ गई जब जेडीयू के आधिकारिक एक्स (Twitter) हैंडल से एक पोस्ट किया गया, जिसमें साफ लिखा था — “नीतीश ही बिहार के सीएम थे, हैं और रहेंगे।”पोस्ट की शुरुआत “न भूतो न भविष्यति…” से हुई थी और साथ में नीतीश कुमार की तस्वीर लगाई गई थी, जिस पर लिखा था “बिहारवासियों का प्यार, नीतीश कुमार…”
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिर्फ 5 मिनट के अंदर यह पोस्ट डिलीट क्यों किया गया? सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म है कि क्या यह जल्दबाज़ी में किया गया पोस्ट था, या फिर एनडीए के भीतर किसी समन्वय के इंतजार में इसे हटाया गया?हालांकि, पोस्ट हटने से पहले इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल होने लगा। अब विपक्ष और आम लोग इसको लेकर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं।
एनडीए को मिल रही बंपर बढ़त — 200 के पार रुझान
रुझानों के मुताबिक इस बार एनडीए को 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, जो 2010 जैसी ऐतिहासिक जीत की ओर इशारा कर रहा है।
बीजेपी: 91 सीटों पर बढ़त
जेडीयू: 82 सीटों पर आगे
बहुमत: 122 सीटें एनडीए के लिए यह ट्रेंड बेहद मजबूत माना जा रहा है। अगर नतीजे भी ऐसे ही रहे तो बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बनना तय माना जा सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण का मतदान पूरा होते ही राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव लगातार बीजेपी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, बीजेपी सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने महागठबंधन पर तीखा पलटवार किया है।
अश्विनी चौबे ने तेजस्वी यादव और महागठबंधन पर आरोप लगाया कि वे बिहार में फिर से “जंगलराज लाने की कोशिश” कर रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा कि “लगता है बिहार में जंगलराज लाने की बात करने वाले लोग अब बौखला गए हैं और आज फिर हिंसक हो गए हैं।”उन्होंने आगे महागठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा, “महाठगबंधन के सभी लोग…पप्पू, गप्पू और लप्पू…एक ही काम कर रहे हैं और जनता 14 नवंबर को उन्हें सज़ा देने वाली है।”
पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को और आक्रामक कर रहे हैं। तेजस्वी यादव लगातार महंगाई, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए बीजेपी सरकार को घेर रहे हैं, जबकि बीजेपी नेता Mahagathbandhan पर “गुमराह करने” और “अराजकता फैलाने” का आरोप लगा रहे हैं।
14 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होना है, जिसके चलते राज्य में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। दोनों पक्ष चुनावी माहौल को अपने पक्ष में मोड़ने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। अब जनता किसे मौका देती है, इसका फैसला चुनाव परिणाम ही बताएंगे।
बिहार चुनाव 2025 में महुआ विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल करने वाले नेता तेज प्रताप यादव पर आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। चुनाव आयोग के निर्देश पर तेज प्रताप यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।सूत्रों के अनुसार, नामांकन के दौरान तेज प्रताप यादव ने नियमों का उल्लंघन करते हुए प्राइवेट गाड़ी पर पुलिस स्टीकर, सायरन और लाइट लगाई थी। यह चुनाव आयोग द्वारा तय आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन माना गया।
तेज प्रताप यादव फिलहाल अपने प्रचार अभियान में व्यस्त हैं। लेकिन इस केस के दर्ज होने के बाद उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और चुनाव आयोग द्वारा जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी उम्मीदवारों को नामांकन और प्रचार के दौरान आचार संहिता का पालन करना अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उल्लंघन चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकते हैं। तेज प्रताप यादव के खिलाफ दर्ज केस से यह संदेश जाता है कि चुनाव आयोग किसी भी उम्मीदवार को नियमों से ऊपर नहीं रहने देगा।
महुआ विधानसभा सीट पर होने वाले बिहार चुनाव 2025 में यह मामला राजनीतिक हलचल बढ़ा सकता है। अब देखना होगा कि तेज प्रताप यादव इस मामले में किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और उनका प्रचार अभियान इस घटना के बाद कैसे प्रभावित होगा।
इस खबर से बिहार चुनाव में आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामलों पर भी ध्यान केंद्रित होने की संभावना है।
पटना। बिहार की राजनीति में लगभग तीन दशकों से चेहरों का खेल दो नेताओं—लालू प्रसाद यादव और नीतिश कुमार—तक ही सीमित है। आज भी कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियां राज्य में इन्हीं चेहरों पर निर्भर हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति बिहार की लोकतांत्रिक राजनीति की सबसे बड़ी कमजोरी है। बिहार राजनीति
लालू-नीतिश के इर्द-गिर्द घूमती राजनीति लालू यादव के उभार के बाद से ही उनके विरोध में नीतिश कुमार का चेहरा सामने आया। इसके बाद से अब तक बिहार की राजनीति इन्हीं दो ध्रुवों पर टिकी है। विरोध करने वाले नेता या तो नीतिश के साथ हो जाते हैं या फिर लालू परिवार के खिलाफ खड़े होते हैं। बिहार राजनीति
स्थानीय लोगों की राय बक्सर के किसान राम भूवन कहते हैं, “यहां राजनीति का हाल यह है कि या तो कोई लालू का समर्थक होता है या विरोधी। विरोधियों का रास्ता सीधा नीतिश तक ही जाता है। कांग्रेस और भाजपा के पास भी कोई चर्चित चेहरा नहीं है।”बिहार राजनीति
विश्लेषकों का नजरिया क्या कहता है
नई दुनिया के संपादक सतीश श्रीवास्तव कहते हैं, “यह बिहार की राजनीति का दुर्भाग्य है कि यहां बड़े जनआंदोलन हुए, पर आज प्रमुख पार्टियों के पास अपना चेहरा नहीं है। राजनीति अब सिर्फ लालू और नीतिश पर सिमट गई है।”
शिक्षक रविकांत के अनुसार, “जातीय समीकरणों में बंटे बिहार में कोई ऐसा नेता नहीं आया जो युवाओं को आकर्षित कर सके। इस कारण राजनीति लालू और नीतिश तक सीमित हो गई है।”
समाजशास्त्री प्रो. राम विलास का मानना है, “बिहार की राजनीति में संकीर्णता अधिक है, इसलिए नए चेहरे उभर नहीं पाते। आने वाले दशक में कोई नया नेतृत्व उभर सकता है, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना कम है।”
विश्लेषकों का मानना है कि हाल में कुछ नए नेता जैसे प्रशांत कुमार या कन्हैया कुमार अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करते दिखे, लेकिन वे भी कांग्रेस और लालू परिवार की राजनीति में दबकर रह गए। इससे साफ है कि बिहार की राजनीति में नया चेहरा उभरना अभी आसान नहीं है। बिहार राजनीति
Bihar Assembly Election 2025: बिहार की सियासत में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस पेशकश ने बिहार के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर और तेजस्वी यादव से संपर्क साधकर इस गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश की है। हालांकि, अभी तक RJD की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। इस बीच, सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह ओवैसी का सियासी मास्टरस्ट्रोक है या फिर केवल एक रणनीतिक दांव?
AIMIM का सियासी दांव: महागठबंधन में शामिल होने की पेशकश- Bihar Assembly Election 2025
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। AIMIM ने इस बार एक चौंकाने वाला कदम उठाया है और खुद को INDIA ब्लॉक का हिस्सा बनाने की पेशकश की है। इस कदम ने महागठबंधन के मौजूदा सहयोगी दलों में खलबली मचा दी है। महागठबंधन में पहले से ही छह दल शामिल हैं, जिनमें RJD, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय लीग, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शामिल हैं। इसके अलावा, मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है।
अब AIMIM की इस पेशकश और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की 12-13 सीटों की मांग ने सीट बंटवारे की चुनौतियों को और जटिल कर दिया है। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, और गठबंधन के सहयोगी दलों की डिमांड पहले ही 196 सीटों तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस 70, VIP 60, माले 42, और CPI 24 सीटों की मांग कर रही है, जबकि RJD खुद 138 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ऐसे में AIMIM को शामिल करना गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।
ओवैसी का पत्र: सेक्युलर वोटों को एकजुट करने की अपील- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने 2 जुलाई को लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। पत्र में उन्होंने 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी पहले भी गठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बार AIMIM ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर सेक्युलर वोटों को एकजुट किया जाए तो बिहार में NDA को सत्ता से बेदखल किया जा सकता है।
ईमान ने कहा, “हमारी पार्टी NDA को हराने के लिए गंभीर है। अगर महागठबंधन हमें साथ लेता है, तो हम सेक्युलर वोटों का बिखराव रोक सकते हैं।” AIMIM ने RJD और कांग्रेस के कुछ विधायकों से भी संपर्क साधा है और इस प्रस्ताव को विचाराधीन बताया है। हालांकि, RJD और कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है। Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन की दुविधा: AIMIM को शामिल करें या नहीं?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश ने महागठबंधन के सामने एक बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। एक तरफ, AIMIM को साथ लेने से मुस्लिम वोटों की मजबूत पकड़ मिल सकती है, खासकर सीमांचल क्षेत्र में, जहां AIMIM का प्रभाव है। दूसरी तरफ, सीट बंटवारे की पहले से ही जटिल स्थिति और AIMIM के ‘कट्टरपंथी’ टैग की आशंका गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। Bihar Assembly Election 2025
RJD और कांग्रेस लंबे समय से AIMIM को BJP की ‘B टीम’ कहकर निशाना साधते रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कई मौकों पर ओवैसी पर NDA के लिए वोट काटने का आरोप लगाया है। ऐसे में AIMIM को गठबंधन में शामिल करना RJD के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अगर AIMIM को शामिल नहीं किया गया, तो सीमांचल में मुस्लिम वोटों का बिखराव NDA को फायदा पहुंचा सकता है। Bihar Assembly Election 2025
सीमांचल में AIMIM की ताकत- Bihar Assembly Election 2025
बिहार की सियासत में सीमांचल का इलाका मुस्लिम वोटों के लिहाज से बेहद अहम है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और 5 सीटों (अमौर, बहादुरगंज, बैसी, जोकीहाट, और कोचाधामन) पर जीत हासिल की। पार्टी को कुल 5,23,279 वोट (1.24% वोट शेयर) मिले थे। हालांकि, बाद में AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे, लेकिन सीमांचल में पार्टी की जमीनी पकड़ बनी रही। Bihar Assembly Election 2025
2024 के लोकसभा चुनाव में AIMIM ने 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 3,82,660 वोट (0.9% वोट शेयर) हासिल किए। ओवैसी ने हाल ही में किशनगंज दौरे पर कहा था कि उनकी पार्टी 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 24 सीटें जीतने का लक्ष्य रखेगी। यह बयान तेजस्वी यादव के लिए एक खुली चुनौती माना जा रहा है। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी की रणनीति: हिस्सेदारी या दिखावा?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश को सियासी जानकार दो तरह से देख रहे हैं। कुछ का मानना है कि ओवैसी वाकई NDA को हराने के लिए महागठबंधन के साथ गंभीरता से काम करना चाहते हैं। दूसरी ओर, कुछ इसे एक रणनीतिक दांव मान रहे हैं, जिससे ओवैसी ‘BJP की B टीम’ के आरोपों से बच सकें। अगर AIMIM को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया, तो ओवैसी इसका इस्तेमाल विपक्ष को घेरने के लिए कर सकते हैं। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी ने कहा, “हम हिस्सेदारी चाहते हैं, गुलामी नहीं। मुस्लिम वोटर अब सिर्फ वोट ट्रांसफर का जरिया नहीं बनना चाहते।” यह बयान RJD और तेजस्वी यादव के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि AIMIM सत्ता में बराबर की भागीदारी चाहती है।
महागठबंधन में दरारें- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की पेशकश के बीच महागठबंधन के भीतर पहले से ही तनाव दिख रहा है। JMM ने 12-13 सीटों की मांग की है और इस बात से नाराज है कि उसे अब तक किसी बैठक में शामिल नहीं किया गया। कांग्रेस ने भी स्पष्ट किया है कि AIMIM ने उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने कहा, “ओवैसी ने हमें कोई ऑफर नहीं दिया। यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए।” Bihar Assembly Election 2025
वहीं, RJD नेता मृत्यंजय तिवारी ने कहा, “AIMIM का ट्रैक रिकॉर्ड BJP की B टीम का रहा है, लेकिन अब जब उन्होंने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है, तो इसका फैसला लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव लेंगे।” Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन के सामने अब यह सवाल है कि क्या AIMIM को शामिल करना फायदेमंद होगा। सीमांचल में AIMIM की मौजूदगी से मुस्लिम वोटों को एकजुट किया जा सकता है, जो NDA के खिलाफ एक मजबूत रणनीति हो सकती है। लेकिन अगर सीट बंटवारे में असंतुलन हुआ, तो गठबंधन के सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ, अगर AIMIM अकेले चुनाव लड़ती है, तो वह सीमांचल की 24-30 सीटों पर प्रभाव डाल सकती है, जिससे RJD और कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। 2020 में AIMIM की वजह से RJD को सीमांचल में कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले AIMIM की पेशकश ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। ओवैसी की यह रणनीति महागठबंधन के लिए एक अवसर और चुनौती दोनों है। अगर गठबंधन AIMIM को शामिल करता है, तो मुस्लिम वोटों की एकजुटता से NDA को कड़ी टक्कर दी जा सकती है। लेकिन अगर AIMIM को दरकिनार किया गया, तो वोटों का बिखराव गठबंधन की हार का कारण बन सकता है। अब गेंद लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के पाले में है। क्या वे इस सियासी दांव को स्वीकार करेंगे या इसे ठुकराकर अपनी रणनीति पर कायम रहेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।