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Tag: बिहार राजनीति

  • “बहुत आगे तक जाएंगे…” सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद, बिहार राजनीति में बढ़ी हलचल

    “बहुत आगे तक जाएंगे…” सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद, बिहार राजनीति में बढ़ी हलचल

    बिहार की राजनीति में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुले मंच से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की जमकर सराहना की। मौका था बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शकुनी चौधरी के 90वें जन्मदिन का, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं उनके आवास पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।इस दौरान नीतीश कुमार ने न सिर्फ शकुनी चौधरी के राजनीतिक योगदान को याद किया, बल्कि उनकी मौजूदगी में सम्राट चौधरी के कामकाज की भी तारीफ की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट चौधरी मेहनती नेता हैं और “बहुत आगे तक जाएंगे”, यह कहते हुए उन्होंने उनके उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद भी दिया।

    सम्राट चौधरी के लिए खास रहा यह पल

    डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के लिए यह मौका बेहद खास माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार के इस बयान को सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नीतीश कुमार का इस तरह खुले मंच से सम्राट चौधरी का समर्थन करना आने वाले समय में बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

    शकुनी चौधरी के आवास पर जुटे दिग्गज

    पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शकुनी चौधरी के 90वें जन्मदिन पर कई वरिष्ठ नेता और समर्थक मौजूद रहे। नीतीश कुमार ने उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शकुनी चौधरी का सामाजिक और राजनीतिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

    सियासी मायने क्या हैं?

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह बयान केवल औपचारिक नहीं है। सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद ऐसे समय पर आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं। यह बयान यह भी दर्शाता है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भूमिका और नेतृत्व क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं।

    विपक्ष की भी बढ़ी नजर

    इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों की नजर भी इस बयान पर टिक गई है। सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कई लोग इसे भविष्य की राजनीति का संकेत मान रहे हैं।कुल मिलाकर, शकुनी चौधरी के जन्मदिन समारोह में नीतीश कुमार द्वारा दिया गया यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस आशीर्वाद का राजनीतिक असर कितना गहरा पड़ता है।

  • छठ पर्व पर सियासी संगम! सीएम नीतीश कुमार पहुंचे चिराग पासवान के घर, पैर छूकर लिया आशीर्वाद

    छठ पर्व पर सियासी संगम! सीएम नीतीश कुमार पहुंचे चिराग पासवान के घर, पैर छूकर लिया आशीर्वाद


    लोकेशन: पटना, बिहार बिहार में छठ महापर्व की आस्था के साथ-साथ राजनीति का संगम भी देखने को मिला। छठ पूजा के इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के आवास पहुंचे। इस दौरान चिराग पासवान ने सीएम नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

    चिराग पासवान ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आज छठ पूजा के अवसर पर आशीर्वाद देने घर पधारे। उनका आभार।”इस मुलाकात ने बिहार की सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छठ पूजा के मौके पर राज्य के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के घर पहुंच रहे हैं, ताकि उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दे सकें। वहीं चिराग पासवान और नीतीश कुमार की यह मुलाकात खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ सालों से दोनों नेताओं के रिश्तों में ठंडक रही है।

    छठ पर्व के इस अवसर पर दोनों नेताओं का साथ आना यह संकेत देता है कि बिहार की राजनीति में आने वाले समय में नए समीकरण बन सकते हैं।वहीं इस मुलाकात पर जनता दल (यू) और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के कार्यकर्ता भी अलग-अलग तरह की व्याख्या कर रहे हैं।

    बिहार में छठ महापर्व का खास धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह पर्व सूर्य भगवान और छठी मइया की उपासना का प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में महिलाएं निर्जला उपवास रखकर संतान की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं।

  • बिहार राजनीति: लालू-नीतीश पर ही निर्भर कांग्रेस और भाजपा, नया चेहरा क्यों नहीं?

    बिहार राजनीति: लालू-नीतीश पर ही निर्भर कांग्रेस और भाजपा, नया चेहरा क्यों नहीं?

    पटना। बिहार की राजनीति में लगभग तीन दशकों से चेहरों का खेल दो नेताओं—लालू प्रसाद यादव और नीतिश कुमार—तक ही सीमित है। आज भी कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियां राज्य में इन्हीं चेहरों पर निर्भर हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति बिहार की लोकतांत्रिक राजनीति की सबसे बड़ी कमजोरी है। बिहार राजनीति

    लालू-नीतिश के इर्द-गिर्द घूमती राजनीति
    लालू यादव के उभार के बाद से ही उनके विरोध में नीतिश कुमार का चेहरा सामने आया। इसके बाद से अब तक बिहार की राजनीति इन्हीं दो ध्रुवों पर टिकी है। विरोध करने वाले नेता या तो नीतिश के साथ हो जाते हैं या फिर लालू परिवार के खिलाफ खड़े होते हैं। बिहार राजनीति

    स्थानीय लोगों की राय
    बक्सर के किसान राम भूवन कहते हैं, “यहां राजनीति का हाल यह है कि या तो कोई लालू का समर्थक होता है या विरोधी। विरोधियों का रास्ता सीधा नीतिश तक ही जाता है। कांग्रेस और भाजपा के पास भी कोई चर्चित चेहरा नहीं है।”बिहार राजनीति

    विश्लेषकों का नजरिया क्या कहता है

    • नई दुनिया के संपादक सतीश श्रीवास्तव कहते हैं, “यह बिहार की राजनीति का दुर्भाग्य है कि यहां बड़े जनआंदोलन हुए, पर आज प्रमुख पार्टियों के पास अपना चेहरा नहीं है। राजनीति अब सिर्फ लालू और नीतिश पर सिमट गई है।”
    • शिक्षक रविकांत के अनुसार, “जातीय समीकरणों में बंटे बिहार में कोई ऐसा नेता नहीं आया जो युवाओं को आकर्षित कर सके। इस कारण राजनीति लालू और नीतिश तक सीमित हो गई है।”
    • समाजशास्त्री प्रो. राम विलास का मानना है, “बिहार की राजनीति में संकीर्णता अधिक है, इसलिए नए चेहरे उभर नहीं पाते। आने वाले दशक में कोई नया नेतृत्व उभर सकता है, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना कम है।”

    विश्लेषकों का मानना है कि हाल में कुछ नए नेता जैसे प्रशांत कुमार या कन्हैया कुमार अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करते दिखे, लेकिन वे भी कांग्रेस और लालू परिवार की राजनीति में दबकर रह गए। इससे साफ है कि बिहार की राजनीति में नया चेहरा उभरना अभी आसान नहीं है। बिहार राजनीति

  • बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

    बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

    बिहार विधानसभा चुनाव के पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों आसने-सामने आ गए है बिहार विधानसभा का मानसून सत्र आज उस समय गर्मा गया जब एक बहस के दौरान मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान में आए ‘बाप’ शब्द को लेकर विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष का आरोप है कि मंत्री ने सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया।

    क्या कहा मंत्री ने? बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

    विजय कुमार चौधरी ने अपने वक्तव्य के दौरान एक उदाहरण पेश करते हुए “बाप को भी समझाना पड़ता है” जैसी टिप्पणी की। इस पर राजद और कांग्रेस के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई और वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी।

    विपक्ष का आरोप बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

    विपक्ष का कहना है कि यह भाषा सदन की मर्यादा के खिलाफ है और मंत्री को तुरंत माफी मांगनी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस तरह के शब्दों से न सिर्फ सदन की गरिमा गिरती है, बल्कि जनता में गलत संदेश जाता है।

    सत्ता पक्ष की सफाई बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

    सत्तारूढ़ जनता दल (यू) और भाजपा के विधायकों ने मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि मंत्री ने किसी को अपमानित करने की मंशा से नहीं, बल्कि एक सामान्य उदाहरण देते हुए यह शब्द इस्तेमाल किया। बयान को जानबूझकर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

    स्पीकर की टिप्पणी का इंतजार बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल

    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पूरे प्रकरण की कार्यवाही की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता होने पर उचित टिप्पणी दी जाएगी। फिलहाल सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की गई।