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  • मेरठ: मुस्लिम समाज का पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश, फूंका पुतला, लगाए मुर्दाबाद के नारे- MEERUT AGAINST TERROR ATTACK

    मेरठ: मुस्लिम समाज का पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश, फूंका पुतला, लगाए मुर्दाबाद के नारे- MEERUT AGAINST TERROR ATTACK

    मेरठ: पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ की गई आतंकवादी हरकतों (MEERUT AGAINST TERROR ATTACK) को लेकर देशभर में आक्रोश है. इसी के तहत मेरठ में गुरुवार रात मुस्लिम समाज के लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने आरटीओ ऑफिस के पास सड़क पर पाकिस्तान का पुतला जलाया और “पाकिस्तान मुर्दाबाद” के नारे लगाए. लोगों ने पाकिस्तान को कायर करार देते हुए कहा कि अब भारत को जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए.

    प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से बार-बार किए जा रहे आतंकवादी हमले अब सहन नहीं किए जाएंगे. प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से मुस्लिम समाज के लोग शामिल थे, जो देश के साथ अपनी एकता और वफादारी जताने के लिए सड़कों पर उतरे.

    🔥 पुतला फूंक कर जताया आक्रोश
    प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हाल ही में पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर में निर्दोष नागरिकों और जवानों पर किए गए हमले बेहद शर्मनाक और कायरतापूर्ण हरकत है. उन्होंने कहा कि यह हमला न केवल भारत की संप्रभुता पर चोट है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी है.

    इस मौके पर मौजूद हसीन अहमद सैफी ने कहा, “पाकिस्तान ने अब तक जितनी भी जंगें लड़ी हैं, हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी है और आगे भी उसका यही अंजाम होगा. भारत की सेना हर बार की तरह इस बार भी मजबूती से जवाब देगी.” उन्होंने कहा कि “जिस तरह पहलगाम में निर्दोष भारतीयों का खून बहाया गया है, उसे हम चुपचाप नहीं देख सकते.”

    👥 मुस्लिम समाज का स्पष्ट संदेश
    प्रदर्शन में मौजूद कई लोगों ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और पाकिस्तान जैसे देश की हरकतों को किसी भी कीमत पर समर्थन नहीं दिया जा सकता. एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम मुस्लिम हैं, लेकिन सबसे पहले हम भारतीय हैं. पाकिस्तान जैसे आतंकी देश से हमारा कोई लेना-देना नहीं है.” लोगों ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को उसके कर्मों की सज़ा दी जाए.

    📍 प्रदर्शन स्थल पर भारी भीड़, पुलिस रही सतर्क
    यह विरोध प्रदर्शन मेरठ के आरटीओ ऑफिस के पास हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग जुटे और उन्होंने डंडों से पाकिस्तान के पुतले को पीटकर अपना गुस्सा निकाला. इस दौरान पुलिस भी मौके पर मौजूद रही और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रही.

    ✊ जनता का समर्थन, सोशल मीडिया पर भी दिखा असर
    इस प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं. ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों ने मुस्लिम समाज की इस देशभक्ति की सराहना की और कहा कि यह भारत की सच्ची एकता और अखंडता का प्रतीक है.

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  • 1962 भारत-चीन युद्ध में भी हुई थी मॉकड्रिल, मेरठ की विद्यावती ने बताया युद्धकालीन ब्लैकआउट का अनुभव- BLACKOUT MOCK DRILL IN UP

    1962 भारत-चीन युद्ध में भी हुई थी मॉकड्रिल, मेरठ की विद्यावती ने बताया युद्धकालीन ब्लैकआउट का अनुभव- BLACKOUT MOCK DRILL IN UP

    मेरठ: भारत में मॉकड्रिल और सुरक्षा तैयारियों की परंपरा कोई नई नहीं है. यह मॉकड्रिल (BLACKOUT MOCK DRILL IN UP) 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भी देखने को मिली थी. उस वक्त ग्राम सभाओं की बैठकों में ग्रामीणों को ट्रेनिंग दी जाती थी कि युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति में आम नागरिकों को क्या करना है और क्या नहीं? उस समय जब सायरन बजता था, तो पूरे गांव और शहर में ब्लैकआउट कर दिया जाता था. लोग बिजली की बत्तियां बंद कर शीशों और खिड़कियों को काले कपड़ों से ढक देते थे ताकि दुश्मन को रोशनी नजर न आए.

    मेरठ की रहने वाली 85 वर्षीय विद्यावती ने नेशनल नाउ समाचार से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि कैसे 1962 का समय भय और साहस दोनों का मिश्रण था. उन्होंने बताया कि, “उस समय गांवों में ग्राम सभा की बैठकें होती थीं और महिलाओं से लेकर बच्चों तक को मॉकड्रिल के जरिए यह सिखाया जाता था कि यदि युद्ध होता है, तो क्या करना है. जैसे ही सायरन बजता, पूरे इलाके में अंधेरा कर दिया जाता था. खिड़कियां, रोशनदान, शीशे — सब काले कर दिए जाते थे.”

    विद्यावती बताती हैं कि सूचना का एकमात्र साधन हिंदी और उर्दू अखबार हुआ करते थे. लोग अखबारों से ही युद्ध की स्थिति और सेना की गतिविधियों की जानकारी पाते थे. उन्होंने बताया कि घर-घर में लोग देश के लिए प्रार्थना करते थे और हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में देशभक्ति से जुड़ा महसूस करता था.

    विद्यावती के परिवार की तीन पीढ़ियां सेना में
    मेरठ की विद्यावती के परिवार में तीन पीढ़ियाँ भारतीय सेना को समर्पित रही हैं. उनके पिता ने 1962 के युद्ध में भाग लिया था, जबकि 1971 की लड़ाई में भी उनके परिवार के सदस्य सक्रिय रहे. आज भी उनके परिवार के कई सदस्य सेना में कार्यरत हैं. विद्यावती गर्व के साथ कहती हैं कि “हमारा खून देश की रक्षा के लिए ही बना है.”

    आज भी हो रही मॉकड्रिल की परंपरा जारी
    आज जब भारत एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा के सवालों से जूझ रहा है, तो मेरठ सहित देशभर में मॉकड्रिल का आयोजन किया जा रहा है ताकि आम जनता को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार किया जा सके. विद्यावती कहती हैं, “आज की पीढ़ी को भी यह सिखाना जरूरी है कि देश के प्रति क्या कर्तव्य हैं. मॉकड्रिल एक जागरूकता का माध्यम है, जिससे लोग समय रहते अपनी और दूसरों की सुरक्षा कर सकें.”

    उन्होंने आगे कहा कि “पाकिस्तान या कोई भी दुश्मन देश हो, उसे मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमें सिर्फ सेना नहीं, बल्कि एकजुट देशभक्ति की भावना भी चाहिए. हम सबको देश के लिए जागरूक और तैयार रहना चाहिए.”

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  • मेरठ: सेना की कार्रवाई से लोगों में खुशी की लहर, लोगों ने मिठाइयां बांटी- INDIA PAKISTAN WAR

    मेरठ: सेना की कार्रवाई से लोगों में खुशी की लहर, लोगों ने मिठाइयां बांटी- INDIA PAKISTAN WAR

    मेरठ: पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई (INDIA PAKISTAN WAR) के बाद पूरे देश में जोश और उत्साह की लहर है. मेरठ में भी सेना की इस कार्रवाई पर लोगों ने जमकर खुशी जताई. शहर की सड़कों से लेकर मोहल्लों तक भारत माता की जय और मोदी जिंदाबाद के नारे गूंज उठे.

    सेना की ओर से आतंकियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई के बाद मेरठ के लोगों ने मिठाइयां बांटी और पटाखे चलाकर खुशी जाहिर की. विशेष रूप से ई-रिक्शा चालक संघ के लोगों ने शहर के विभिन्न इलाकों में मिठाइयां बांटकर सेना को धन्यवाद कहा. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सबसे पहले है और जो देश के दुश्मनों को पनाह देता है, उस पर कार्रवाई ज़रूरी थी.

    भारतीय सेना पर गर्व
    स्थानीय लोगों का कहना है कि हमें अपनी सेना पर गर्व है. मेरठ निवासी रामप्रकाश शर्मा ने कहा, “जब भी देश की रक्षा की बात आती है, हमारी सेना पीछे नहीं हटती. हमें ऐसे सटीक और कड़े एक्शन की जरूरत थी.”

    पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश
    सेना की कार्रवाई के बाद लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा भी देखने को मिला. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार आतंकियों को शरण देता आया है और अब उसे उसकी भाषा में जवाब दिया जाना चाहिए.

    ई-रिक्शा संचालकों ने बांटी मिठाई
    मेरठ के ई-रिक्शा चालक संघ के सदस्य राजू ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर यह तय किया कि सेना की इस बहादुरी पर मिठाइयां बांटी जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए कि देश की सुरक्षा के लिए सेना किस हद तक जाती है.

    नारे और जोश से गूंजा मेरठ
    शहर के कई इलाकों में युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर रैलियां निकालीं और ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘मोदी जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए. इस दौरान लोगों ने एक स्वर में कहा कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और सेना का मनोबल और ऊंचा किया जाना चाहिए.

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  • मेरठ: मासूम बच्चों को पाकिस्तान भेजने पर रोई भारतीय सना, अब पीएम मोदी से की ये खास अपील- MEERUT SANA APPEALS TO PM MODI

    मेरठ: मासूम बच्चों को पाकिस्तान भेजने पर रोई भारतीय सना, अब पीएम मोदी से की ये खास अपील- MEERUT SANA APPEALS TO PM MODI

    मेरठ: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव देखने को मिल रहा है. भारत सरकार ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने का फरमान (MEERUT SANA APPEALS TO PM MODI) सुनाया है. इस आदेश के बाद मेरठ की बेटी और पाकिस्तान की बहू को आखिरकार अपने बच्चे पाकिस्तान भेजने पड़े. दरअसल, पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ी टेंशन के बीच आफत सना के परिवार पर आ पड़ी है.

    भारतीय सना देश में रहने पर मजबूर है. वहीं, पाकिस्तानी बच्चे पाकिस्तान भेज दिए गए हैं और पति और परिवार पहले से पाकिस्तान में मौजूद है. सरहद के इस पर और उसे पर दोनों तरफ बेचैनी है यहां सना अपने परिवार के पास जाने के लिए पीएम मोदी से गुहार लगा रही है. वहीं सरहद के उस पार सना के पति और बच्चे भी उसे वापस लाने के लिए कोशिश कर रहे हैं. (MEERUT SANA APPEALS TO PM MODI)

    यह घटना मेरठ जिले के सरधना क्षेत्र की है, जहां सना इन दिनों अपने मायके में रह रही हैं. सना की शादी 2020 में पाकिस्तान के कराची निवासी डॉक्टर बिलाल से हुई थी. फिलहाल उनके पति और बच्चे पाकिस्तान में हैं जबकि सना भारत में ही रह गई हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही तनातनी ने इस परिवार को दो हिस्सों में बाँट दिया है.

    बच्चों को अटारी बॉर्डर से भेजना पड़ा पाकिस्तान
    हाल ही में जब सना अपने परिवार के साथ भारत आईं, तो वह अपने दो छोटे बच्चों को भी साथ लाई थीं. लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी बढ़ गई. इसके चलते सना को अपने बच्चों को अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान भेजना पड़ा, जबकि वह खुद लौट नहीं सकीं.

    बॉर्डर पर बच्चों को विदा करते समय सना की आंखें नम थीं. कैमरे के सामने उनका दर्द छलक पड़ा. उन्होंने कहा, “मेरे बच्चे वहां हैं, मेरा परिवार वहां है, लेकिन मैं यहां रह गई हूं. मेरे पास पाकिस्तान लौटने के लिए वैध दस्तावेज नहीं हैं. मैं प्रधानमंत्री मोदी जी से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि मुझे मेरे परिवार के पास भेजने में मदद करें.”

    परिवार का समर्थन, सरकार से गुहार
    सना के पिता मोहम्मद फेरू ने बताया कि उनका परिवार पूरी तरह हिंदुस्तान के साथ है. उन्होंने कहा, “हम भारतीय हैं, भारत का कानून मानते हैं. लेकिन एक बेटी के दर्द को समझना चाहिए. वह मां है, उसके बच्चे सरहद पार हैं, उसका दिल वहां है.” सना की यह कहानी न सिर्फ एक पारिवारिक बिछड़न की दास्तान है, बल्कि यह उन जटिलताओं को भी उजागर करती है जो दो देशों के बीच के संवेदनशील संबंधों में आम इंसान को झेलनी पड़ती हैं.

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