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Tag: यूपी न्यूज

  • KGMU विवाद: अपर्णा यादव से झड़प के बाद डॉक्टर और कर्मचारी आर-पार, हड़ताल और OPD बंद करने की चेतावनी

    KGMU विवाद: अपर्णा यादव से झड़प के बाद डॉक्टर और कर्मचारी आर-पार, हड़ताल और OPD बंद करने की चेतावनी

    KGMU विवाद : राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहा महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और लव जिहाद का मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। KGMU विवाद ने सोमवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव की टीम और यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच तीखी झड़प और बहस हो गई। इस घटना के बाद केजीएमयू में तनाव का माहौल है और डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने के साथ ही ओपीडी सेवाएं बंद करने की चेतावनी दे दी है।

    यह पूरा विवाद डॉक्टर रमीज से जुड़े कथित धर्मांतरण प्रकरण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद द्वारा इस मामले पर आयोजित की जाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले अपर्णा यादव के समर्थकों और केजीएमयू के डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। इस घटना से पूरे मेडिकल कैंपस में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि बाहरी हस्तक्षेप से संस्थान की गरिमा और स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि संवेदनशील मामले में बिना समन्वय के दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। KGMU विवाद को लेकर डॉक्टर संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों और आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे हड़ताल और ओपीडी सेवाएं बंद करने जैसे कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

    वहीं दूसरी ओर, यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम में ‘फेवरेट’ बनने की कोशिश से जुड़ा है। अपर्णा यादव, जो समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की बहू हैं, ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामा था। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें न तो लोकसभा चुनाव में टिकट मिला और न ही महिला आयोग की अध्यक्ष जैसे किसी संवैधानिक पद पर नियुक्ति हुई।

    अब 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि KGMU विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में हुई झड़प और बयानबाजी अपर्णा यादव की राजनीतिक छवि और महत्वाकांक्षा पर असर डाल सकती है। फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन और सरकार की नजर बनी हुई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।

  • वाराणसी में कमिश्नर के वाहन के सामने महिलाओं का धरना, जमीन विवाद का मामला

    वाराणसी में कमिश्नर के वाहन के सामने महिलाओं का धरना, जमीन विवाद का मामला

    संवाददाता मनीष पटेल वाराणसी में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई जब कुछ महिलाएं पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के कार्यालय के बाहर उनके वाहन के सामने धरने पर बैठ गईं। महिलाओं का आरोप था कि चोलापुर थाने में जमीन विवाद की शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।कार्यालय पुलिस आयुक्त के गेट पर धरना देख कैंट पुलिस महिलाओं को समझाकर हटाने का प्रयास कर रही थी। इसी दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए उन्होंने वाहन से उतरकर स्वयं महिलाओं से बातचीत की और उनकी समस्या को गंभीरता से सुना। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने सभी महिलाओं को अपने कार्यालय में बुलाया।

    चोलापुर थाने पर सुनवाई न होने का आरोप

    धरने पर बैठी महिलाओं ने बताया कि उनकी जमीन उनकी सास धनों देवी के नाम दर्ज है, लेकिन धनंजय यादव और उसके परिवार के लोग आए दिन उनकी जमीन पर आकर जबरन कब्जा करने का प्रयास करते हैं। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें धमकाया जाता है और मारपीट की जाती है।महिलाओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में चोलापुर थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब कथित आरोपियों को पता चला कि महिलाएं थाने गई हैं, तो वे उनके घर पर चढ़ आए और बच्चों व पुरुषों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की।

    पुलिस आयुक्त ने लिया संज्ञान

    थाने से न्याय न मिलने पर महिलाएं सीधे वाराणसी पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने महिलाओं की पूरी बात सुनी और मामले को गंभीर बताया।उन्होंने महिलाओं को आश्वासन दिया कि चोलापुर थाने को इस मामले में निर्देश दे दिए गए हैं। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर सुनवाई और कार्रवाई नहीं होती है, तो महिलाएं दोबारा उनसे संपर्क करें

    एक सप्ताह में कार्रवाई का भरोसा

    पुलिस आयुक्त के आश्वासन के बाद महिलाओं ने धरना समाप्त किया। प्रशासन की ओर से यह संदेश दिया गया कि जमीन विवाद जैसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा।यह मामला एक बार फिर स्थानीय थानों की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों की सुनवाई को लेकर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन के निर्देशों के बाद चोलापुर थाना इस विवाद में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

  • “जाट हूं, 50 थार खरीद दूंगी” वीडियो वायरल, गाजियाबाद में 2 दरोगाओं संग दबंगई

    “जाट हूं, 50 थार खरीद दूंगी” वीडियो वायरल, गाजियाबाद में 2 दरोगाओं संग दबंगई

    गाजियाबाद से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। गाजियाबाद दबंगई वीडियो में एक महिला खुलेआम यह कहते हुए नजर आ रही है कि “मैं जाट हूं, खड़े-खड़े 50 थार खरीद दूंगी”। हैरानी की बात यह है कि यह बयान दो पुलिस दरोगाओं की मौजूदगी में दिया गया, लेकिन मौके पर कोई सख्त कार्रवाई होती नजर नहीं आई।

    दरोगाओं के सामने दिखा दबंग अंदाज

    वायरल वीडियो में महिला खुद को प्रभावशाली बताते हुए पुलिस पर रौब झाड़ती दिख रही है। वीडियो में मौजूद दो दरोगा उसकी बातों को सुनते नजर आते हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला का यह व्यवहार सोशल मीडिया यूजर्स को खासा नाराज कर रहा है।बताया जा रहा है कि यह वीडियो किसी स्थानीय विवाद के दौरान रिकॉर्ड किया गया, जहां पुलिस मौके पर पहुंची थी। उसी दौरान महिला ने जाति और आर्थिक ताकत का हवाला देकर दबंगई दिखाई।

    सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा

    वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कानून सभी के लिए समान है। कई यूजर्स ने पुलिस पर आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के सामने कार्रवाई करने से बचा जाता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला मामला बताया है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर करते हैं।

    पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

    इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद हों और फिर भी इस तरह की दबंगई हो, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा। हालांकि, वीडियो के वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया है।पुलिस विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।फिलहाल, गाजियाबाद दबंगई वीडियो कानून, व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

  • कानपुर में मेयर-पार्षद विवाद सड़क पर, प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हंगामा

    कानपुर में मेयर-पार्षद विवाद सड़क पर, प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हंगामा

    कानपुर में नगर निगम की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। कानपुर मेयर पार्षद विवाद उस समय खुलकर सामने आ गया, जब एक सरकारी कार्यक्रम में पार्षद समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। खास बात यह रही कि जिस कार्यक्रम में यह विवाद हुआ, उसमें प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।

    प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हुआ हंगामा

    जानकारी के अनुसार, कानपुर में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया। पार्षदों के समर्थक कार्यक्रम स्थल पर नारेबाजी करने लगे और मेयर के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। हंगामे के चलते कुछ देर के लिए कार्यक्रम बाधित भी हुआ, जिससे प्रशासन और आयोजकों में अफरा-तफरी मच गई।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पार्षद समर्थक नगर निगम में अनदेखी और भेदभाव के आरोप लगा रहे थे। उनका कहना था कि विकास कार्यों और फैसलों में पार्षदों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    पार्षद समर्थकों की नाराजगी खुलकर सामने

    पार्षदों और उनके समर्थकों का आरोप है कि मेयर द्वारा लिए जा रहे कई फैसलों में उनकी सहमति नहीं ली जाती। इसी असंतोष ने धीरे-धीरे बड़े विवाद का रूप ले लिया। कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नगर निगम के भीतर चल रहा तनाव अब सार्वजनिक हो चुका है।

    स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुरक्षा बलों ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रण में लिया, ताकि कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके।

    नगर निगम की राजनीति पर सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते मेयर और पार्षदों के बीच संवाद नहीं हुआ, तो आने वाले समय में विवाद और गहरा सकता है।

    प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में हुआ यह हंगामा प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि सरकार इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर सकती है, ताकि नगर निगम में चल रही खींचतान को सुलझाया जा सके।

    फिलहाल, कानपुर मेयर पार्षद विवाद ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम की अंदरूनी राजनीति अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़क पर उतर आई है।

  • बागपत में खाप पंचायत का फरमान: बच्चों के स्मार्टफोन पर रोक, ड्रेस कोड भी तय

    बागपत में खाप पंचायत का फरमान: बच्चों के स्मार्टफोन पर रोक, ड्रेस कोड भी तय

    बागपत।उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में खाप पंचायत ने एक बार फिर अपने सख्त फैसलों को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। पंचायत ने बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही लड़के और लड़कियों के हाफ-पैंट पहनने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।खाप पंचायत का कहना है कि यह निर्णय पश्चिमी प्रभाव से बचाव और पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। पंचायत के अनुसार, बच्चों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत से पढ़ाई, सामाजिक व्यवहार और पारिवारिक संस्कारों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर चिंता

    पंचायत के सदस्यों का कहना है कि स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से बच्चे अपने परिवार और समाज से कटते जा रहे हैं। इसी वजह से गांव स्तर पर यह फैसला लिया गया कि नाबालिग बच्चों को स्मार्टफोन नहीं दिया जाएगा। पंचायत ने अभिभावकों से भी इस नियम का सख्ती से पालन कराने की अपील की है।

    पहनावे को लेकर भी सख्ती

    खाप पंचायत ने आदेश दिया है कि गांव में लड़के और लड़कियां हाफ-पैंट नहीं पहनेंगे। पंचायत का तर्क है कि आधुनिक पहनावा भारतीय संस्कृति और ग्रामीण मर्यादाओं के खिलाफ है। पंचायत ने कहा कि पारंपरिक और सादे वस्त्रों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    शादी को लेकर भी नया नियम

    खाप पंचायत ने विवाह समारोह को लेकर भी अहम फैसला लिया है। पंचायत के आदेश के मुताबिक, शादी केवल गांव या घर में ही आयोजित की जाएगी, मैरिज हॉल या बाहरी स्थानों पर शादी की अनुमति नहीं होगी। पंचायत का कहना है कि इससे फिजूलखर्ची रुकेगी और सामाजिक समानता बनी रहेगी।

    समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया

    इस फैसले के बाद गांव और आसपास के इलाकों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे संस्कृति संरक्षण की दिशा में सही कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल मान रहे हैं।फिलहाल खाप पंचायत ने साफ किया है कि इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

  • यूपी में ठंड का कहर: शेरों के लिए हीटर, 15 शहरों में स्कूल बंद, 25 में कोहरा

    यूपी में ठंड का कहर: शेरों के लिए हीटर, 15 शहरों में स्कूल बंद, 25 में कोहरा

    यूपी में ठंड का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ठंड से शेर तक कांपने लगे, जिसके चलते प्रदेश के चिड़ियाघरों में शेरों और अन्य जानवरों के लिए हीटर और ब्लोअर लगाए गए हैं।मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के 15 शहरों में अत्यधिक ठंड को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, 25 जिलों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर सुबह के समय दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई।

    यूपी में ठंड का कहर चिड़ियाघरों में भी साफ नजर आ रहा है। कानपुर, लखनऊ और गोरखपुर सहित कई शहरों के चिड़ियाघरों में जानवरों को ठंड से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। शेरों के बाड़ों में हीटर और ब्लोअर लगाए गए हैं, साथ ही उनके रहने की जगहों पर अतिरिक्त बिछावन की व्यवस्था की गई है।मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि क्रिसमस की रात प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण सर्दी पड़ सकती है। न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है। खासतौर पर पश्चिमी और मध्य यूपी में शीतलहर का प्रकोप अधिक रहने की उम्मीद है।

    घने कोहरे के कारण नेशनल हाईवे और प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई है। कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि उड़ानों पर भी असर पड़ा है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की अपील की है।यूपी में ठंड का कहर देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। रैन बसेरों की संख्या बढ़ाई गई है और गरीब व जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किए जा रहे हैं। डॉक्टरों ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे ठंड से बचाव के सभी उपाय अपनाएं।

  • मेरठ क्लीनिक हमला, नकाबपोश बदमाशों ने डॉक्टर को पीटा, CCTV में कैद वारदात

    मेरठ क्लीनिक हमला, नकाबपोश बदमाशों ने डॉक्टर को पीटा, CCTV में कैद वारदात

    मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र स्थित हवाईपट्टी कॉलोनी में मंगलवार सुबह मेरठ क्लीनिक हमला की सनसनीखेज घटना सामने आई। नकाबपोश बदमाशों ने एक निजी क्लीनिक में घुसकर डॉक्टर के साथ बेरहमी से मारपीट की। घटना के दौरान बीच-बचाव करने आई डॉक्टर की पत्नी के साथ भी अभद्रता की गई और डॉक्टर के गले से सोने की चेन लूट ली गई। पूरी वारदात पास की दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है।

    पीड़ित चिकित्सक शुभम, जो हवाईपट्टी कॉलोनी में ‘प्रेक्षा’ नाम से क्लीनिक चलाते हैं, अपनी पत्नी पारूल के साथ क्लीनिक में मौजूद थे। तभी दो बाइकों पर सवार चार नकाबपोश युवक क्लीनिक में दाखिल हुए और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। आरोपियों ने करीब डेढ़ तोले की सोने की चेन लूट ली और शोर मचाने पर जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए।

    घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें चार युवक मुंह पर कपड़ा बांधकर क्लीनिक में आते-जाते साफ दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टर शुभम ने थाने में तहरीर देकर एक आरोपी को नामजद किया है।

    इंस्पेक्टर सतवीर सिंह अत्री के अनुसार, डॉक्टर का कुछ समय पहले एक पड़ोसी युवक से विवाद हुआ था, जिस एंगल पर भी जांच की जा रही है। वहीं, मेरठ एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।मेरठ क्लीनिक हमला की इस घटना ने शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • फतेहपुर-होमगार्ड की गोद में बैठी युवती का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म

    फतेहपुर-होमगार्ड की गोद में बैठी युवती का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म

    फतेहपुर – जिले के गाजीपुर थाना क्षेत्र के कस्बे से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक युवती खुलेआम होमगार्ड की गोद में बैठी नजर आ रही है। लगभग 5 मिनट 18 सेकंड का यह वीडियो वायरल होते ही लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।वीडियो के वायरल होने के बाद तरह-तरह की बातें उठाई जाने लगीं। कई लोग इसे अनुशासनहीनता से जोड़ रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इसे निजी मामला बता रहे हैं। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस विभाग भी सवालों के घेरे में आ गया है।फतेहपुर-होमगार्ड की गोद में बैठी युवती का वीडियो वायरल

    इस संबंध में जब गाजीपुर थाना प्रभारी प्रमोद कुमार मौर्य से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जिस युवती को वीडियो में देखा जा रहा है, वह संबंधित होमगार्ड की रिश्तेदार है। ऐसे में सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को दरकिनार करना चाहिए।इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर वर्दीधारी के साथ इस तरह का आचरण सवाल खड़े करता है। वायरल वीडियो के चलते कस्बे में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा। फतेहपुर-होमगार्ड की गोद में बैठी युवती का वीडियो वायरल

    गौरतलब है कि आए दिन पुलिस और होमगार्ड कर्मियों के वीडियो सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरते रहते हैं। ऐसे मामलों से विभाग की छवि धूमिल होती है। हालांकि थाना प्रभारी का कहना है कि इस वीडियो में कोई आपत्तिजनक बात नहीं है, फिर भी मामले की आंतरिक रूप से जांच की जा रही है।