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  • पीलीभीत में दौड़ते हुए गिरे पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा, बोले- साजिशों से फिर जीतेंगे

    पीलीभीत में दौड़ते हुए गिरे पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा, बोले- साजिशों से फिर जीतेंगे

    उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक अनोखी और चर्चा में रहने वाली घटना सामने आई है, जहां पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा गिरे और वह भी उस वक्त जब वह केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के साथ दौड़ लगा रहे थे। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    पीलीभीत में दौड़ते हुए गिरे पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा, बोले- साजिशों से फिर जीतेंगे
    पीलीभीत में दौड़ते हुए गिरे पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा, बोले- साजिशों से फिर जीतेंगे

    बताया जा रहा है कि पीलीभीत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद और पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने आपसी उत्साह और जोश दिखाते हुए दौड़ लगाने का फैसला किया। दौड़ शुरू होते ही दोनों तेजी से आगे बढ़े, लेकिन कुछ ही दूरी पर हेमराज वर्मा का संतुलन बिगड़ गया और वह दौड़ते हुए अचानक मुंह के बल जमीन पर गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोग तुरंत उनकी ओर दौड़े और उन्हें उठाने में मदद की।

    गिरने के बाद हेमराज वर्मा ने खुद को संभालते हुए मुस्कुराकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हम गिरते-उठते आए हैं, साजिशों से फिर जीतेंगे।” उनके इस बयान को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे उन्होंने अपने समर्थकों और विरोधियों दोनों के लिए संकेत माना जा रहा है।

    इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों ने इसे हेमराज वर्मा के जुझारूपन से जोड़ते हुए कहा कि गिरने के बावजूद उनका हौसला कायम है। वहीं विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इस पर तंज कसते हुए अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

    हालांकि, हेमराज वर्मा गिरे इस घटना में उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई और वह पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं। कार्यक्रम के बाद उन्होंने बाकी गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। यह घटना फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया चर्चाओं का विषय बनी हुई है।

  • कानपुर देहात: एनएचआई 27 पर स्ट्रीट लाइट बंद, रात में हाईवे हुआ अंधेरे में डूबा

    कानपुर देहात: एनएचआई 27 पर स्ट्रीट लाइट बंद, रात में हाईवे हुआ अंधेरे में डूबा

    कानपुर देहात। जिले की एनएचआई 27 सड़क पर स्ट्रीट लाइट बंद होने से रात में हाईवे अंधेरे में डूब गया है। इस स्थिति के कारण भोगनीपुर से बारा जोड़ तक वाहन चालक और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    खतरे की स्थिति

    स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने बताया कि रात के समय सड़क पर किसी भी तरह की रोशनी न होने के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। कई बार छोटे वाहन और दोपहिया वाहन चालक धक्कामुक्की और फिसलने की घटनाओं से भी जूझते नजर आए हैं।

    इस मामले में जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। कानपुर देहात के डीएम ने जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। प्रशासन जल्द ही तकनीकी टीम भेजकर स्ट्रीट लाइटों की स्थिति की समीक्षा करेगा और सुधार सुनिश्चित करेगा।स्थानीय निवासी और वाहन चालक प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि हाईवे पर जल्द से जल्द सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि अंधेरे में चलने वाले राहगीरों और वाहन चालकों की जान को खतरा न हो। इसके अलावा, लोगों ने CCTV कैमरे और अतिरिक्त लाइटिंग की भी मांग की है।

  • औरैया: सड़क हादसे में सिपाही जितेंद्र की दर्दनाक मौत, पुलिस विभाग में शोक की लहर

    औरैया: सड़क हादसे में सिपाही जितेंद्र की दर्दनाक मौत, पुलिस विभाग में शोक की लहर

    औरैया। जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। अपर पुलिस अधीक्षक औरैया के हमराही सिपाही जितेंद्र की सड़क हादसे में मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस विभाग और साथियों में शोक की लहर दौड़ गई है।

    कैसे हुआ हादसा?

    जानकारी के मुताबिक, सिपाही जितेंद्र छुट्टी पर घर जाने के लिए सुबह बाइक से निकले थे। जब वे दिबियापुर रोड पर पहुंचे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि जितेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए।

    इलाज के दौरान मौत

    घायल अवस्था में उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने इलाज के दौरान ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद पुलिस महकमे में गम का माहौल है। साथी जवान और अधिकारी इस हादसे को बेहद दुखद बता रहे हैं।सिपाही जितेंद्र को उनके कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार व्यवहार के लिए जाना जाता था। उनकी अचानक हुई मौत से पूरा विभाग सदमे में है। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटना पर गहरा शोक जताया है और परिजनों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

  • “नो हेलमेट नो फ्यूल” 1 से 30 सितंबर तक यूपी में लागू नया नियम

    “नो हेलमेट नो फ्यूल” 1 से 30 सितंबर तक यूपी में लागू नया नियम

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक “नो हेलमेट, नो फ्यूल” अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बिना हेलमेट लगाए दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा।सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को दंडित करना नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जिलाधिकारी के नेतृत्व में अभियान का संचालन होगा और जिला सड़क सुरक्षा समिति (डीआरसीएस) इसका समन्वय करेगी। पुलिस, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन प्रवर्तन की मुख्य जिम्मेदारी निभाएंगे।

    पहले हेलमेट फिर मिलेगा ईंधन “नो हेलमेट, नो फ्यूल”

    परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने कहा-नो हेलमेट, नो फ्यूल दंड का अभियान नहीं है, बल्कि सुरक्षा का संकल्प है। हेलमेट पहनना जीवन का सबसे आसान और सस्ता बीमा है। सरकार चाहती है कि ‘हेलमेट पहले, ईंधन बाद में’ को एक स्थायी नियम बनाया जाए।”

    तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों की भूमिका “नो हेलमेट, नो फ्यूल”

    इस अभियान को सफल बनाने के लिए आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी तेल विपणन कंपनियों से सहयोग मांगा गया है। पेट्रोल पंप संचालकों से अपील की गई है कि वे बिना हेलमेट वालों को ईंधन न दें और अभियान को पूरी तरह लागू करें। खाद्य एवं रसद विभाग पेट्रोल पंप स्तर पर समन्वय और निगरानी करेगा।

    ईंधन बिक्री पर असर नहीं “नो हेलमेट, नो फ्यूल”

    परिवहन विभाग का कहना है कि ऐसे अभियानों का पहले भी सकारात्मक असर देखा गया है। शुरुआत में थोड़ी असुविधा होती है, लेकिन जल्द ही लोग हेलमेट पहनकर पेट्रोल पंप आने लगते हैं। इससे ईंधन बिक्री पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता, बल्कि यह पहल नागरिकों की सुरक्षा और सड़क हादसों में कमी लाने का प्रभावी कदम है।

  • औरैया: तहसील परिसर में बंदरों का आतंक, नोट उड़ाकर मचाई अफरा-तफरी

    औरैया: तहसील परिसर में बंदरों का आतंक, नोट उड़ाकर मचाई अफरा-तफरी

    रिपोर्टर: अमित शर्मा औरैया। जनपद में बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला तहसील परिसर का है, जहां बंदरों ने अचानक नोटों की गड्डी उड़ाकर पूरे परिसर में अफरा-तफरी मचा दी। औरैया: तहसील परिसर में बंदरों का आतंक

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बंदर किसी तरह नोटों की गड्डी लेकर आए और अचानक उन्हें तहसील परिसर में इधर-उधर उड़ाने लगे। नोटों को गिरते देख लोग हैरान रह गए और उन्हें समेटने के लिए दौड़ पड़े।औरैया: तहसील परिसर में बंदरों का आतंक

    इस घटना से तहसील परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बन गया। हालांकि बाद में लोगों को समझ आया कि यह कोई शरारत नहीं बल्कि बंदरों की करतूत थी। औरैया: तहसील परिसर में बंदरों का आतंक

    गौरतलब है कि औरैया जिले में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन बंदरों द्वारा लोगों को परेशान करने और सामान छीनने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। अब तहसील परिसर में इस तरह नोट उड़ाए जाने की घटना प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।औरैया: तहसील परिसर में बंदरों का आतंक

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  • लखनऊ: होटल में 40 ठाकुर विधायकों की बैठक, यूपी की सियासत में मची हलचल

    लखनऊ: होटल में 40 ठाकुर विधायकों की बैठक, यूपी की सियासत में मची हलचल

    लखनऊ। राजधानी लखनऊ के एक नामी होटल में मंगलवार को उत्तर प्रदेश के करीब 40 ठाकुर विधायकों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक के बाद प्रदेश की सियासत में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

    बैठक का एजेंडा क्या था? लखनऊ: होटल में 40 ठाकुर विधायकों की बैठक

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले समय की रणनीतियों पर चर्चा हुई। हालांकि, किसी भी विधायक ने मीडिया के सामने आधिकारिक बयान देने से परहेज़ किया।

    राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज लखनऊ: होटल में 40 ठाकुर विधायकों की बैठक

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में ठाकुर विधायकों का एक साथ इकट्ठा होना, आगामी विधानसभा और लोकसभा समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकता है।
    कई लोग इसे यूपी की सत्ता के भीतर किसी नए समीकरण के बनने से भी जोड़कर देख रहे हैं।

    पार्टी नेतृत्व की भूमिका पर सवाल लखनऊ: होटल में 40 ठाकुर विधायकों की बैठक

    बैठक में शामिल कुछ विधायकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चर्चा में क्षेत्रीय विकास, संगठनात्मक मुद्दों और सियासी भागीदारी जैसे विषय भी उठाए गए।

    सोशल मीडिया पर चर्चा जोरों पर लखनऊ: होटल में 40 ठाकुर विधायकों की बैठक

    इस बैठक की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। यूज़र्स तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यूपी की सियासत में यह “ठाकुर पावर शो” किस तरफ इशारा कर रहा है।