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  • रायबरेली में गूगल से मंदिर खोजकर घंटा चोरी करने वाला गैंग गिरफ्तार, 3 क्विंटल से ज्यादा घंटे बरामद

    रायबरेली में गूगल से मंदिर खोजकर घंटा चोरी करने वाला गैंग गिरफ्तार, 3 क्विंटल से ज्यादा घंटे बरामद

    रायबरेली।डिजिटल जमाने में अपराध के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। रायबरेली पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो गूगल सर्च और लोकेशन के जरिए मंदिरों की पहचान कर वहां से घंटे चोरी करता था। इस गिरोह का मुखिया मध्य प्रदेश के भिंड जिले का रहने वाला है, जो किसी भी नए शहर में पहुंचते ही पहले वहां के प्रमुख मंदिरों को ऑनलाइन सर्च करता था।


    गूगल लोकेशन से मंदिर चिन्हित कर देते थे वारदात को अंजाम

    पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य किसी भी जिले में जाने से पहले गूगल मैप और सर्च इंजन के माध्यम से प्रमुख और पुराने मंदिरों की लोकेशन निकालते थे। इसके बाद रात के समय मंदिर पहुंचकर वहां लगे भारी-भरकम घंटों को चोरी कर लेते थे। चोरी के बाद ये लोग तेजी से जिला छोड़ देते थे, जिससे पुलिस को इनके बारे में सुराग मिलने में दिक्कत होती थी।


    पुलिस चेकिंग से बचने का अनोखा तरीका

    इस गैंग की एक खास रणनीति यह भी थी कि ये अपने साथ एक महिला को रखते थे। पुलिस चेकिंग के दौरान महिला को बीमार बताकर वाहन को बिना ज्यादा जांच के निकलवा लिया जाता था। इसी चाल के कारण यह गिरोह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।


    स्थानीय लोगों की मिलीभगत भी आई सामने

    पुलिस के अनुसार, गैर जनपद से आए इस गिरोह ने रायबरेली के दो स्थानीय लोगों को भी अपने साथ मिला लिया था। इनकी मदद से गिरोह को मंदिरों की जानकारी, रास्तों और इलाके की स्थिति समझने में आसानी होती थी। हाल ही में गिरोह ने जगतपुर थाना क्षेत्र स्थित एक मंदिर को निशाना बनाया था, जहां से कई घंटे चोरी किए गए थे।


    संयुक्त कार्रवाई में गिरोह गिरफ्तार

    घटना के खुलासे के बाद जगतपुर थाना पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों को ऊंचाहार क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने इनके पास से 3 क्विंटल से अधिक मंदिर के घंटे और एक चार पहिया वाहन बरामद किया है।


    अन्य जिलों में भी कर चुके हैं वारदात

    रायबरेली के पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने उन्नाव जिले में भी मंदिरों से घंटे चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है। अन्य जिलों में हुई चोरी की वारदातों को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है।


    डिजिटल साधनों से अपराध पर पुलिस की नजर

    इस मामले ने साफ कर दिया है कि अपराधी अब तकनीक का सहारा लेकर वारदात कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर अब डिजिटल निगरानी और स्थानीय स्तर पर सतर्कता और बढ़ाई जाएगी।

  • रायबरेली: सरकारी स्कूल में बच्चों से ईंटें ढुलवाई, वीडियो वायरल

    रायबरेली: सरकारी स्कूल में बच्चों से ईंटें ढुलवाई, वीडियो वायरल

    रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला वीडियो सामने आया है। अमावां ब्लॉक के संदी नागिन प्राथमिक विद्यालय में मासूम बच्चों से ईंटें ढुलवाकर इंटरलॉकिंग का काम करवाया जा रहा है। वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि बच्चे भारी ईंटें उठाकर स्कूल परिसर में ले जा रहे हैं, और वहीं विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रतिभा सिंह खुद उन्हें निर्देश देती दिखाई दे रही हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने जिले में हड़कंप मचा दिया है। वीडियो सामने आने के बाद प्रधानाध्यापिका कैमरा देखते ही बच्चे को अंदर भेजने लगती हैं और वीडियो को डिलीट करने की गुजारिश करती भी नजर आती हैं। लेकिन तब तक पूरा मामला रिकॉर्ड हो चुका था और अब लोगों में भारी आक्रोश है।

    स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में बच्चों को श्रम करवाना न केवल गैरकानूनी है बल्कि बच्चों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। बच्चों को पढ़ाई के बजाय मजदूरी जैसे कार्यों में लगाने से शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आती है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    बाल श्रम कानून के मुताबिक, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का श्रम कराना अपराध है, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि एक सरकारी विद्यालय में यह सब कैसे और किसकी अनुमति से हो रहा था?

    जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी अब मामले की जांच में जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में लापरवाही साफ दिख रही है, और विभाग जल्द ही प्रधानाध्यापिका के खिलाफ सस्पेंशन समेत गंभीर कार्रवाई कर सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद अधिकारियों पर भी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

    इस शर्मनाक घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा विभाग इस मामले में कितना सख्त कदम उठाता है।