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  • अमित शाह का RJD पर हमला: “अगर शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट मिलेगा तो बिहार कैसे सुरक्षित रहेगा?”

    अमित शाह का RJD पर हमला: “अगर शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट मिलेगा तो बिहार कैसे सुरक्षित रहेगा?”

    छपरा। बिहार के छपरा में आयोजित एक जनसभा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजद (RJD) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने लालू यादव परिवार पर आरोप लगाया कि वे अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं और बिहार को फिर से जंगलराज की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं।

    अमित शाह ने कहा, “अगर लालू परिवार शहाबुद्दीन के बेटे को टिकट दे तो क्या बिहार सुरक्षित रह सकता है? क्या ऐसे लोग सुशासन दे सकते हैं?” उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार में कानून-व्यवस्था और विकास का माहौल बना है, लेकिन महागठबंधन की नीतियाँ इसे फिर से अंधकार युग में ले जा सकती हैं।

    शाह ने मंच से जनता से अपील करते हुए कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता को “परिवारवाद और भ्रष्टाचार” के खिलाफ वोट देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद के शासन में अपराध, अपहरण और माफिया राज चरम पर था, और अब लालू यादव के परिवार के लोग उसी राह पर फिर से लौटना चाहते हैं।

    भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य “समृद्ध बिहार” बनाना है, जबकि राजद का एजेंडा “परिवार का बिहार” है। सभा में अमित शाह के इस बयान पर लोगों में जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का यह बयान चुनावी रणनीति के तहत दिया गया है ताकि भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक को और मजबूत कर सके तथा राजद के अपराध-जुड़े चेहरे को जनता के बीच फिर से उजागर किया जा सके।

  • बिहार राजनीति: लालू-नीतीश पर ही निर्भर कांग्रेस और भाजपा, नया चेहरा क्यों नहीं?

    बिहार राजनीति: लालू-नीतीश पर ही निर्भर कांग्रेस और भाजपा, नया चेहरा क्यों नहीं?

    पटना। बिहार की राजनीति में लगभग तीन दशकों से चेहरों का खेल दो नेताओं—लालू प्रसाद यादव और नीतिश कुमार—तक ही सीमित है। आज भी कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियां राज्य में इन्हीं चेहरों पर निर्भर हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति बिहार की लोकतांत्रिक राजनीति की सबसे बड़ी कमजोरी है। बिहार राजनीति

    लालू-नीतिश के इर्द-गिर्द घूमती राजनीति
    लालू यादव के उभार के बाद से ही उनके विरोध में नीतिश कुमार का चेहरा सामने आया। इसके बाद से अब तक बिहार की राजनीति इन्हीं दो ध्रुवों पर टिकी है। विरोध करने वाले नेता या तो नीतिश के साथ हो जाते हैं या फिर लालू परिवार के खिलाफ खड़े होते हैं। बिहार राजनीति

    स्थानीय लोगों की राय
    बक्सर के किसान राम भूवन कहते हैं, “यहां राजनीति का हाल यह है कि या तो कोई लालू का समर्थक होता है या विरोधी। विरोधियों का रास्ता सीधा नीतिश तक ही जाता है। कांग्रेस और भाजपा के पास भी कोई चर्चित चेहरा नहीं है।”बिहार राजनीति

    विश्लेषकों का नजरिया क्या कहता है

    • नई दुनिया के संपादक सतीश श्रीवास्तव कहते हैं, “यह बिहार की राजनीति का दुर्भाग्य है कि यहां बड़े जनआंदोलन हुए, पर आज प्रमुख पार्टियों के पास अपना चेहरा नहीं है। राजनीति अब सिर्फ लालू और नीतिश पर सिमट गई है।”
    • शिक्षक रविकांत के अनुसार, “जातीय समीकरणों में बंटे बिहार में कोई ऐसा नेता नहीं आया जो युवाओं को आकर्षित कर सके। इस कारण राजनीति लालू और नीतिश तक सीमित हो गई है।”
    • समाजशास्त्री प्रो. राम विलास का मानना है, “बिहार की राजनीति में संकीर्णता अधिक है, इसलिए नए चेहरे उभर नहीं पाते। आने वाले दशक में कोई नया नेतृत्व उभर सकता है, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना कम है।”

    विश्लेषकों का मानना है कि हाल में कुछ नए नेता जैसे प्रशांत कुमार या कन्हैया कुमार अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करते दिखे, लेकिन वे भी कांग्रेस और लालू परिवार की राजनीति में दबकर रह गए। इससे साफ है कि बिहार की राजनीति में नया चेहरा उभरना अभी आसान नहीं है। बिहार राजनीति