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Tag: समाजवादी पार्टी

  • मेरठ दौरे पर अखिलेश यादव ने पहना ब्लैक कोट, जिला पंचायत सदस्य ने गिफ्ट किया

    मेरठ दौरे पर अखिलेश यादव ने पहना ब्लैक कोट, जिला पंचायत सदस्य ने गिफ्ट किया

    मेरठ में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का हाल ही में हुआ दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। इस दौरान उन्होंने ब्लैक कलर का कोट पहना, जो न केवल उनके स्टाइल को उभार रहा था, बल्कि राजनीतिक और व्यक्तिगत जुड़ाव का प्रतीक भी माना जा रहा है।

    इस ब्लैक कोट का खास महत्व है। बताया जा रहा है कि लगभग 20 दिन पहले मेरठ के विद्यार्थी खादी भंडार से अखिलेश यादव को यह कोट पसंद आया था। तब उन्होंने इसे देखा और वार्ड नंबर-14 से जिला पंचायत सदस्य सम्राट मलिक को यह कोट पहने देखा। कुछ ही समय बाद, यही कोट उन्हें गिफ्ट के रूप में दिया गया।

    अखिलेश यादव ने मेरठ दौरे के दौरान यह कोट पहनकर आम जनता और मीडिया के बीच अपने स्टाइल और सादगी का मिश्रण दिखाया। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेता के स्टाइल और पहनावे पर भी लोगों की नजर रहती है, और यह कोट अखिलेश यादव के व्यक्तित्व को और भी प्रभावशाली बनाता है।

    जिला पंचायत सदस्य सम्राट मलिक ने इस गिफ्ट के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत सम्मान व्यक्त किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि नेताओं और आम जनता के बीच संवाद और सहयोग कितना महत्वपूर्ण होता है। खादी भंडार का यह कोट स्थानीय स्तर पर उत्पादन और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा देने वाला प्रतीक बन गया है।

    मेरठ दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने स्थानीय नेताओं और समर्थकों से मुलाकात की, साथ ही जनता से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने राजनीतिक एजेंडे और आगामी योजनाओं पर चर्चा भी की। उनके स्टाइलिश ब्लैक कोट ने इस दौरे की तस्वीरों में एक अलग पहचान बनाई और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    इस तरह, अखिलेश यादव ब्लैक कोट सिर्फ फैशन का प्रतीक नहीं बल्कि राजनीतिक सादगी और स्थानीय समर्थन का भी संदेश दे रहा है। जनता और समर्थकों के बीच इस कोट की कहानी अब लंबे समय तक याद रहेगी।

  • सीरप कांड में सपा नेताओं की मिलीभगत का आरोप, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का बड़ा बयान

    सीरप कांड में सपा नेताओं की मिलीभगत का आरोप, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का बड़ा बयान

    उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित सीरप मामले में सपा नेताओं की मिलीभगत को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राज्य के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस पूरे प्रकरण में सपा नेताओं का सीधा कनेक्शन सामने आ रहा है। मंत्री ने दावा किया कि आरोपियों की तस्वीरें समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ मौजूद हैं, जिससे मिलीभगत स्पष्ट होती है।

    दयाशंकर सिंह ने कहा कि यह मामला केवल अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण की भी आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर नकली या संदिग्ध सीरप से जुड़े आरोप हैं, उनके संबंध सपा के प्रभावशाली नेताओं से रहे हैं। मंत्री के अनुसार, तस्वीरें और सार्वजनिक मंचों पर मौजूदगी इस बात का प्रमाण हैं कि आरोपी अकेले नहीं थे।

    परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान योगी सरकार इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं और चाहे कोई भी कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।

    सीरप मामले में सपा नेताओं की मिलीभगत के आरोपों के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से भी पलटवार देखने को मिला है। सपा नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और कहा है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है।

    इस पूरे विवाद के बीच मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। जहां भाजपा इसे पिछली सरकारों के दौरान पनपे भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रही है, वहीं सपा इसे भाजपा की विफलताओं से ध्यान हटाने की रणनीति करार दे रही है।

    फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जांच प्रक्रिया जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच की दिशा क्या मोड़ लेती है, इस पर प्रदेश की राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं।

  • ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय सियासत तेज होती नजर आ रही है। ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर “ठाकुरवादी सोच” को बढ़ावा देने और एक जाति विशेष को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि अब इस कथित जातिवादी रवैये के खिलाफ ब्राह्मण समाज भी खुलकर सामने आ गया है।

    समाजवादी पार्टी का कहना है कि अब तक दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय इस राजनीति के शिकार होते रहे हैं, लेकिन अब ब्राह्मण समाज की नाराजगी भाजपा के लिए नई चुनौती बन गई है। सपा नेताओं ने दावा किया कि ब्राह्मण समाज की यह नाराजगी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता से विदाई का कारण बनेगी।

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। सत्र के तीसरे दिन मंगलवार शाम कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर यह बैठक आयोजित हुई। इस बैठक को ‘सहभोज’ का नाम दिया गया था।

    इस सहभोज में पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। बैठक के बाद सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। विपक्ष ने इसे भाजपा के भीतर जातिगत संतुलन साधने की कवायद बताया है।

    सपा नेताओं का आरोप है कि भाजपा अब अंदरूनी असंतोष को दबाने के लिए इस तरह की बैठकें कर रही है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों से नाराज ब्राह्मण समाज अब सवाल उठाने लगा है और यही कारण है कि इस बैठक ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।

    हालांकि भाजपा की ओर से इस बैठक को सामान्य सामाजिक आयोजन बताया जा रहा है, लेकिन ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • डिंपल यादव का केंद्र पर तीखा हमला “नाम बदलने वाली सरकार पहले मनरेगा के आंकड़े पेश करे”

    डिंपल यादव का केंद्र पर तीखा हमला “नाम बदलने वाली सरकार पहले मनरेगा के आंकड़े पेश करे”

    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार सिर्फ योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने में व्यस्त है, जबकि ग्रामीण रोजगार और मजदूरी जैसे अहम मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। मनरेगा को लेकर डिंपल यादव ने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए पिछले 10 वर्षों के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।

    डिंपल यादव ने कहा,“यह नाम बदलने वाली सरकार है। पहले सरकार बताए कि पिछले 10 सालों में मनरेगा के तहत कितनी मजदूरी दी गई है। आंकड़े पेश करें, तभी सच्चाई सामने आएगी।”उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ रही है, मजदूरी समय पर नहीं मिल रही और काम के दिनों में कटौती की जा रही है। इसके बावजूद सरकार जमीनी हकीकत पर चर्चा करने के बजाय सिर्फ प्रचार और ब्रांडिंग में लगी है।

    सपा सांसद ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों गरीब, किसान और मजदूर परिवारों की जीवनरेखा है। यह योजना सिर्फ रोजगार नहीं देती, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मजदूरी भुगतान में देरी, बजट कटौती और काम के अवसर घटने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

    डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अगर सरकार वाकई गरीबों और मजदूरों के हित में काम कर रही है, तो उसे मनरेगा से जुड़े भुगतान, काम के दिन और मजदूरी दर के पूरे आंकड़े देश के सामने रखने चाहिए। केवल योजनाओं के नाम बदलने से जनता की समस्याएं हल नहीं होंगी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनावों के बाद विपक्ष अब रोजगार, महंगाई और ग्रामीण विकास को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है। मनरेगा जैसे मुद्दे को उठाकर समाजवादी पार्टी ने ग्रामीण और पिछड़े वर्गों को साधने की रणनीति अपनाई है।डिंपल यादव के इस बयान के बाद अब सभी की नजर केंद्र सरकार के जवाब पर है। सवाल साफ है—क्या सरकार मनरेगा के पिछले 10 सालों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करेगी, या यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा?

  • UP News : मर्सिडीज से गमला चोरी पर CM योगी की टिप्पणी, अखिलेश यादव का तीखा हमला

    UP News : मर्सिडीज से गमला चोरी पर CM योगी की टिप्पणी, अखिलेश यादव का तीखा हमला

    UP News : लखनऊ। राजधानी लखनऊ में हुए एक दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जी-20 शिखर सम्मेलन से जुड़ी एक रोचक और चौंकाने वाली घटना साझा की। उन्होंने बताया कि आयोजन के दौरान शहर को सजाने के लिए लगाए गए गमलों में से कुछ गमले एक व्यक्ति मर्सिडीज कार में आकर उठा ले गया। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड भी हुई।

    सीएम योगी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में मौजूद मूल्यों और नैतिकता की कमी की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय अतिथि भारत की मेहमाननवाज़ी और स्वच्छता की सराहना कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग सार्वजनिक संपत्ति को अपना समझकर उठा ले जा रहे थे। मुख्यमंत्री ने इसे सामाजिक चेतना की कमी और “व्यक्ति–प्रधान मानसिकता” का उदाहरण बताया।


    अखिलेश यादव का पलटवार: “मर्सिडीज़ वालों से बुलडोज़र डरता है क्या?”

    सीएम योगी के इस बयान के बाद सियासी माहौल भी गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए तंज कसा“मर्सिडीज़ वालों से बुलडोज़र डरता है क्या, या अमीरों को विशेष छूट?”अखिलेश का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से सरकार पर हमला था, जिसमें उन्होंने कानून के समान अनुपालन पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर गमला चोरी जैसी घटना किसी गरीब या आम नागरिक ने की होती, तो कार्रवाई होती, लेकिन मर्सिडीज कार से जुड़ी घटना पर सरकार की तरफ से कोई बुलडोज़र कार्रवाई नहीं हुई।


    राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा

    सीएम योगी की टिप्पणी मूल रूप से सामाजिक मूल्यों पर सवाल उठाने के लिए थी, लेकिन अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। इससे यूपी की राजनीति में एक बार फिर “बुलडोज़र मॉडल”, “अमीर–गरीब के लिए अलग कानून” और “कानून-व्यवस्था” जैसे मुद्दे फिर से सुर्खियों में आ गए।विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी मौसम में ऐसी बयानबाज़ी सिर्फ विवाद नहीं बढ़ाती, बल्कि राजनीतिक मैदान में नए नैरेटिव भी गढ़ती है।

  • अखिलेश यादव के सामने रोते हुए बोला कानपुर का सत्यम त्रिवेदी, जानिए क्या है पूरा मामला

    अखिलेश यादव के सामने रोते हुए बोला कानपुर का सत्यम त्रिवेदी, जानिए क्या है पूरा मामला

    कानपुर। इंस्पेक्टर पर पिटाई करने का आरोप लगाने वाला युवक सपा नेता के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास लखनऊ पहुंचा और रो पड़ा। उसने कहा कि इंस्पेक्टर ने जाति विशेष को लेकर अपमानित किया और जमीन पर बैठाकर पीटा। पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। कानपुर का सत्यम त्रिवेदी

    पनकी के रतनपुर निवासी सत्यम त्रिवेदी ने बताया कि पड़ोसी से 25 अप्रैल को घर के बाहर की नाली को लेकर विवाद हुआ था। दोनों पक्ष पनकी थाने पहुंचे, जहां एक पक्ष ने पड़ोसी को कुर्सी पर बैठाने और उन्हें जमीन पर बैठाने का आरोप लगाया

    आरोप है कि पनकी इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह ने जाति विशेष शब्दों का प्रयोग कर पीटा व गाली-गलौज कर अपमानित किया। कहीं सुनवाई न होने पर शुक्रवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय भी पहुंचे। इसके बाद मामले की जांच एडीसीपी पश्चिम को सौंपी गई। कानपुर का सत्यम त्रिवेदी

    सोमवार को कानपुर महानगर के युवजन सभा अध्यक्ष अर्पित त्रिवेदी ने पनकी थाना अध्यक्ष द्वारा अप्रैल में सत्यम त्रिवेदी को पनकी थानाध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह द्वारा जूतों से मारते हुए जातिसूचक गालियां दी गयी थी। जिसकी सूचना कानपुर महानगर के युवजन सभा अध्यक्ष अर्पित त्रिवेदी ने सपा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को इस मामले की जानकारी दी। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें सत्यम त्रिवेदी के साथ लखनऊ बुलाया, जहां सत्यम रो पकड़े और आपबीती बता इंस्पेक्टर पर पिटाई का आरोप लगाया। कानपुर का सत्यम त्रिवेदी

    पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि पार्टी न्याय दिलाने का काम करेगी। कार्रवाई भी कराएंगे। वहीं, इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि सत्यम का पड़ोसी से विवाद हुआ तो उसने उनसे मारपीट की थी। सत्यम पर पहले से ही पनकी, गुजैनी थाने समेत थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। उसके आरोप झूठे हैं।कानपुर का सत्यम त्रिवेदी