Omprakash Rajbhar Jaunpur visit: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के शाहगंज विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार स्वागत किया। राजभर ने जन चौपाल को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और समाजवादी पार्टी (सपा) व उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा।
🔴 ब्रेकिंग न्यूज – जौनपुर ▪️ शाहगंज पहुंचे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत ▪️ जन चौपाल में बोले – अखिलेश यादव जानते हैं मुसलमान उनका गुलाम है ▪️ बोले – सीतापुर जेल में आजम खान से मिलने नहीं जाएंगे अखिलेश ▪️ सपा अध्यक्ष को जन्मदिन पर तंज -… pic.twitter.com/IsrRjIklgs
“अखिलेश यादव जानते हैं मुसलमान उनका गुलाम है” Omprakash Rajbhar Jaunpur visit
मीडिया से बात करते हुए राजभर ने अखिलेश पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि “जब रमाकांत यादव जेल में बंद हैं तो अखिलेश उनसे मिलने आजमगढ़ जा सकते हैं, लेकिन सीतापुर जेल में बंद आजम खान से नहीं मिलने जाएंगे। क्योंकि उन्हें मालूम है कि मुसलमान उनका गुलाम है, वह उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि “हमने मुसलमानों को बीजेपी से नफरत करना सिखाया है ताकि वे हमें वोट दें।” Omprakash Rajbhar Jaunpur visit
जन चौपाल के दौरान राजभर ने अखिलेश यादव के जन्मदिन पर तंज कसते हुए कहा, “हम उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं कि वह दिन-दोगुना और रात-चार गुना चिंतन करें।” इस दौरान उन्होंने सपा की कथित नीतियों पर जमकर कटाक्ष किया। Omprakash Rajbhar Jaunpur visit
इटावा में कथावाचक विवाद को लेकर राजभर ने सपा पर हमला बोला और कहा कि सपा शासनकाल में दंगे आम बात थे। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव ‘अहिर रेजीमेंट’ बनाकर दंगा करवाना चाहते हैं।”
राजभर ने आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सुभासपा अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी।
इस पूरे दौरे में ओमप्रकाश राजभर का रुख पूरी तरह से आक्रामक रहा और उन्होंने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप (UP DNA Row) के भंवर में उलझती नजर आ रही है. डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा समाजवादी पार्टी के “डीएनए” पर की गई टिप्पणी ने सूबे की राजनीति में हलचल मचा दी है. पाठक की इस टिप्पणी के जवाब में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे ‘अशोभनीय’ बताते हुए मर्यादा में रहने की सलाह दी है. हालांकि, ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया कि उनके कहे डीएनए का संबंध किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि सपा की कार्यप्रणाली, विचारधारा और चरित्र से था.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सपा के डीएनए में खामी का उल्लेख किया. इस पर समाजवादी पार्टी की मीडिया इकाई ने उनके माता-पिता पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी. आलोचना और मुकदमे की आशंका के चलते बाद में वह पोस्ट हटा दी गई. जवाब में अखिलेश यादव ने पाठक को नसीहत दी कि वे यदुवंशियों के डीएनए पर टिप्पणी करने से बचें.
सोमवार सुबह ब्रजेश पाठक ने एक और पोस्ट कर स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी समुदाय विशेष को लेकर नहीं थी, बल्कि सपा की विचारधारा पर आधारित थी. उन्होंने कहा, “सपा का डीएनए यानी उसकी चाल, चरित्र और चेहरा जातिवाद और तुष्टीकरण की राजनीति पर आधारित रहा है. मुस्लिम तुष्टीकरण समाजवादी पार्टी की राजनीति का मूल हिस्सा रहा है.”
“अखिलेश यादव जी, आप डीएनए के सवाल पर बहुत भड़के हुए हैं। मैने ये कह क्या दिया कि समाजवादी पार्टी के डीएनए में ख़राबी है, आप आपे से उसी तरह बाहर हो गए जैसे दस साल पहले यूपी की सत्ता से बाहर हो गए थे। आप इस बात को समझिए कि डीएनए में खराबी से हमारा मतलब किसी व्यक्ति विशेष से नहीं,…
ब्रजेश पाठक ने सपा पर आरोप लगाया कि वह हमेशा दलितों के अधिकारों को दबाने और समाज को बांटने का कार्य करती रही है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार ने मुख्यमंत्री रहते हुए आतंकियों से जुड़े 14 केस वापस लिए थे, जो तुष्टीकरण की नीति को दर्शाता है.
अखिलेश यादव का पलटवार और सियासी मर्यादा की नसीहत– UP DNA Row
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक की टिप्पणी को अमर्यादित करार देते हुए कहा कि यह भाजपा नेताओं की गिरती हुई सोच का प्रतीक है. उन्होंने पाठक को यह याद दिलाने की कोशिश की कि उत्तर प्रदेश की जनता अब जातीय भेदभाव और सांप्रदायिकता की राजनीति को नहीं सहती.
"मुख्यमंत्री जी अगर डीएनए की बात करते हैं तो मैं अपना डीएनए चेक कराना चाहता हूं लेकिन मुख्यमंत्री जी आप भी अपना डीएनए चेक कराओ। एक मुख्यमंत्री होकर, संत होकर उन्हें इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए।"
अखिलेश यादव ने कहा कि डीएनए पर टिप्पणी करना पूरी बिरादरी और उनके सम्मान पर सवाल उठाने जैसा है. उन्होंने भाजपा से अपील की कि वह चुनावों में विकास और मुद्दों की राजनीति करे, न कि व्यक्तिगत आक्षेप और जातीय विवादों को हवा दे.
ओम प्रकाश राजभर का संतुलन और फोकस राजनीति पर, UP DNA Row
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दोनों दलों को सलाह देते हुए कहा कि राजनीति में ऐसे बयानबाजी से ज्यादा मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “डीएनए पर बात करने की बजाय बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई और किसान हितों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो तो बेहतर होगा.”
"कैसे मुख्यमंत्री हैं, इन्हें कौन राय दे रहा है? यह इन्हीं का कानून है 2023 का संशोधित जिसमें कहा गया है कि डीएनए टेस्ट होना चाहिए अगर 7 साल से ज्यादा किसी सजा का प्रावधान है तो, तो क्या गलत मांग की?"
राजभर ने यह भी कहा कि जब नेता सत्ता में होते हैं तो सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन सत्ता जाते ही उन्हें खामियां नजर आने लगती हैं. उन्होंने सपा नेताओं को भी नसीहत दी कि वे गेस्टहाउस कांड को न भूलें और दोहरे मापदंड अपनाने से बचें.
केतकी सिंह का हमला: सपा पाकिस्तान प्रेमी मानसिकता वाली पार्टी, UP DNA Row
बलिया की बांसडीह से भाजपा विधायक केतकी सिंह ने इस विवाद को लेकर सपा पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा भारत विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देती है. उन्होंने पूछा कि जब पाकिस्तान पर कार्रवाई होती है तो सपा नेताओं को दर्द क्यों होता है?
केतकी सिंह ने कहा कि यह मानसिकता दर्शाती है कि सपा नेताओं की निष्ठा कहां है. उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा, “ये भारत में रहते हैं, भारत का खाते हैं और पाकिस्तान की बात करते हैं.” उन्होंने ब्रजेश पाठक पर की गई टिप्पणियों को गंदी मानसिकता बताया और कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
विश्लेषण: सियासी बयानबाजी से किसका नुकसान ?, UP DNA Row
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण तो पैदा करती है, लेकिन असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं. रोजगार, महंगाई, शिक्षा और किसानों के विषय पर बहस होनी चाहिए, लेकिन नेताओं की प्राथमिकता बयानबाजी तक सीमित रह गई है. राजनीतिक दलों को समझना होगा कि मतदाता अब ज्यादा जागरूक हो चुका है और वह सिर्फ जुबानी जंग से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों से प्रभावित होता है.