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  • सीतापुर के परसेंडी ब्लॉक में मनरेगा भ्रष्टाचार, 5 मजदूर मौके पर 70 कागजों में

    सीतापुर के परसेंडी ब्लॉक में मनरेगा भ्रष्टाचार, 5 मजदूर मौके पर 70 कागजों में

    संवाददाता शिवाकांत दीक्षित उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से मनरेगा में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। विकासखंड परसेंडी की ग्राम पंचायत धरनाग में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीनी हकीकत और सरकारी रिकॉर्ड में भारी अंतर देखने को मिल रहा है।

    मौके की स्थिति यह है कि कार्यस्थल पर केवल 5 श्रमिक काम करते हुए पाए जाते हैं, जबकि ऑनलाइन और कागजी रिकॉर्ड में 65 से 70 श्रमिकों की उपस्थिति लगातार दर्ज की जा रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सीतापुर मनरेगा भ्रष्टाचार के तहत फर्जी मजदूर दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।

    आरोप है कि इस पूरे मामले में खंड विकास अधिकारी (BDO), ग्राम सचिव, तकनीकी सहायक, ग्राम प्रधान और डीसी मनरेगा की मिलीभगत से सरकार के साथ आंख मिचौली का खेल खेला जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार केवल धरनाग पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि सीतापुर जिले के अन्य विकासखंडों में भी इसी तरह की गतिविधियां सामने आ रही हैं।

    जानकारी के अनुसार हरगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत सिकंदरपुर में भी मनरेगा के तहत इसी तरह का भ्रष्टाचार अंजाम दिया जा रहा है। आरोप यह भी है कि जिला स्तर के कुछ सक्षम अधिकारियों की सहमति से इस पूरे सिस्टम को संरक्षण मिल रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

    जब इस मामले में विकासखंड स्तर के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। वहीं, जिला स्तरीय डीसी मनरेगा से बात करने का प्रयास भी असफल रहा। अधिकारियों की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और आरोपों को और मजबूती देती है।

    मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह का भ्रष्टाचार न केवल सरकार की मंशा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के हक पर भी डाका डालता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

  • सीतापुर: ग्राम पंचायत विशुनपुर में अंत्येष्टि स्थल निर्माण में बड़ा घोटाला, जांच हुई तो प्रधान पर जा सकती है जेल

    सीतापुर: ग्राम पंचायत विशुनपुर में अंत्येष्टि स्थल निर्माण में बड़ा घोटाला, जांच हुई तो प्रधान पर जा सकती है जेल

    सीतापुर जिले के हरगांव विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत विशुनपुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने ग्राम पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। यहां शासन द्वारा स्वीकृत अंत्येष्टि स्थल (श्मशान घाट) निर्माण में कथित तौर पर भारी अनियमितताएं और धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

    सीतापुर: हरगांव विकास खंड की ग्राम पंचायत विशुनपुर में अंत्येष्टि स्थल निर्माण में बड़ा घोटाला, जांच हुई तो प्रधान पर जा सकती है जेल
    सीतापुर: हरगांव विकास खंड की ग्राम पंचायत विशुनपुर में अंत्येष्टि स्थल निर्माण में बड़ा घोटाला, जांच हुई तो प्रधान पर जा सकती है जेल

    सरकार की मंशा थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में खुले खेतों और खलिहानों में होने वाले शवदाह से उत्पन्न प्रदूषण और अव्यवस्था को रोका जाए। इसी उद्देश्य से वर्ष 2022-23 में विशुनपुर ग्राम पंचायत में अत्याधुनिक अंत्येष्टि स्थल निर्माण के लिए धन आवंटित किया गया था। योजना के तहत पक्का प्लेटफॉर्म, छत, पानी की व्यवस्था, बैठने की सुविधा और अन्य मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराए जाने थे, ताकि अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंत्येष्टि स्थल का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं हुआ, कई जरूरी कार्य कागजों में पूरे दिखा दिए गए, जबकि मौके पर वे कार्य अधूरे या गायब हैं। निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिससे कुछ ही समय में ढांचा जर्जर हालत में पहुंच गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन का बड़ा हिस्सा बंदरबाट कर लिया गया।

    स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि अंत्येष्टि स्थल के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। न तो पर्याप्त छत है, न पानी की समुचित व्यवस्था और न ही बैठने का इंतजाम। इससे अंतिम संस्कार के समय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

    मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने जांच की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन या संबंधित विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो घोटाले की पूरी परतें खुलकर सामने आ जाएंगी। सूत्रों की मानें तो जांच में दोष सिद्ध होने पर ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर, रिकवरी और जेल तक की कार्रवाई संभव है।

    फिलहाल यह मामला पूरे हरगांव ब्लॉक में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है और क्या सच में अंत्येष्टि स्थल निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है