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  • वक्फ बाय यूजर: सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला, रोक और बरकरार निर्णय

    वक्फ बाय यूजर: सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला, रोक और बरकरार निर्णय

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ‘वक्फ बाय यूजर’ से जुड़े मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किन फैसलों पर रोक लगेगी और कौन से फैसले बरकरार रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि वक्फ संपत्तियों के उपयोग में नियमों का पालन होना अनिवार्य है और जो फैसले कानून के अनुरूप हैं, उन्हें लागू किया जा सकता है। वहीं, जो निर्णय विवादास्पद या नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उपयोग पर नए नियम लागू होंगे। न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमों का पूरी तरह पालन करें और किसी भी अवैध या विवादास्पद निर्णय को लागू न करें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला वक्फ संपत्तियों के न्यायसंगत उपयोग और विवादों को रोकने की दिशा में अहम साबित होगा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी संपत्ति के उपयोग में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे।

    फैसले से वक्फ समुदाय में स्पष्टता आई है कि कौन से फैसले मान्य हैं और किस पर रोक लगी है। इससे भविष्य में संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।

    अप्रैल में बना था कानून

    वक्फ (संशोधन) बिल 2025 को बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में पास किया गया था। लोकसभा में 288 और राज्यसभा में 232 सांसदों ने इस बिल पर मुहर लगाई थी। इसके बाद 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने भी इस कानून को मंजूरी दे दी थी।इस कानून को रद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने कानून रद करने से साफ इनकार करते हुए कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई है।

  • Supreme Court on Stray Dog: NCR में आवारा कुत्तों पर बहस, फैसला रखा गया सुरक्षित

    Supreme Court on Stray Dog: NCR में आवारा कुत्तों पर बहस, फैसला रखा गया सुरक्षित

    नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर के आवारा कुत्तों के मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने 11 अगस्त को इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को दिल्ली-एनसीआर के आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने आठ हफ्तों के अंदर शेल्टर होम बनाने और इसकी जानकारी देने को भी कहा था। बाद में इस आदेश पर विवाद बढ़ गया जिसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भूषण आर. गवई ने इस मामले को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच से हटा दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली नई बेंच ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता क्या बोले? Supreme Court on Stray Dog

    लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्होंने लोगों को मीट खाते हुए और फिर खुद को पशु प्रेमी बताते हुए देखा है। डॉग लवर्स अल्प संख्या में हैं और बाकी लोग मेजोरिटी में हैं। प्रति दिन 10 हजार लोगों को कुत्ते काटते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कुत्तों के काटने के बाद रेबीज से बच्चों की मौत के कई मामले सामने आए हैं। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘नसबंदी से रेबीज नहीं रुकता। अगर कुत्तों का टीकाकरण भी हो जाए, तो भी वे बच्चों को घायल करने से नहीं रुकेंगे।’ उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हर साल 37 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं होती हैं, यानी औसतन हर दिन लगभग 10,000 कुत्ते काटते हैं। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 20,000 रेबीज से मौतें होती हैं।

    सॉलिसिटर जनरल और कपिल सिब्बल जोरदार Supreme Court on Stray Dog

    प्रोजेक्ट काइंडनेस नामक संस्था की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर है और इस मामले पर गहराई से बहस करने की जरूरत है। सिब्बल ने 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए कुछ निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की। कपिल सिब्बल ने कहा कि इससे इंसान और कुत्तों के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है और यह तर्कहीन है। वहीं पशु संगठन PETA इंडिया का कहना है कि दिल्ली के आवारा कुत्तों को जबरन हटाने से जानवरों और निवासियों दोनों के लिए अराजकता और पीड़ा पैदा होगी।