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  • नैनीताल की हवा में घुला ज़हर: पहाड़ों तक पहुंचा मैदानी इलाकों का प्रदूषण, PM 2.5 स्तर ने बढ़ाई चिंता

    नैनीताल की हवा में घुला ज़हर: पहाड़ों तक पहुंचा मैदानी इलाकों का प्रदूषण, PM 2.5 स्तर ने बढ़ाई चिंता

    नैनीताल। स्वच्छ हवा और शांत पहाड़ी माहौल के लिए पहचाने जाने वाला नैनीताल अब वायु प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहा है। एक समय ‘हेल्दी एयर ज़ोन’ माने जाने वाले इस पहाड़ी शहर की फिजाओं में अब धुंध, धुआं और PM 2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण तेजी से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि सुबह-शाम शहर के कई हिस्सों में हल्की स्मॉग की परत देखी जा सकती है, जो जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के बढ़ते खतरे का संकेत है।

    मैदानी इलाकों का प्रदूषण पहाड़ों तक पहुंचा

    विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी दिल्ली, यूपी, दिल्ली-NCR, हल्द्वानी और बरेली के औद्योगिक इलाकों में बढ़ते प्रदूषण ने पहाड़ों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में हवाओं की दिशा बदलने से ये प्रदूषक कण लंबे सफर के बाद नैनीताल तक पहुंचकर वातावरण में घुल रहे हैं।PM 2.5 कणों का आकार 2.5 माइक्रोन से भी छोटा होता है और इन्हें फेफड़ों में गहराई तक जाने की क्षमता होती है, जिससे सांस और हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

    एरीज रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल

    नैनीताल स्थित एरीज (ARIES) की हालिया रिपोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को साफ कर दिया है। रिपोर्ट में शहर का PM 2.5 स्तर 50–60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया है, जबकि गर्मियों में तेज हवाओं और जंगलों की आग के दौरान यह स्तर 250–300 माइक्रोग्राम तक पहुंच जाता है।यह आंकड़ा WHO की सुरक्षित सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से कई गुना अधिक है।मौसम विशेषज्ञ रमेश चंद्रा बताते हैं कि अब नैनीताल सिर्फ स्थानीय प्रदूषण के कारण नहीं, बल्कि मैदानी क्षेत्रों से ट्रांसपोर्ट होकर आने वाले धुएं की वजह से भी प्रभावित हो रहा है।
    उनके मुताबिक, “हवा की दिशा में बदलाव और औद्योगिक कणों की बढ़ोतरी पहाड़ों की हवा को लगातार दूषित कर रही है। यह आने वाले वर्षों के लिए बड़ा खतरा है।”

    नैनीताल में प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहें

    • पर्यटकों की बेतहाशा संख्या और ट्रैफिक का दबाव
    • डीज़ल-पेट्रोल वाहनों की बढ़ती संख्या
    • पहाड़ियों पर अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां
    • जंगलों में बार-बार लगने वाली आग
    • कचरा प्रबंधन में कमी और खुले में जलाया जाने वाला कचरा

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते मजबूत कदम नहीं उठाए गए, तो नैनीताल भी मैदानी इलाकों की तरह ‘रिस्क ज़ोन’ में शामिल हो सकता है।

  • दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण स्तर : AQI 361, कई स्टेशन 400 पार; GRAP-3 और GRAP-4 से बचने की कोशिश तेज

    दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण स्तर : AQI 361, कई स्टेशन 400 पार; GRAP-3 और GRAP-4 से बचने की कोशिश तेज

    दिल्ली में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। शनिवार और रविवार को एयर क्वालिटी लगातार खराब श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का कुल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रविवार को 361 पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, दिल्ली के नौ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 के पार दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ स्तर का संकेत है।

    बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन, खांसी, सिरदर्द और सांस लेने में दिक्कत जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो हवा में धूल, धुआं और नमी बढ़ने से हालात और बिगड़ सकते हैं।सरकार और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां इस बार GRAP-3 और GRAP-4 जैसे कड़े प्रतिबंध लागू करने से बचने की पूरी कोशिश कर रही हैं। इसके लिए एजेंसियों को धूल फैलाने वाली गतिविधियों, प्रदूषणकारी गाड़ियों और कूड़ा जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    एमसीडी को भी कूड़ा और निर्माण मलबा उठाने की प्रक्रिया तेज करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि सड़कों पर जमा धूल और कचरा प्रदूषण को और न बढ़ाए।प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों का कहना है कि यदि प्रदूषण का स्तर आगे और बढ़ा तो सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल अधिकारी स्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।