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  • औरैया फीस के अभाव में स्कूल नहीं जा रही थी छात्रा, प्रिंसिपल ने खुद पहुंचकर दिया भरोसा

    औरैया फीस के अभाव में स्कूल नहीं जा रही थी छात्रा, प्रिंसिपल ने खुद पहुंचकर दिया भरोसा

    औरैया।उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से शिक्षा और संवेदनशीलता से जुड़ी एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। यहां एक छात्रा कई दिनों से स्कूल नहीं आ रही थी। जब इस बात की जानकारी स्कूल प्रबंधन को हुई, तो स्कूल के प्रिंसिपल ने एक जिम्मेदार शिक्षक की भूमिका निभाते हुए खुद छात्रा के घर जाकर उससे मुलाकात की।

    मुलाकात के दौरान छात्रा ने जो कारण बताया, वह चौंकाने वाला था। उसने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह स्कूल की फीस नहीं भर पा रही थी, इसी वजह से उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। छात्रा की बात सुनते ही प्रिंसिपल ने बेहद संवेदनशील अंदाज में पूछा “तुमसे फीस किसने मांगी है?”

    प्रिंसिपल का यह जवाब सुनकर छात्रा भावुक हो गई। यह छोटा सा संवाद अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे शिक्षा के क्षेत्र में इंसानियत और जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

    प्रिंसिपल ने छात्रा को भरोसा दिलाया कि उसकी पढ़ाई फीस के अभाव में नहीं रुकेगी। उन्होंने छात्रा और उसके परिवार को समझाया कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और किसी भी हाल में आर्थिक तंगी उसकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी। इसके बाद छात्रा को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित किया गया।

    इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में फीस और आर्थिक असमानता के मुद्दे को उजागर कर दिया है। कई परिवार आज भी आर्थिक कारणों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाता है। ऐसे में औरैया के इस स्कूल प्रिंसिपल का कदम शिक्षा जगत के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है।

    सोशल मीडिया पर लोग इस प्रिंसिपल की जमकर सराहना कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि अगर हर शिक्षक और स्कूल प्रबंधन इसी तरह संवेदनशीलता दिखाए, तो कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा। कई लोगों ने इसे “सच्चे गुरु” की पहचान बताया है।

    यह मामला केवल एक छात्रा की स्कूल वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या फीस किसी बच्चे की शिक्षा से बड़ी हो सकती है? औरैया की यह घटना साबित करती है कि जब इंसानियत और जिम्मेदारी साथ चलें, तो शिक्षा सचमुच समाज को बदल सकती है।