अयोध्या। राम नगरी अयोध्या की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। 8 जनवरी से शहर में पूरी तरह से नॉनवेज की बिक्री पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि होटल, ढाबा और होम-स्टे सहित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर यह नियम लागू होगा। किसी भी स्थान पर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ऑनलाइन डिलीवरी पर भी रोक
शहर में नॉनवेज खाने की ऑनलाइन डिलीवरी पर भी रोक लगा दी गई है। इसका मतलब है कि अब अयोध्या में कोई भी व्यक्ति नॉनवेज भोजन ऑर्डर या खरीद नहीं सकता।
प्रशासन का उद्देश्य
अयोध्या प्रशासन का कहना है कि यह कदम धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों ने सभी व्यवसायियों और नागरिकों से नियमों का पालन करने की अपील की है।
अयोध्या में कड़ाके की सर्दी शुरू होते ही श्रीराम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला की विशेष शीतकालीन सेवा शुरू कर दी गई है। मंदिर प्रशासन बाल स्वरूप भगवान की तरह उनकी देखरेख कर रहा है, ताकि ठंड का कोई असर उन पर न पड़े। तापमान गिरते ही रामलला के लिए पूजा-अर्चना के साथ उनकी दैनिक दिनचर्या में भी कई बदलाव किए गए हैं।
अंगीठी के सामने बैठाकर दी जा रही गर्माहट
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि रामलला के गर्भगृह में हल्की अंगीठी जलाई जाती है, जिससे आसपास का तापमान संतुलित बना रहे और सर्द हवा का प्रभाव कम हो। यह व्यवस्था खासकर सुबह और रात के समय की जाती है। ठंडी हवाओं में बालक स्वरूप रामलला को ठंड न लगे, इसलिए यह परंपरा हर वर्ष कड़ाके की ठंड में निभाई जाती है।
गुनगुने पानी से स्नान और मखमली वस्त्रों से सजावट
सर्दियों में रामलला को गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता है। पुजारी बताते हैं कि बालक रूप होने के कारण उनके स्वास्थ्य की विशेष देखभाल आवश्यक है। स्नान के बाद उन्हें मखमल, ऊनी पोशाक और गरम अलंकरण पहनाए जाते हैं ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।रामलला की रात्रि वेशभूषा भी सर्दी के मौसम के अनुरूप बदल दी गई है। मुलायम ऊनी शाल, गर्म टोपी और मखमली बिस्तर उनकी आराम व्यवस्था का हिस्सा हैं।
तिल के लड्डू और गर्माहट देने वाला प्रसाद
सर्दियों में ऊर्जा और ऊष्मा प्रदान करने के लिए रामलला को विशेष रूप से तिल के लड्डू, गुड़, मूंगफली और देसी घी से बने प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। तिल और गुड़ सर्दी में शरीर को गर्म रखने के पारंपरिक उपाय हैं, इसलिए इन्हें भगवान के भोग में शामिल किया जाता है।
नींद का समय 30 मिनट बढ़ाया गया
मंदिर प्रशासन के अनुसार ठंड बढ़ने के बाद रामलला को प्रतिदिन न्यूनतम 30 मिनट अतिरिक्त विश्राम कराया जा रहा है। ठंड में शरीर को अधिक आराम की आवश्यकता होती है—इसी कारण उनकी दिनचर्या में बदलावा किया गया है। जागर कार्यक्रमों और पूजा-पाठ में भी पुजारियों ने भगवान के आराम के समय का विशेष ध्यान रखने की व्यवस्था की है।
सर्दियों में विशेष देखरेख की ऐतिहासिक परंपरा
पुजारियों का कहना है कि सर्दियों में भगवान को ठंड से बचाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। बालक रूप में भगवान की सेवा-विधि उनके आराम, भोजन, वस्त्र और तापमान के अनुरूप तय की जाती है। अयोध्या में मौजूदा ठंड के दौर में रामलला की यह सेवा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र भी बनी हुई है।
अयोध्या धाम, । श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज आरोहण समारोह एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का ध्वजारोहण केवल यज्ञ की पूर्णाहूति नहीं, बल्कि एक नए युग का शुभारंभ है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत सियावर रामचंद्र भगवान, माता जानकी, सरयू मैया, भारत माता की जय और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ की, जिससे पूरा मंदिर परिसर गूँज उठा।
सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण 140 करोड़ भारतीयों की आस्था, सम्मान और आत्मगौरव का प्रतीक है। मंदिर के शिखर पर फहराता केसरिया ध्वज धर्म, मर्यादा, सत्य, न्याय और राष्ट्रधर्म की उस अनंत परंपरा का प्रतीक है, जिसने सदियों से इस राष्ट्र को मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री ने इस दिव्य अवसर पर उन संतों, रामभक्तों, आंदोलनकारियों और कर्मयोगियों का अभिनंदन किया, जिन्होंने श्रीराम मंदिर आंदोलन में अपना जीवन समर्पित किया।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। सीएम योगी और सभी सम्मानित अतिथियों ने झुककर भगवा ध्वज को प्रणाम अर्पित किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और सरसंघचालक जी को स्मृति चिह्न भी प्रदान किया।
सीएम योगी ने कहा कि धर्म का प्रकाश अमर है और रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व संभालने के साथ ही भारतवासियों के मन में नए संकल्प और विश्वास का उदय हुआ था, जो आज भव्य राम मंदिर के रूप में साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि आज का ध्वजारोहण विकसित भारत के संकल्प का भी प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता। पिछले 11 वर्षों में भारत ने विकास और विरासत का अभूतपूर्व समन्वय देखा है। 80 करोड़ लोगों को राशन, 50 करोड़ लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा, हर जरूरतमंद को आवास—ये सब रामराज्य की उसी अवधारणा के प्रतीक हैं, जिसका आधार न्याय और समानता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या अब उत्सवों की वैश्विक राजधानी बन रही है। संघर्ष और बदहाली के वर्षों के बाद आज अयोध्या धाम नई आस्था, नई ऊर्जा और नई अर्थव्यवस्था का केंद्र बन चुका है। धर्मपथ, रामपथ, भक्ति पथ से लेकर 84 कोसी परिक्रमा तक—अयोध्या हर दिशा में दिव्य और भव्य परिवर्तन का अनुभव करा रही है।
कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी गोविंद देव गिरी सहित अनेक संत-महंत शामिल रहे। समारोह का संचालन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने किया।
Ram Mandir Live – अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आज वह क्षण आया, जिसका इंतजार करोड़ों श्रद्धालुओं ने वर्षों तक किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज का ध्वजारोहण किया। पुरोहितों के मंत्रोच्चार, वैदिक विधि और दिव्य वातावरण के बीच जब केसरिया ध्वज मंदिर की ऊंचाई पर लहराया, तो अयोध्या का आसमान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
यह समारोह राम मंदिर निर्माण के ऐतिहासिक चरण का प्रतीक है। ध्वजारोहण के समय PM मोदी ने मंदिर परिसर का भ्रमण भी किया और रामलला के दर्शन किए। पूरा कार्यक्रम सुरक्षा, अनुशासन और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ।
भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब भव्य राम मंदिर के शिखर पर परंपरागत धर्म ध्वज को प्रधानमंत्री की उपस्थिति में फहराया गया। यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत उत्सव भी है।वीडियो में देखें—धर्म ध्वज फहरने का दिव्य दृश्य, लोगों की भावनाएं, और अयोध्या का अद्भुत माहौल।