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  • अमेठी में बांग्लादेश विरोध: VHP-बजरंग दल का प्रदर्शन, PM का पुतला दहन

    अमेठी में बांग्लादेश विरोध: VHP-बजरंग दल का प्रदर्शन, PM का पुतला दहन

    अमेठी में बांग्लादेश विरोध प्रदर्शन को लेकर शनिवार को माहौल गरमा गया। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कस्बे में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर नारेबाजी की और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया।प्रदर्शन की शुरुआत सब्जी मंडी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से हुई, जहां बड़ी संख्या में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता एकत्र हुए। जुलूस के दौरान “भारत माता की जय”, “जय श्रीराम” और “बांग्लादेश मुर्दाबाद” के नारों से पूरा कस्बा गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के साथ हो रहे कथित अत्याचारों पर गहरा आक्रोश जताया।

    जुलूस कस्बे के प्रमुख मार्गों से होता हुआ आगे बढ़ा, जहां आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के पुतले को पहले चप्पलों से पीटा और बाद में आग लगाकर पुतला दहन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की निंदा की और दोषियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की मांग की।

    प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद की जिला अध्यक्ष सरिता सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    सरिता सिंह ने भारत सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल पीड़ित हिंदुओं के समर्थन में हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे।

    प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की सतर्कता के चलते स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

  • Unnao Rape Case: सजा सस्पेंड का मतलब क्या? कोर्ट की शर्तें समझें

    Unnao Rape Case: सजा सस्पेंड का मतलब क्या? कोर्ट की शर्तें समझें

    Unnao Rape Case : उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी सजा को सस्पेंड करते हुए जमानत मंजूर कर दी है। हालांकि, यह राहत सीमित है और इससे कुलदीप सेंगर की तत्काल रिहाई संभव नहीं हो पाई है।

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    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कुलदीप सेंगर सजा सस्पेंड होने का मतलब क्या है। सजा सस्पेंड का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी दोषमुक्त हो गया है या उसकी सजा खत्म कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक अदालत ने सजा के क्रियान्वयन (Execution of Sentence) को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यानी दोष कायम रहता है, लेकिन सजा पर रोक लग जाती है।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपील के निस्तारण में लगने वाले समय को देखते हुए सजा सस्पेंड की जा सकती है। इसी आधार पर उन्हें जमानत दी गई है, लेकिन कोर्ट ने कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं।

    अदालत की शर्तों के अनुसार, कुलदीप सेंगर को बिना अनुमति देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। वे पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं कर सकेंगे और न ही मामले से जुड़े किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर पाएंगे। इसके अलावा, उन्हें तय समय पर अदालत में पेश होना भी अनिवार्य होगा।

    हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। वजह यह है कि पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसे वे अभी भुगत रहे हैं। इस कारण उनकी रिहाई पर कानूनी रोक बनी हुई है।

    कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल तकनीकी राहत है, न कि दोष से मुक्ति। अंतिम फैसला अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा, जो आने वाले समय में इस केस की दिशा तय करेगा।

  • कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला

    कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला

    कानपुर देहात से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कानपुर देहात मंदिर तोड़ने का प्रयास किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। यह घटना सिकंदरा थाना क्षेत्र के रासधान गांव की बताई जा रही है, जहां एक युवक ने पागलपन का नाटक करते हुए मंदिर में जमकर उत्पात मचाया।स्थानीय लोगों के अनुसार आरोपी युवक अचानक मंदिर परिसर में पहुंचा और मंदिर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगा। जब पुजारी ने उसे रोकने का प्रयास किया तो आरोपी ने पत्थर उठा लिया और पुजारी के पीछे दौड़ पड़ा। किसी तरह पुजारी ने भागकर अपनी जान बचाई। घटना के दौरान मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

    कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला
    कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला

    इतना ही नहीं, आरोपी युवक ने मंदिर में लगे CCTV कैमरे को भी तोड़ दिया, जिससे उसकी हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड होने से बच सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यह युवक पहले भी इसी तरह का उत्पात करता रहा है और इलाके में उसकी गतिविधियों को लेकर लोग पहले से ही दहशत में थे।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए और पुलिस को जानकारी दी। सिकंदरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने पहले किन-किन घटनाओं को अंजाम दिया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ है या फिर जानबूझकर पागलपन का नाटक कर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा था।

    कानपुर देहात मंदिर तोड़ने का प्रयास जैसी घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी पर बवाल, “अब्दुल-अब्दुल्ला” बयान पर राजनीति तेज

    इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी पर बवाल, “अब्दुल-अब्दुल्ला” बयान पर राजनीति तेज

    देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो एक बार फिर विवादों में है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में एक महिला यात्री को इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी करते हुए देखा गया, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में महिला कथित तौर पर कर्मचारी से कहती नजर आती है कि “पूरा देश परेशान है अब्दुल और अब्दुल्ला से”, जिस पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने इसे न सिर्फ कर्मचारी का अपमान बताया, बल्कि समाज में फैलती नफरत और असहिष्णुता का उदाहरण भी करार दिया। लोगों का कहना है कि यात्रियों की शिकायतों को लेकर एयरलाइन कर्मचारियों पर इस तरह की भाषा और व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

    मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस सांसद इमरान ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी ज़हरीली मानसिकता के खिलाफ इंडिगो को खुद आगे आकर अपने कर्मचारी के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एयरलाइन स्टाफ कठिन परिस्थितियों में यात्रियों की सेवा करता है और उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

    इमरान ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान या नाम को लेकर इस तरह की टिप्पणी समाज को बांटने का काम करती है। उन्होंने इंडिगो प्रबंधन से अपेक्षा जताई कि कंपनी अपने कर्मचारियों के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सख्त रुख अपनाएगी।

    इस इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी के मामले ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यात्रियों के अनुचित व्यवहार पर कड़े नियम और त्वरित कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल इंडिगो की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • अमेठी में घने कोहरे से भीषण सड़क हादसा, कई वाहन टकराए, 2 की मौत

    अमेठी में घने कोहरे से भीषण सड़क हादसा, कई वाहन टकराए, 2 की मौत

    संवाददाता नितेश तिवारी अमेठी उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में घने कोहरे ने एक बार फिर जानलेवा रूप दिखाया है। अमेठी सड़क हादसा मंगलवार देर रात उस समय हुआ, जब मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र से गुजरने वाले लखनऊ–वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक के बाद एक कई वाहन आपस में टकरा गए। इस भीषण दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 लोग घायल हो गए।

    जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलम डिग्री कॉलेज के पास ओवरब्रिज से पहले रात करीब दो बजे हुआ। अपर पुलिस अधीक्षक अमेठी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि लखनऊ से सुल्तानपुर की ओर जा रहा एक ट्रक घने कोहरे के कारण डिवाइडर से टकराकर पलट गया। ट्रक के पलटते ही पीछे से आ रही चार अन्य ट्रकें भी आपस में भिड़ गईं।

    इसी दौरान पीछे से आ रही यात्रियों से भरी रोडवेज की जनरथ बस के चालक ने अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाया, लेकिन कोहरे की वजह से दृश्यता बेहद कम थी। बस पलटे हुए ट्रक से टकरा गई। इसके बाद पीछे चल रही एक कार भी बस से जा भिड़ी। कुछ ही पलों में हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और चारों ओर चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

    सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। सभी घायलों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान दो लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। 18 घायलों में से 14 की हालत सामान्य बताई जा रही है, जबकि दो गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।

    मृतकों में एक की पहचान मोहम्मद शमशाद निवासी जायस के रूप में हुई है, जबकि दूसरे मृतक की शिनाख्त की जा रही है। दोनों मृतक ट्रक चालक बताए जा रहे हैं। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कराया और मामले में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • कानपुर में खूंखार कुत्तों को उम्रकैद, दो बार काटने पर ताउम्र कैद का नियम

    कानपुर में खूंखार कुत्तों को उम्रकैद, दो बार काटने पर ताउम्र कैद का नियम

    कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर में कुत्तों के हमले की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब दो बार इंसानों को काटने वाले खूंखार कुत्तों को ताउम्र आजादी नहीं मिलेगी। नए नियम के तहत ऐसे कुत्तों को ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर में आजीवन कैद में रखा जाएगा। यह नियम पूरे यूपी में लागू कर दिया गया है।नगर निगम के अनुसार, अब तक आवारा और हमलावर कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और इलाज के बाद छोड़ दिया जाता था, लेकिन बार-बार हमले की शिकायतों के बाद नीति में बदलाव किया गया है। कानपुर में खूंखार कुत्तों को उम्रकैद देने का यह फैसला प्रदेश में पहली बार इतनी सख्ती के साथ लागू हुआ है।

    ABC सेंटर बना ‘काला पानी’

    नए नियम के अनुसार, यदि कोई कुत्ता पहली बार किसी व्यक्ति को काटता है तो उसे चेतावनी के तौर पर पकड़कर निगरानी में रखा जाएगा। लेकिन दूसरी बार हमला करने पर उस कुत्ते को सीधे ABC सेंटर भेजा जाएगा, जहां उसे जीवनभर के लिए रखा जाएगा। इस सेंटर को अब हमलावर कुत्तों के लिए ‘काला पानी’ कहा जा रहा है।

    कानपुर में 5 कुत्तों को उम्रकैद

    नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, कानपुर में अब तक 5 खूंखार कुत्तों को आजीवन कारावास की सजा दी जा चुकी है। इन कुत्तों पर अलग-अलग इलाकों में दो से अधिक बार लोगों को काटने के आरोप साबित हुए थे। इसके बाद नियमों के तहत इन्हें खुले में छोड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।

    प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य कुत्तों को सजा देना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि किसी भी डॉग बाइट की घटना की तुरंत नगर निगम या प्रशासन को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • Kanpur Dehat Weather: 7°C न्यूनतम तापमान, शीतलहर व कोहरे का अलर्ट

    Kanpur Dehat Weather: 7°C न्यूनतम तापमान, शीतलहर व कोहरे का अलर्ट

    Kanpur Dehat Weather एक बार फिर सुर्खियों में है। जिले में कड़ाके की ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। न्यूनतम तापमान गिरकर 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे ठिठुरन और ठंड का असर साफ नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने शीतलहर और घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।बीते कुछ दिनों से कानपुर देहात में सुबह और देर रात कोहरा छाया रहता है। कई इलाकों में दृश्यता काफी कम हो गई है, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है। वाहन चालकों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    ठंड से जनजीवन प्रभावित

    Kanpur Dehat Weather के इस बदले मिजाज का असर आम जनजीवन पर भी दिख रहा है। ग्रामीण इलाकों में लोग अलाव जलाकर ठंड से बचाव कर रहे हैं। सुबह के समय स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठंडी हवाओं के कारण लोग घरों से निकलने में हिचकिचा रहे हैं।

    कोहरे ने बढ़ाई मुश्किल

    सुबह और रात के समय घना कोहरा छाए रहने से नेशनल हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं। कई जगहों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई है। प्रशासन ने वाहन चालकों को फॉग लाइट का प्रयोग करने और धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी है।

    मौसम विभाग की चेतावनी

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 24 से 48 घंटे तक Kanpur Dehat Weather में ज्यादा सुधार की संभावना नहीं है। शीतलहर का असर जारी रह सकता है और तापमान में और गिरावट हो सकती है। प्रशासन ने बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की अपील की है।

  • AhirRegiment : “120 बहादुर” से उठे राजनीतिक सवाल: अहीर रेजिमेंट और यूपी की बदलती सियासत

    AhirRegiment : “120 बहादुर” से उठे राजनीतिक सवाल: अहीर रेजिमेंट और यूपी की बदलती सियासत

    AhirRegiment : भारतीय सेना की बहादुरी पर आधारित फिल्म ‘120 बहादुर’ न सिर्फ देशभक्ति का संदेश दे रही है, बल्कि इसके साथ अहीर रेजिमेंट की लंबे समय से चल रही मांग को भी फिर एक बार चर्चा के केंद्र में ले आई है। फिल्म के रिलीज होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है, खासकर वहां जहाँ यादव समुदाय की बड़ी आबादी है।

    अहीर रेजिमेंट की मांग ने पकड़ी रफ्तार

    अहीर यानी यादव समुदाय का भारतीय सेना में योगदान इतिहास से दर्ज है, चाहे 1962 का रेजांग ला युद्ध हो या बाद के कई मोर्चे। लंबे समय से यादव समुदाय एक अलग “अहीर रेजिमेंट” की मांग करता रहा है।’120 बहादुर’ में दिखे साहस और शौर्य के दृश्यों ने इस मांग को नए सिरे से धार दी है।यूपी में बलिया, गोरखपुर, अयोध्या, जौनपुर, इटावा, मैनपुरी और कन्नौज जैसे जिलों में इस मुद्दे पर लगातार सभाएं, पोस्टर कैंपेन और सोशल मीडिया अभियान तेजी से बढ़े हैं।

    सियासी दलों की सक्रियता बढ़ी

    यूपी की राजनीति में यादव समुदाय का बड़ा प्रभाव रहा है। ऐसे में फिल्म के बाद अहीर रेजिमेंट की मांग पर सियासी दलों की नजरें टिक चुकी हैं।

    • सपा (समाजवादी पार्टी) इस मुद्दे को सक्रिय रूप से उठाती रही है और फिल्म के बाद इसे यादव वोटबैंक को जोड़ने का बड़ा अवसर मान रही है।
    • भाजपा भी इस पर बैलेंस बनाते हुए “सेना की नीति और संरचना राजनीतिक आधार पर नहीं बदलती” जैसे बयान दे रही है, लेकिन जमीन पर उसके स्थानीय नेता इस विषय पर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं।
    • कांग्रेस और क्षेत्रीय दल भी इसे “सामाजिक प्रतिनिधित्व” के नजरिए से देख रहे हैं।

    फिल्म से बदला माहौल, बढ़ रही बहस

    ‘120 बहादुर’ की सफलता के बाद सोशल मीडिया पर #AhirRegimentNow और #120Bahadur जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।
    वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी नई रेजिमेंट सेना की रणनीतिक आवश्यकता और ऐतिहासिक आधार पर बनती है, राजनीतिक मांगों पर नहीं।

    लेकिन राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में बड़ा मोड़ बन सकता है।

    अहीर समुदाय का साफ संदेश

    अहीर युवाओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मांग सिर्फ पहचान का सवाल नहीं, बल्कि सेना में योगदान के सम्मान की बात है।
    वे मानते हैं कि ‘120 बहादुर’ ने देशभर के युवाओं के मन में “अहीरों की ऐतिहासिक बहादुरी” का भाव फिर से जगा दिया है।

  • कांग्रेस नेता श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन: 81 वर्ष की उम्र में कानपुर में ली अंतिम सांस, मेयर से कोयला मंत्री तक रहा शानदार सफर

    कांग्रेस नेता श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन: 81 वर्ष की उम्र में कानपुर में ली अंतिम सांस, मेयर से कोयला मंत्री तक रहा शानदार सफर

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कानपुर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे जायसवाल के निधन से कांग्रेस पार्टी और कानपुर की राजनीति में गहरा शोक छा गया है।

    श्रीप्रकाश जायसवाल को कानपुर की राजनीति का करिश्माई चेहरा माना जाता था। उनका राजनीतिक सफर नगर निगम से शुरू होकर देश की संसद और फिर केंद्र सरकार तक पहुंचा। उन्होंने कानपुर के मेयर के रूप में अपनी पहचान मजबूत की और इसके बाद लगातार तीन बार कानपुर से सांसद चुने गए।

    केंद्रीय राजनीति में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी तब मिली जब वे मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री बने। इस दौरान उन्होंने ऊर्जा और खनन क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णयों में भूमिका निभाई।
    कानपुर में उनके विकास कार्यों, धरातल से जुड़े नेतृत्व और सरल स्वभाव के कारण वे सभी दलों के नेताओं में सम्मानित थे।

    निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस नेताओं ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। कई स्थानीय नागरिकों ने बताया कि जायसवाल हमेशा जनता के बीच रहकर समस्याओं को सुनते और समाधान करवाते थे।

    शहर के राजनीतिक इतिहास में उनका नाम एक मजबूत व प्रभावशाली नेता के रूप में याद किया जाएगा। परिवार और पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार कानपुर में ही किया जाएगा।

  • कानपुर देहात में जिला विकास समन्वय समिति की बैठक में हंगामा, सांसद और पूर्व सांसद में तीखी झड़प

    कानपुर देहात में जिला विकास समन्वय समिति की बैठक में हंगामा, सांसद और पूर्व सांसद में तीखी झड़प

    कानपुर देहात। जिला विकास समन्वय समिति की बैठक के दौरान रविवार को बड़ा हंगामा खड़ा हो गया, जब मौजूदा सांसद देवेंद्र सिंह भोले और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।बैठक में मौजूद अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी, तभी दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी शुरू हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस अधीक्षक और अपर पुलिस अधीक्षक को मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिकारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया।

    हंगामे के दौरान समिति के कई सदस्य और अफसरों ने दोनों नेताओं को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन विवाद बढ़ता गया। हालांकि बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप से बैठक को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराया गया।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं के बीच यह विवाद पुराने राजनीतिक मतभेदों को लेकर है, जो अब सार्वजनिक मंच पर फूट पड़ा। इस घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का माहौल है।जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और बैठक के बाद सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपने-अपने कार्यों में लौट गए हैं।