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  • ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय सियासत तेज होती नजर आ रही है। ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर “ठाकुरवादी सोच” को बढ़ावा देने और एक जाति विशेष को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि अब इस कथित जातिवादी रवैये के खिलाफ ब्राह्मण समाज भी खुलकर सामने आ गया है।

    समाजवादी पार्टी का कहना है कि अब तक दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय इस राजनीति के शिकार होते रहे हैं, लेकिन अब ब्राह्मण समाज की नाराजगी भाजपा के लिए नई चुनौती बन गई है। सपा नेताओं ने दावा किया कि ब्राह्मण समाज की यह नाराजगी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता से विदाई का कारण बनेगी।

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। सत्र के तीसरे दिन मंगलवार शाम कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर यह बैठक आयोजित हुई। इस बैठक को ‘सहभोज’ का नाम दिया गया था।

    इस सहभोज में पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। बैठक के बाद सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। विपक्ष ने इसे भाजपा के भीतर जातिगत संतुलन साधने की कवायद बताया है।

    सपा नेताओं का आरोप है कि भाजपा अब अंदरूनी असंतोष को दबाने के लिए इस तरह की बैठकें कर रही है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों से नाराज ब्राह्मण समाज अब सवाल उठाने लगा है और यही कारण है कि इस बैठक ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।

    हालांकि भाजपा की ओर से इस बैठक को सामान्य सामाजिक आयोजन बताया जा रहा है, लेकिन ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • कानपुर में कार सवारों का कहर: 2 दरोगा और होमगार्ड को रौंदा, आरोपी फरार

    कानपुर में कार सवारों का कहर: 2 दरोगा और होमगार्ड को रौंदा, आरोपी फरार

    कानपुर में कार सवारों ने दरोगा को रौंदा जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। चेकिंग के दौरान कार सवार आरोपियों ने पुलिस टीम पर वाहन चढ़ा दिया, जिसमें दो दरोगा और एक होमगार्ड गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद आरोपी तीन बैरियर तोड़ते हुए मौके से फरार हो गए।जानकारी के अनुसार, घटना कानपुर में उस समय हुई जब पुलिस और होमगार्ड की टीम नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध कार को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन कार सवारों ने रुकने के बजाय अचानक तेज रफ्तार में वाहन दौड़ा दिया और पुलिसकर्मियों को कुचलते हुए निकल गए।

    हमले में एक दरोगा कार की टक्कर से करीब 10 फीट दूर जा गिरा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। वहीं, दूसरे दरोगा और होमगार्ड को भी चोटें लगी हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को संभालने में मदद की।कानपुर में कार सवारों ने दरोगा को रौंदा की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी घायल खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, लेकिन एक दरोगा की हालत गंभीर बनी हुई है।

    घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी कार सवारों ने भागने के दौरान तीन पुलिस बैरियर भी तोड़ दिए। पुलिस ने इलाके में नाकेबंदी कर दी है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह हमला सरकारी ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों पर किया गया है, जिसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।फिलहाल पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं और जल्द ही गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है। घटना के बाद से पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है।

  • एक ही लिफ्ट में दिखे केशव मौर्य और शिवपाल यादव, विधानसभा में सियासी चर्चा तेज

    एक ही लिफ्ट में दिखे केशव मौर्य और शिवपाल यादव, विधानसभा में सियासी चर्चा तेज

    केशव मौर्य और शिवपाल यादव एक लिफ्ट में नजर आने का मामला विधानसभा परिसर में चर्चा का विषय बन गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान उस समय सभी की नजरें ठहर गईं, जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव एक ही लिफ्ट से एकसाथ जाते हुए दिखाई दिए।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना विधानसभा भवन के भीतर की है। जैसे ही दोनों नेता लिफ्ट के पास पहुंचे, वहां मौजूद कुछ अन्य लोग भी लिफ्ट में चढ़ने लगे। इसी दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने हल्के-फुल्के अंदाज में वहां मौजूद लोगों से कहा, “तुम लोग बाहर आओ, मुझे शिवपाल जी के साथ जाने दो।” उनका यह बयान सुनते ही आसपास मौजूद लोग मुस्कुरा उठे और माहौल कुछ पल के लिए अनौपचारिक हो गया।

    केशव मौर्य और शिवपाल यादव एक लिफ्ट में दिखने का यह दृश्य देखते ही देखते राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। भाजपा और समाजवादी पार्टी के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को आमतौर पर अलग-अलग राजनीतिक खेमों में देखा जाता है, ऐसे में उनका इस तरह एकसाथ नजर आना कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।

    हालांकि, इस मुलाकात को लेकर किसी भी तरह की औपचारिक राजनीतिक बातचीत या संदेश की पुष्टि नहीं हुई है। इसे विधानसभा की सामान्य कार्यवाही के दौरान हुई एक सामान्य घटना बताया जा रहा है। फिर भी, नेताओं के बीच हुए इस संवाद और दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा सत्र के दौरान इस तरह के दृश्य अक्सर देखने को मिल जाते हैं, जहां अलग-अलग दलों के नेता औपचारिकता से इतर आपसी संवाद करते नजर आते हैं। लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस तरह की घटनाएं स्वतः ही सुर्खियों में आ जाती हैं।

    फिलहाल, दोनों नेताओं की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इतना तय है कि विधानसभा परिसर में हुआ यह छोटा सा दृश्य दिनभर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना रहा।

  • महोबा में VHP का प्रदर्शन, बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या के विरोध में पुतला दहन

    महोबा में VHP का प्रदर्शन, बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या के विरोध में पुतला दहन

    REPORT- चन्द्रशेखर नामदेव महोबा में VHP का प्रदर्शन उस समय देखने को मिला जब बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या के विरोध में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। विश्व हिन्दू परिषद के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने पैदल मार्च निकालते हुए बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    यह प्रदर्शन महोबा शहर के नरसिंह कुटी मंदिर परिसर से शुरू होकर आल्हा चौक तक निकाला गया। पैदल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “बांग्लादेश मुर्दाबाद” और “आतंकवाद मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए अपना रोष जताया। आल्हा चौक पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया।

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीते 18 दिसंबर को बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक युवक दीपू चंद्र दास की कट्टरपंथियों द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि युवक को पहले भीड़ ने पीटा, फिर उसके शव को पेड़ से लटकाया गया और बाद में आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के बाद से देश के अलग-अलग हिस्सों में बांग्लादेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

    महोबा में VHP का प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा बताया जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि बांग्लादेश में लगातार हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन वहां की सरकार इस पर प्रभावी कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर बांग्लादेश पर दबाव बनाने की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में धार्मिक हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे अत्याचार रुकने वाले नहीं हैं।

    इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से लोगों ने यह संदेश दिया कि देशभर में बांग्लादेश में हो रहे अल्पसंख्यक उत्पीड़न को लेकर गहरा आक्रोश है और हिंदू समाज इसके खिलाफ एकजुट है।

  • कानपुर के BSF जवान विनोद कुमार पाल का निधन, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

    कानपुर के BSF जवान विनोद कुमार पाल का निधन, सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

    कानपुर के BSF जवान का निधन पूरे क्षेत्र के लिए बेहद भावुक कर देने वाली खबर बन गया। अमृतसर में तैनात BSF के हवलदार विनोद कुमार पाल (52) की ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई। बुधवार सुबह जब उनका पार्थिव शरीर कानपुर स्थित उनके घर पहुंचा तो पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी, बेटी और बेटे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

    हवलदार विनोद कुमार पाल मूल रूप से कानपुर के अरौल थाना क्षेत्र के बहरामपुर गांव के रहने वाले थे। वर्तमान में उनका परिवार कल्याणपुर क्षेत्र के मिर्जापुर में रह रहा था। अमृतसर में पोस्टमॉर्टम के बाद बुधवार सुबह सबसे पहले पार्थिव शरीर कल्याणपुर लाया गया, जहां से सेना के वाहन द्वारा गांव बहरामपुर ले जाया गया।

    तिरंगे में लिपटे जवान के शव को देखते ही गांव में मातम पसर गया। अंतिम यात्रा में 500 से अधिक युवा तिरंगा लेकर शामिल हुए। “भारत माता की जय” और “वीर जवान अमर रहें” के गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के लोग अंतिम विदाई में शामिल हुए।

    कानपुर के BSF जवान का निधन रविवार देर रात करीब एक बजे ड्यूटी के दौरान हुआ। अचानक तबीयत बिगड़ने पर साथी जवान उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। BSF मुख्यालय की ओर से देर रात उनके घर फोन कर इस दुखद खबर की जानकारी दी गई। खबर सुनते ही पत्नी बेसुध होकर गिर पड़ीं।

    गंगा घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान BSF जवानों ने सलामी दी और राष्ट्रगान के साथ वीर सपूत को अंतिम विदाई दी गई।

    परिवार ने सरकार से दोनों बच्चों को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी देने, गांव में शहीद स्मारक बनाए जाने और शहीद विनोद कुमार पाल के नाम से सड़क निर्माण की मांग की है।

  • अमेठी में युवक की धारदार हथियार से निर्मम हत्या, 6 नामजद पर FIR

    अमेठी में युवक की धारदार हथियार से निर्मम हत्या, 6 नामजद पर FIR

    उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में मंगलवार देर रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जहां धारदार हथियार से हमला कर एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और परिजनों में गहरा आक्रोश है। यह मामला अमेठी युवक हत्या के रूप में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।

    पुलिस के अनुसार, मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र के पिंडारा ठाकुर गांव निवासी रत्नेश मिश्र (20 वर्ष) पुत्र संतोष मिश्रा मंगलवार शाम घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान गांव के ही आधा दर्जन से अधिक लोगों ने उन पर धारदार हथियार से अचानक हमला कर दिया। हमले में युवक को गंभीर चोटें आईं और आरोपी मौके से फरार हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही परिजन घायल युवक को तत्काल सीएचसी मुसाफिरखाना लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि, जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही रत्नेश मिश्र ने दम तोड़ दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और गांव में तनाव का माहौल बन गया।

    प्रारंभिक जांच में हत्या की वजह पुरानी रंजिश बताई जा रही है। परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने छह नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, लेकिन पुलिस ने दबिश के लिए कई टीमें गठित कर दी हैं।

    पूरे मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि घटना को गंभीरता से लिया गया है। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी कानून की गिरफ्त में होंगे।

    इस घटना ने एक बार फिर जिले में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • विधानसभा में रागिनी सोनकर का सवाल: ‘I Love मोहम्मद’ कहना अपराध क्यों?

    विधानसभा में रागिनी सोनकर का सवाल: ‘I Love मोहम्मद’ कहना अपराध क्यों?

    उत्तर प्रदेश विधानसभा में वंदेमातरम् पर चल रही चर्चा के दौरान उस समय सियासी माहौल गर्म हो गया, जब समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने धार्मिक अभिव्यक्ति को लेकर तीखा सवाल उठाया। रागिनी सोनकर विधानसभा बयान के दौरान उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति “I Love जय श्री कृष्ण”, “I Love जीसस” या “I Love वाहेगुरु” कह सकता है, तो फिर “I Love मोहम्मद” कहने पर बच्चों को गिरफ्तार क्यों किया जा रहा है।

    रागिनी सोनकर ने सदन में सवालिया लहजे में कहा कि क्या यही वंदेमातरम् की भावना है, जिसमें समानता और सम्मान की बात की जाती है। उन्होंने इस मुद्दे को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपने विचार और आस्था प्रकट करने का अधिकार होना चाहिए।

    विधायक ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कुछ मामलों में धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, जिससे समाज में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई न केवल चिंताजनक है, बल्कि भविष्य के लिए भी गलत संदेश देती है।

    रागिनी सोनकर विधानसभा बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए हलचल का माहौल बन गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया, जबकि विपक्ष ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल बताया।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। धार्मिक सहिष्णुता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के दायरे को लेकर यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

    फिलहाल, रागिनी सोनकर के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थक इसे साहसिक सवाल बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे अनावश्यक विवाद करार दे रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।

  • Unnao Rape Case: सजा सस्पेंड का मतलब क्या? कोर्ट की शर्तें समझें

    Unnao Rape Case: सजा सस्पेंड का मतलब क्या? कोर्ट की शर्तें समझें

    Unnao Rape Case : उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी सजा को सस्पेंड करते हुए जमानत मंजूर कर दी है। हालांकि, यह राहत सीमित है और इससे कुलदीप सेंगर की तत्काल रिहाई संभव नहीं हो पाई है।

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    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कुलदीप सेंगर सजा सस्पेंड होने का मतलब क्या है। सजा सस्पेंड का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी दोषमुक्त हो गया है या उसकी सजा खत्म कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक अदालत ने सजा के क्रियान्वयन (Execution of Sentence) को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यानी दोष कायम रहता है, लेकिन सजा पर रोक लग जाती है।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपील के निस्तारण में लगने वाले समय को देखते हुए सजा सस्पेंड की जा सकती है। इसी आधार पर उन्हें जमानत दी गई है, लेकिन कोर्ट ने कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं।

    अदालत की शर्तों के अनुसार, कुलदीप सेंगर को बिना अनुमति देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। वे पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं कर सकेंगे और न ही मामले से जुड़े किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर पाएंगे। इसके अलावा, उन्हें तय समय पर अदालत में पेश होना भी अनिवार्य होगा।

    हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। वजह यह है कि पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसे वे अभी भुगत रहे हैं। इस कारण उनकी रिहाई पर कानूनी रोक बनी हुई है।

    कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल तकनीकी राहत है, न कि दोष से मुक्ति। अंतिम फैसला अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा, जो आने वाले समय में इस केस की दिशा तय करेगा।

  • कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला

    कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला

    कानपुर देहात से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कानपुर देहात मंदिर तोड़ने का प्रयास किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। यह घटना सिकंदरा थाना क्षेत्र के रासधान गांव की बताई जा रही है, जहां एक युवक ने पागलपन का नाटक करते हुए मंदिर में जमकर उत्पात मचाया।स्थानीय लोगों के अनुसार आरोपी युवक अचानक मंदिर परिसर में पहुंचा और मंदिर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगा। जब पुजारी ने उसे रोकने का प्रयास किया तो आरोपी ने पत्थर उठा लिया और पुजारी के पीछे दौड़ पड़ा। किसी तरह पुजारी ने भागकर अपनी जान बचाई। घटना के दौरान मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

    कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला
    कानपुर देहात में मंदिर तोड़ने का प्रयास, पुजारी पर पत्थर से हमला

    इतना ही नहीं, आरोपी युवक ने मंदिर में लगे CCTV कैमरे को भी तोड़ दिया, जिससे उसकी हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड होने से बच सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यह युवक पहले भी इसी तरह का उत्पात करता रहा है और इलाके में उसकी गतिविधियों को लेकर लोग पहले से ही दहशत में थे।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए और पुलिस को जानकारी दी। सिकंदरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने पहले किन-किन घटनाओं को अंजाम दिया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ है या फिर जानबूझकर पागलपन का नाटक कर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा था।

    कानपुर देहात मंदिर तोड़ने का प्रयास जैसी घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल, 2 लाख के पार पहुंची कीमत, सोना भी महंगा

    चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल, 2 लाख के पार पहुंची कीमत, सोना भी महंगा

    सर्राफा बाजार में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। चांदी के भाव लगातार उछाल पर बने हुए हैं और मंगलवार 22 दिसंबर को चांदी की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर बनी हुई है। चांदी की इस रिकॉर्ड तेजी ने निवेशकों और कारोबारियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

    बाजार जानकारों के मुताबिक औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और डॉलर में उतार-चढ़ाव की वजह से कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। खासतौर पर चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और अन्य उद्योगों में बढ़ने से इसकी मांग मजबूत बनी हुई है, जिसका सीधा असर दामों पर पड़ रहा है।

    वहीं सोने के दामों में भी आज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ने से इसकी कीमतें ऊपर की ओर गई हैं। वैश्विक बाजार में कमजोर डॉलर और ब्याज दरों को लेकर असमंजस की स्थिति भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है।

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    सर्राफा बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि शादी-विवाह के सीजन और आने वाले त्योहारों को देखते हुए घरेलू बाजार में भी खरीदारी बढ़ी है। इसका असर सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। निवेशक भी महंगाई और बाजार की अस्थिरता से बचाव के लिए कीमती धातुओं में निवेश को सुरक्षित मान रहे हैं।

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    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में चांदी के भाव और सोने की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी माना जा रहा है।कुल मिलाकर, मौजूदा समय में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल है और इसका सीधा फायदा उन निवेशकों को मिल रहा है, जिन्होंने पहले से ही सोने-चांदी में निवेश किया हुआ है।

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