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Tag: Corruption

  • कानपुर जलकल विभाग में ट्रांसफर के बाद भी अफसर कुर्सी से चिपके: “रवानगी” पर सिफारिश की दीवार!

    कानपुर जलकल विभाग में ट्रांसफर के बाद भी अफसर कुर्सी से चिपके: “रवानगी” पर सिफारिश की दीवार!

    कानपुर। जलकल विभाग में ट्रांसफर तो हो चुका है, लेकिन रवानगी (Relieving) का आदेश मानो किसी वीआईपी काउंटर पर अटक गया हो। दो अफसरों का तबादला जारी होने के बावजूद वे अब तक अपनी कुर्सी पर डटे हैं। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि इनके “ऊँचे संपर्क” और “सिफारिश” ने रवानगी को रोक रखा है।विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि अफसरों की कुर्सी से ऐसी मोहब्बत है कि फाइलें जाम पड़ी हैं, काम रुका है, ठेकेदार परेशान हैं—पर साहब अभी भी उसी रौब में बैठते हैं, जैसे विभाग उनकी निजी जागीर हो।

    ठेकेदारों की चुभती शिकायतें

    विभाग के ठेकेदार बताते हैं कि एक अधिकारी से काम की बात करने जाइए तो वे योग्यता नहीं, पहले जाति पूछते हैं। आरोप यह भी है कि उनका एक “मौन-सहयोगी” हर गड़बड़ी में शामिल रहता हैकाम सब देखता है, लेकिन दिखाई कहीं नहीं देता।

    सवालों के घेरे में सिस्टम

    अब बड़ा सवाल यह है कि जब ट्रांसफर आदेश जारी है, तो रवानगी रोकी क्यों गई?क्या विभाग में नियम नहीं, “पहुँच” चलती है?क्या शहर की जलापूर्ति व्यवस्था ऐसे अफसरों के भरोसे है, जिनकी रवानगी सिफारिश पर निर्भर है?

    जलकल विभाग पर उठ रहे सवाल

    कानपुर की जनता पूछ रही है“ट्रांसफर हो गया, अब तबादला अमल में कौन करवाएगा?”विभागीय सूत्रों का कहना है कि फाइलें चल रही हैं, लेकिन वहां अटकी हैं जहां “सिस्टम और सिफारिश” की दोस्ती सबसे मजबूत होती है। आने वाले दिनों में साफ होगा कि जलकल विभाग के ये अफसर कुर्सी छोड़ेंगे या सिस्टम का मज़ाक बनाते रहेंगे।

  • सीतापुर: हरगांव ब्लॉक में मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल, 83 मजदूर प्रभावित

    सीतापुर: हरगांव ब्लॉक में मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल, 83 मजदूर प्रभावित

    संवाददाता शिवाकांत दीक्षित, सीतापुर सीतापुर जिले के विकासखंड हरगांव की ग्राम पंचायत राही से मनरेगा योजना में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। गरीब मजदूरों को रोजगार देने के लिए बनी इस योजना में ग्राम प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरों के हक पर डाका डाले जाने की गंभीर शिकायतें मिली हैं।

    गांव के अंदर मनरेगा कार्य कागजों में तो दिखते हैं, लेकिन जमीन पर इनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं मिलता। मजदूरों का आरोप है कि बिना काम कराए उनके नाम से हाजिरी चढ़ाई जा रही है और बैंक खातों में पैसा डालकर बाद में निकाल लिया जाता है। यह खेल लंबे समय से चल रहा है, जिससे गरीब मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।

    ताज़ा मामले में ग्राम पंचायत राही की जाँच के दौरान 83 मजदूरों की फर्जी हाजिरी सामने आई है। पूछताछ में ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक के बयान भी मेल नहीं खाते। प्रधान जहां कह रहे हैं कि “काम कल से शुरू हुआ है”, वहीं रोजगार सेवक का कहना है कि “आज बारिश के कारण काम नहीं हुआ।” दोनों के अलग-अलग बयान संदेह को और गहरा करते हैं।

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ राही पंचायत में ही नहीं, बल्कि जनपद के कई विकासखंडों में मनरेगा में धांधली का बड़ा खेल लगातार चल रहा है। मजदूरों के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट खुलेआम किया जा रहा है।

    इस पूरे मामले पर मनरेगा विभाग के अधिकारी ने कहा कि “मामला संज्ञान में आया है, जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।” ग्रामीणों ने मांग की है कि मनरेगा कार्यों की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, ताकि मजदूरों के हक की सुरक्षा हो सके।