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  • महोबा में 55 फीट ऊँचे रावण के पुतले को तैयार कर 40 वर्षों से नारी सशक्तिकरण की मिसाल बनीं शकुंतला

    महोबा में 55 फीट ऊँचे रावण के पुतले को तैयार कर 40 वर्षों से नारी सशक्तिकरण की मिसाल बनीं शकुंतला

    महोबा -बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। महोबा जिले में भी हर साल विशाल रावण के पुतले का दहन कर खुशियाँ मनाई जाती हैं। इस वर्ष 55 फीट ऊँचे रावण के पुतले को सजाने और संवारने का काम पिछले 40 वर्षों से एक महिला शकुंतला कर रही हैं।

    महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए शकुंतला पैसों के लिए नहीं बल्कि बच्चों में खुशियाँ और त्योहार की भावना जगाने के लिए यह कार्य करती हैं। पुतला सजाने-सवारने में उनका सहयोग नंदू उर्फ नंदकिशोर करते हैं। विशाल रावण को तैयार करने में आठ दिन का समय लगा, जिसमें शंकुतला ने अपने कौशल और धैर्य का परिचय दिया।

    शकुंतला कहती हैं, “महिलाओं को कभी किसी काम में पीछे नहीं हटना चाहिए। हर परिस्थिति में हिम्मत और लगन के साथ काम करना चाहिए।” उनका यह योगदान न केवल दशहरा के उत्सव को खास बनाता है, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने और समाज में अपने योगदान को दिखाने का उदाहरण भी पेश करता है।

    महोबा जिला मुख्यालय के डाक बंगला मैदान में यह विशाल रावण बच्चों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। यह पुतला और इसे सजाने वाली शकुंतला की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • नवरात्रि 2025- सिंदूर खेला के साथ आज होगा मां दुर्गा का विसर्जन, हाथी से नाव तक का भव्य आयोजन

    नवरात्रि 2025- सिंदूर खेला के साथ आज होगा मां दुर्गा का विसर्जन, हाथी से नाव तक का भव्य आयोजन

    नवरात्रि 2025- उत्तर प्रदेश में नवरात्रि पर्व की समाप्ति के अवसर पर आज मां दुर्गा का विसर्जन होगा। इस अवसर पर परंपरागत सिंदूर खेला की रस्म के साथ भक्त देवी शक्ति को विदा करेंगे। सनातन परंपरा में शक्ति पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि मां दुर्गा के बिना देवताओं की पूजा अधूरी मानी जाती है।

    इस वर्ष मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर पूजा स्थल पर आईं, जबकि विसर्जन के समय उन्हें नाव पर बिठाकर विदाई दी जाएगी। श्रद्धालुओं ने पहले ही पूजा सामग्री, फूल और रंगोली के साथ मंदिर परिसर को सजाया है। मंदिर के पंडाल में भक्तिमय वातावरण बना रहेगा और स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा।

    सिंदूर खेला में महिलाएं और युवा पूरे उत्साह के साथ मां दुर्गा पर सिंदूर डालते हैं और अपनी आस्था का इजहार करते हैं। विसर्जन के समय भक्त मां दुर्गा को गंगा या स्थानीय तालाब में सुरक्षित रूप से विसर्जित करेंगे।

    इस अवसर पर प्रशासन ने भी सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। देवी विसर्जन के बाद श्रद्धालु सरस्वती पूजा का भी आयोजन करेंगे और नवरात्रि का पर्व पूर्ण रूप से समापन करेगा।