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  • रैपिड रेल में अश्लील हरकत: BTech छात्र और BCA छात्रा की पहचान, FIR दर्ज

    रैपिड रेल में अश्लील हरकत: BTech छात्र और BCA छात्रा की पहचान, FIR दर्ज

    गाजियाबाद में चल रही रैपिड रेल (नमो भारत ट्रेन) के भीतर अश्लील हरकत करने वाले छात्र और छात्रा की पहचान कर ली गई है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस और रैपिड रेल प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच शुरू की गई। जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।जानकारी के अनुसार, आरोपी युवक BTech का छात्र है, जबकि युवती BCA की पढ़ाई कर रही है। दोनों छात्र बताए जा रहे हैं और गाजियाबाद क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वायरल वीडियो में सार्वजनिक परिवहन के भीतर आपत्तिजनक व्यवहार करते हुए दोनों को देखा गया था, जिसके बाद यह मामला तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया।

    वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की हरकतों पर कड़ी आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस ने संज्ञान लिया और पहचान सुनिश्चित कर दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता फैलाने और सामाजिक मर्यादाओं के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। FIR दर्ज होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो किसने और किस उद्देश्य से रिकॉर्ड कर वायरल किया।

    वहीं, रैपिड रेल (नमो भारत) प्रशासन की ओर से भी इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा और मर्यादा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए CCTV निगरानी, सुरक्षा स्टाफ और नियमों के सख्त पालन पर जोर दिया जाएगा।

    इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में अनुशासन और जिम्मेदारी के मुद्दे को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को डिजिटल और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।फिलहाल, रैपिड रेल अश्लील हरकत का यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

  • गाजियाबाद में पिंक बूथ इंचार्ज महिला SI और सिपाही गिरफ्तार, 50 हजार की रिश्वत लेते दबोचे

    गाजियाबाद में पिंक बूथ इंचार्ज महिला SI और सिपाही गिरफ्तार, 50 हजार की रिश्वत लेते दबोचे

    गाजियाबाद उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र से भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां दहेज एक्ट के एक केस में रिश्वत मांगने के आरोप में महिला सब-इंस्पेक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।

    यह कार्रवाई एंटी करप्शन ब्यूरो मेरठ की टीम ने की, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

    दहेज एक्ट के मुकदमे में नाम हटाने के बदले मांगी रिश्वत

    जानकारी के मुताबिक, पीड़ित परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न (Dowry Act) के तहत FIR दर्ज की गई थी, जिसमें सास और ससुर के नाम भी शामिल थे। आरोप है कि मामले की जांच कर रहीं महिला सब-इंस्पेक्टर ने एफआईआर से नाम निकालने के एवज में 2 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। पीड़ित परिवार इस भारी रकम से परेशान हो गया और उसने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से कर दी।

    सौदा 50 हजार में तय, फिर बिछा जाल

    शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो मेरठ की टीम ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया। बातचीत के दौरान महिला सब-इंस्पेक्टर 2 लाख की मांग से घटकर 50 हजार रुपये लेने पर राजी हो गई। तय योजना के अनुसार जैसे ही रिश्वत की रकम ली गई, उसी समय एंटी करप्शन टीम ने छापा मारकर महिला सब-इंस्पेक्टर को रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई में एक अन्य पुलिसकर्मी भी पकड़ा गया, जो इस सौदे में कथित रूप से शामिल था।

    पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

    महिला सब-इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही गाजियाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस तरह की रिश्वतखोरी के और मामले तो सामने नहीं आ सकते।

    सख्त कार्रवाई के संकेत

    सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिला सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

    जनता में आक्रोश, सिस्टम पर सवाल

    इस घटना के बाद आम लोगों में गुस्सा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो पुलिस न्याय दिलाने की जिम्मेदारी निभाती है, वही अगर रिश्वत मांगने लगे तो पीड़ित कहां जाए? मुरादनगर का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त निगरानी और कार्रवाई कितनी जरूरी है।