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    Operation Sindoor: INS विक्रांत से रक्षामंत्री का बड़ा संदेश, दुश्मन की सीमा में घुसकर दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली: पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत को एक बार फिर (Operation Sindoor) अपनी सैन्य ताकत और दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाने का मौका दिया. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दुनिया को अपनी रणनीतिक क्षमता का परिचय दिया. इस अभियान में भारतीय नौसेना, थल सेना, और वायुसेना ने मिलकर अभूतपूर्व समन्वय दिखाया. इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत का दौरा किया और नौसेना के जवानों का उत्साह बढ़ाया. यह लेख ऑपरेशन सिंदूर की सफलता, INS विक्रांत की विशेषताओं, और भारत की समुद्री शक्ति पर प्रकाश डालता है. Operation Sindoor

    Operation Sindoor: भारत का करारा जवाब

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 6-7 मई 2025 की रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया. इस अभियान का उद्देश्य पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करना था. भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों के साथ सटीक हमले किए, जिससे आतंकी ढांचे तबाह हो गए. दूसरी ओर, भारतीय नौसेना ने अरब सागर में अपनी रणनीतिक तैनाती से पाकिस्तानी नौसेना को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया.

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभियान को भारत की सैन्य रणनीति का मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा, “हमने आतंकियों और उनके समर्थकों को साफ संदेश दिया कि भारत अब चुप नहीं रहता, बल्कि निर्णायक कार्रवाई करता है.” नौसेना ने अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ समुद्र में पूर्ण वर्चस्व स्थापित किया, जिससे पाकिस्तान की नौसैन्य गतिविधियाँ बंदरगाहों तक सीमित हो गईं.

    INS विक्रांत: भारत का स्वदेशी गौरव- Operation Sindoor

    INS विक्रांत, भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, भारतीय नौसेना की ताकत का प्रतीक है. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित, यह युद्धपोत ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का जीवंत उदाहरण है. इसमें 70% से अधिक स्वदेशी तकनीक और सामग्री का उपयोग हुआ है. यह 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा, और 59 मीटर ऊँचा है, जो इसे एक विशाल समुद्री किला बनाता है.

    INS विक्रांत की प्रमुख विशेषताएँ:-

    • विस्थापन: 45,000 टन, जो इसे समुद्र में अभेद्य शक्ति प्रदान करता है।
    • विमान क्षमता: 30 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर, जैसे MiG-29K, कामोव Ka-31, और स्वदेशी ALH ध्रुव। जल्द ही राफेल M भी शामिल होगा।
    • हथियार प्रणाली: 64 बराक-8 मिसाइलें (हवा में मार करने वाली), 16 ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें (400 किमी रेंज), और टॉरपीडो लॉन्चर।
    • इंजन: जनरल इलेक्ट्रिक टर्बाइन, जो 1.10 लाख हॉर्सपावर की शक्ति देता है और 56 किमी/घंटा की गति प्रदान करता है।

    INS विक्रांत का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, जिसमें विध्वंसक, फ्रिगेट्स, और पनडुब्बी रोधी पोत शामिल हैं, एक शक्तिशाली इकाई है। यह समूह हवाई, सतह, और पनडुब्बी हमलों से रक्षा करने के साथ-साथ खोज-बचाव और समुद्री निगरानी में सक्षम है। ऑपरेशन सिंदूर में इस ग्रुप ने पाकिस्तानी नौसेना को तटों तक सीमित कर भारत की सामरिक श्रेष्ठता साबित की।

    रक्षा मंत्री का INS विक्रांत दौरा

    30 मई 2025 को, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अरब सागर में तैनात INS विक्रांत का दौरा किया। उन्होंने नौसेना के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की, उनकी बहादुरी की सराहना की, और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर चर्चा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “INS विक्रांत पर खड़े होकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है। आपकी दृढ़ता और साहस भारत की असली ताकत है।”

    उन्होंने नौसेना की आक्रामक रणनीति और समुद्री निगरानी की तारीफ की, जिसने पाकिस्तानी नौसेना को कोई मौका नहीं दिया। 1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “उस समय हमने पाकिस्तान को दो हिस्सों में बाँट दिया था। इस बार अगर नौसेना पूरे जोश में उतरती, तो शायद पाकिस्तान के कई टुकड़े हो जाते।”

    ब्रह्मोस मिसाइल: भारत की सटीक ताकत

    ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने अहम भूमिका निभाई। भारत और रूस के संयुक्त उद्यम से निर्मित यह मिसाइल अपनी गति (ध्वनि की गति से 3 गुना) और सटीकता के लिए जानी जाती है। इसकी विशेषताएँ हैं:

    • रेंज: 400 किमी तक, जिसे जल्द ही 800 किमी तक बढ़ाया जाएगा।
    • लॉन्च मोड: जमीन, समुद्र, और हवा से प्रक्षेपण की क्षमता।
    • सटीकता: उन्नत नेविगेशन सिस्टम से पिनपॉइंट सटीकता।

    इस अभियान में 12 से अधिक ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को नष्ट किया। इसकी सफलता ने भारत की रक्षा तकनीक को वैश्विक मंच पर चमकाया और कई देशों को इस मिसाइल की खरीद के लिए प्रेरित किया।

    आत्मनिर्भर भारत: रक्षा क्षेत्र में नया दौर

    INS विक्रांत और ब्रह्मोस मिसाइल भारत की आत्मनिर्भरता की मिसाल हैं। पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात 30 गुना से अधिक बढ़ा है, जो 20,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच गया है। स्वदेशी हथियार जैसे आकाश मिसाइल, तेजस विमान, और ATAGS तोप ने भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत स्थान दिलाया है।

    रक्षा मंत्री ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में ब्रह्मोस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य भारत को रक्षा उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है।” यह इकाई न केवल भारत की रक्षा क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार सृजन में भी योगदान देगी।

    भविष्य की चुनौतियाँ और नौसेना की तैयारियाँ

    राजनाथ सिंह ने नौसेना को आगाह किया कि भविष्य में चुनौतियाँ और जटिल होंगी। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि आतंकवाद का समय अब खत्म हो चुका है। अगर वह दोबारा कोई गलती करता है, तो हमारी नौसेना पूरी ताकत से जवाब देगी।”

    हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक और आर्थिक महत्व को देखते हुए, भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं को और मजबूत कर रही है। INS विक्रांत, INS विक्रमादित्य, और अन्य आधुनिक युद्धपोत भारत को समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

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