Nation Now Samachar

Tag: IndianSociety

  • Unique Story of Baby Boy Birth:  बेटे की चाह में 10 बेटियां, 11वीं संतान बना बेटा: फतेहाबाद की कहानी जो समाज को आईना दिखाती है

    Unique Story of Baby Boy Birth:  बेटे की चाह में 10 बेटियां, 11वीं संतान बना बेटा: फतेहाबाद की कहानी जो समाज को आईना दिखाती है

    Unique Story of Baby Boy Birth:  21वीं सदी में जब देश और दुनिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों की बात कर रही है, उसी दौर में आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग बेटे की चाह से बाहर नहीं निकल पाया है। इसका ताजा उदाहरण हरियाणा के फतेहाबाद जिले से सामने आया है, जहां एक परिवार में बेटे की उम्मीद में 10 बेटियां पैदा हुईं और 11वीं संतान के रूप में जाकर बेटा हुआ।

    यह मामला फतेहाबाद जिले के ढाणी भोजराज गांव का है। गांव में इन दिनों जश्न का माहौल है। घर-घर लड्डू और मिठाइयां बांटी जा रही हैं, क्योंकि संजय और सुनीता के घर बेटे का जन्म हुआ है। बेटे के जन्म पर खुशी स्वाभाविक है, लेकिन यह खुशी तब सवाल खड़े करती है, जब पता चलता है कि इस बेटे से पहले परिवार में 10 बेटियां हैं।

    संजय की पत्नी सुनीता ने अपनी शादी के 19 सालों में 11 बार गर्भधारण किया। हर बार नॉर्मल डिलीवरी हुई। पहली 10 बार बेटियां पैदा हुईं और अब 11वीं डिलीवरी में बेटा हुआ है। मां और नवजात बेटा दोनों स्वस्थ हैं, लेकिन यह कहानी भारतीय समाज की उस सोच को उजागर करती है, जो आज भी बेटे को वंश का वाहक मानती है।

    परिवार के मुखिया संजय का कहना है कि उन्होंने कभी बेटियों को बोझ नहीं समझा। उनके अनुसार, “बेटियां भगवान की देन हैं, लक्ष्मी का रूप हैं। मैंने उन्हें हमेशा बेटों की तरह पाला है।” संजय बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी बेटी अब 18 साल की हो चुकी है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। बाकी बेटियां भी स्कूल जा रही हैं और सबसे छोटी बेटी का हाल ही में स्कूल में दाखिला हुआ है।

    हालांकि संजय यह भी स्वीकार करते हैं कि बेटे के न होने पर उन्हें समाज के ताने सुनने पड़े। गांव और रिश्तेदारी में तरह-तरह की बातें होती थीं, जिससे वह और उनकी पत्नी मानसिक दबाव में रहते थे। यही सामाजिक दबाव बेटे की चाह को और मजबूत करता गया।

    यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या आज भी समाज में बेटा-बेटी का भेद खत्म नहीं हुआ है? क्या वंश आगे बढ़ाने की सोच के आगे महिलाओं के स्वास्थ्य, बच्चों के भविष्य और परिवार की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज किया जा सकता है?

    यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता की तस्वीर है, जिसे बदलने की आज भी सख्त जरूरत है। बेटियां किसी से कम नहीं हैं—यह साबित वे हर क्षेत्र में कर चुकी हैं। अब जरूरत है कि समाज इस सच्चाई को दिल से स्वीकार करे।

  • RSS प्रमुख मोहन भागवत ने पूरे किए जीवन के 75 वर्ष, शुभकामनाओं की बाढ़

    RSS प्रमुख मोहन भागवत ने पूरे किए जीवन के 75 वर्ष, शुभकामनाओं की बाढ़

    नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने आज अपने जीवन के 75 वर्ष पूरे कर लिए। भागवत का जन्म 1950 में हुआ था और उन्होंने लंबे समय से भारतीय समाज और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में RSS ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और सेवा कार्यों में अनेक पहल की हैं।

    मोहन भागवत ने अपने जीवन में हमेशा समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान और देश की एकता व अखंडता के लिए काम किया है। उनकी योजनाओं और विचारों ने युवाओं में देशभक्ति और समाज सेवा की भावना को जागृत किया है। शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नए सिरे से प्रस्तुत किया है।

    इस मौके पर देशभर से नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य स्तर के कई नेता भी सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से मोहन भागवत को उनके 75वें जन्मदिवस की बधाई दे चुके हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मोहन भागवत की सोच और दिशा ने भारतीय समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में RSS ने कई सामाजिक और विकासात्मक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक संचालित किया है, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिला है।

    भागवत के जीवन की सफलता और सेवा भावना को देखते हुए उनके अनुयायी और नागरिक उनके लिए प्रार्थना और शुभकामनाएं भेज रहे हैं। देशभर के लोग सोशल मीडिया पर उनके जन्मदिन पर संदेश और बधाई दे रहे हैं, जिसमें उनके स्वास्थ्य, लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जा रही है।