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    Indore water contamination: दूषित पानी से 5 महीने के मासूम की मौत, भागीरथपुरा में अब तक 7 जानें गईं

    Indore water contamination: दूषित पानी से 5 महीने के मासूम की मौत, भागीरथपुरा में अब तक 7 जानें गईं इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, इन दिनों गंभीर जल संकट और दूषित पानी से हो रही मौतों को लेकर सुर्खियों में है। शहर के भागीरथपुरा इलाके से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां दूषित पानी से बने दूध को पीने से 5 महीने के मासूम बच्चे की मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।

    कैसे हुई मासूम की मौत?

    मृतक बच्चे का नाम अव्यान बताया गया है। परिजनों के अनुसार, बच्चे की मां ने दूध अधिक गाढ़ा होने के कारण उसमें नल का पानी मिलाकर पिलाया था। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यही पानी उनके बच्चे की जान ले लेगा। दूध पीने के कुछ समय बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी, दस्त और तेज बुखार के लक्षण दिखाई दिए। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया।

    इलाके में बढ़ता मौतों का आंकड़ा

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। कई अन्य लोग गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पतालों में भर्ती हैं। पानी में सीवेज मिलावट और बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका जताई जा रही है।

    प्रशासन और नगर निगम पर उठे सवाल

    इस घटना के बाद नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी पानी की बदबू, रंग बदलने और पेट की बीमारियों की शिकायतें की थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब जब जानें जा रही हैं, तब प्रशासन हरकत में आया है।

    पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए

    नगर निगम ने प्रभावित इलाके से पानी के सैंपल लेकर लैब जांच के लिए भेजने की बात कही है। साथ ही अस्थायी रूप से टैंकरों से साफ पानी सप्लाई करने का दावा किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर बीमार लोगों की जांच कर रही है।

    स्थानीय लोगों में आक्रोश

    घटना के बाद भागीरथपुरा में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते पाइपलाइन की जांच और मरम्मत की जाती, तो इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। लोगों ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।