संवाददाता नितेश तिवारी अमेठी शहर के रामलीला मैदान में आयोजित “अमेठी महोत्सव 2025–26” के अंतर्गत लगी प्रदर्शनी को लेकर विवाद सामने आया है। प्रदर्शनी के बाहर इसे हैंडलूम, क्राफ्ट, हस्तशिल्प और खादी उत्पादों का एक्सपो बताया गया है, लेकिन कुछ संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनी में बिक रहे कई उत्पाद भारतीय न होकर बांग्लादेश और चीन मूल के हैं।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदर्शनी का विरोध किया। उनका कहना है कि यदि खादी और हस्तशिल्प के नाम पर विदेशी उत्पाद बेचे जा रहे हैं, तो यह मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहलों की भावना के विपरीत है।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की बिक्री से उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है और स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस तरह के आयोजनों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
संगठनों ने मांग की है कि प्रदर्शनी में लगाए गए सभी स्टॉलों पर बिकने वाले सामान की Country of Origin स्पष्ट रूप से दर्शाई जाए। इसके साथ ही आयोजकों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे संबंधित अनुमति और आयात से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करें, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
विरोध के दौरान यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार देशवासियों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने और स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने की अपील की जाती रही है। ऐसे में यदि इन आयोजनों में आयातित वस्तुएं बेची जाती हैं, तो यह जनभावनाओं के विपरीत माना जाएगा।
फिलहाल इस पूरे अमेठी महोत्सव प्रदर्शनी विवाद पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, प्रदर्शनी के आयोजकों ने भी अभी तक आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है।स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।
