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  • केदारनाथ घाटी में दिसंबर सूखा: क्या ग्लोबल वार्मिंग हिमालय के लिए खतरे की घंटी है?

    केदारनाथ घाटी में दिसंबर सूखा: क्या ग्लोबल वार्मिंग हिमालय के लिए खतरे की घंटी है?

    केदारनाथ | उत्तराखंड की पवित्र केदारनाथ घाटी से सामने आए ताजा वीडियो ने पर्यावरण और मौसम को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दिसंबर का महीना खत्म होने को है, लेकिन अब तक केदारनाथ घाटी में सीजन की पहली बर्फबारी नहीं हुई है। आमतौर पर हर साल दिसंबर के पहले सप्ताह में यहां बर्फ गिरना शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार पूरा महीना लगभग सूखा बीत गया है।

    हर साल की परंपरा इस बार टूटी

    स्थानीय लोगों, तीर्थ पुरोहितों और होटल व्यवसायियों के अनुसार,
    हर साल दिसंबर के शुरुआती दिनों में केदारनाथ मंदिर और आसपास के पहाड़ बर्फ से ढक जाते थे। जनवरी–फरवरी में यहां कई फीट तक बर्फ जमना सामान्य बात थी। लेकिन इस साल मौसम अपेक्षाकृत गर्म बना हुआ है और तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है।

    क्या यह ग्लोबल वार्मिंग का सीधा असर है?

    मौसम विशेषज्ञ और पर्यावरण वैज्ञानिक मानते हैं कि यह स्थिति ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़ी हो सकती है।पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में औसत तापमान बढ़ा है बर्फबारी की अवधि घट रही है मौसम के पैटर्न में अस्थिरता बढ़ी हैविशेषज्ञों का कहना है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ), जो उत्तर भारत में सर्दियों की बारिश और बर्फबारी के लिए जिम्मेदार होते हैं, इस बार कमजोर रहे हैं।

    सिर्फ केदारनाथ ही नहीं, पूरा हिमालय प्रभावित

    केदारनाथ घाटी के साथ-साथ बद्रीनाथ, गंगोत्री,यमुनोत्री,हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के कई ऊंचाई वाले इलाके भी दिसंबर के अंत तक सामान्य से कम बर्फबारी का सामना कर रहे हैं। यह संकेत देता है कि समस्या स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र से जुड़ी हुई है।पर्यावरणविदों के अनुसार, बर्फबारी कम होने के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं:ग्लेशियर तेजी से पिघल सकते हैंनदियों के जलस्तर पर असर पड़ेगा गर्मियों में जल संकट गहराएगा भूस्खलन और ग्लेशियर झील फटने (GLOF) का खतरा बढ़ेगा तीर्थाटन और पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा

    क्या बदल रहा है हिमालय का भविष्य?

    केदारनाथ घाटी का सूखा दिसंबर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या हिमालय अब पहले जैसा नहीं रहा। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच यह जरूरी हो गया है कि पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कटौती और सतत विकास पर गंभीरता से काम किया जाए।फिलहाल मौसम विज्ञान विभाग आने वाले हफ्तों में बदलाव की संभावना जता रहा है, लेकिन दिसंबर में बर्फबारी न होना निश्चित रूप से खतरे की घंटी है। केदारनाथ घाटी का यह सूखा दिसंबर आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा कर सकता है।

  • वाराणसी कफ सिरप मामले में आरोपी शुभम जायसवाल की 38 करोड़ की संपत्ति हो सकती है जब्त

    वाराणसी कफ सिरप मामले में आरोपी शुभम जायसवाल की 38 करोड़ की संपत्ति हो सकती है जब्त

    वाराणसी के बहुचर्चित कफ सिरप मामले में फरार आरोपी शुभम जायसवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट के निर्देश पर शुभम जायसवाल की करीब 38 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अदालत ने आरोपी को एक सप्ताह के भीतर अपनी चल-अचल संपत्तियों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

    एक हफ्ते में देना होगा संपत्ति का विवरण

    जानकारी के अनुसार, यदि शुभम जायसवाल तय समय सीमा में संपत्ति का विवरण देने में विफल रहता है, तो कोर्ट उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए संपत्ति जब्ती का आदेश जारी कर सकता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी ने अवैध कफ सिरप कारोबार से भारी संपत्ति अर्जित की है।

    50 हजार रुपये का इनाम घोषित

    शुभम जायसवाल फिलहाल फरार चल रहा है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया है। यूपी पुलिस की कई टीमें लगातार उसकी तलाश में दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक वह कानून की पकड़ से बाहर है।

    कफ सिरप कांड में अहम आरोपी

    गौरतलब है कि वाराणसी कफ सिरप मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा है। इस मामले में अवैध और नकली कफ सिरप के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई का आरोप है। शुभम जायसवाल को इस नेटवर्क का अहम कड़ी माना जा रहा है।फिलहाल कोर्ट की सख्ती और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में आरोपी की गिरफ्तारी और संपत्ति को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ सकता है।

  • अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती: PM मोदी ने ‘सदैव अटल’ स्मारक पर दी श्रद्धांजलि, बताया राजनीति की मिसाल

    अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती: PM मोदी ने ‘सदैव अटल’ स्मारक पर दी श्रद्धांजलि, बताया राजनीति की मिसाल

    25 दिसंबर, देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जन्म जयंती के अवसर पर राष्ट्र ने उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पहुंचकर अटल जी को पुष्पांजलि अर्पित की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का एक आदर्श स्तंभ बताते हुए कहा कि उनके व्यवहार, गरिमा और राष्ट्रीय हित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने देश की राजनीति में एक ऊँची मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन आज भी देशवासियों और जनप्रतिनिधियों को निरंतर प्रेरणा देता है।

    श्रद्धांजलि देने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर भी अटल जी को याद किया। उन्होंने लिखा कि“अटल जी का जीवन यह सिखाता है कि नेतृत्व पद से नहीं, बल्कि आचरण से तय होता है।”पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राष्ट्र के प्रति अटल जी की निष्ठा और सेवा भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।

    देशभर में अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया, जहां उनके विचारों, कवि व्यक्तित्व और राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान को याद किया गया।

  • बांदा में धूमधाम से मनाई गई अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती, मंत्री रामकेश निषाद ने दी श्रद्धांजलि

    बांदा में धूमधाम से मनाई गई अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती, मंत्री रामकेश निषाद ने दी श्रद्धांजलि

    संवाददाता मोहित पाल बांदा में भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।कार्यक्रम की शुरुआत में मंत्री रामकेश निषाद ने अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन, उनकी विचारधारा और राष्ट्रहित में दिया गया योगदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके आदर्श हमें सेवा, सुशासन और राष्ट्रनिर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ने की सीख देते हैं।

    कार्यक्रम के दौरान जनपद स्तरीय विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली विजेताओं को सम्मानित किया गया। विजेताओं को धनराशि के चेक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए, जिससे उनके मनोबल और प्रतिभा को प्रोत्साहन मिल सके।

    मंत्री रामकेश निषाद ने जानकारी दी कि लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित प्रेरणा स्थल का सीधा प्रसारण प्रदेश के सभी जिलों में दिखाया गया। इसी क्रम में बांदा में भी छात्रों और छात्राओं की उपस्थिति में इसका लाइव टेलीकास्ट प्रदर्शित किया गया, जिससे युवा पीढ़ी अटल जी के विचारों और योगदान से प्रेरित हो सके।

    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/delhi-atal-canteen-5-rupees-food-launch/

    इस कार्यक्रम में जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद के साथ सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी, जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल, नरैनी विधायक ओम मनी वर्मा, बांदा जिलाधिकारी जे. रीभा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • दिल्ली में शुरू हुई अटल कैंटीन, अब ₹5 में मिलेगा भरपेट पौष्टिक भोजन

    दिल्ली में शुरू हुई अटल कैंटीन, अब ₹5 में मिलेगा भरपेट पौष्टिक भोजन

    दिल्ली में आज से अटल कैंटीन की औपचारिक शुरुआत हो गई है, जहां आम लोगों को मात्र ₹5 में भरपेट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस जनकल्याणकारी पहल का शुभारंभ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर किया गया है।

    इस योजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी दिल्ली में श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, जरूरतमंदों और कम आय वर्ग के लोगों को सस्ता और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराना है। अटल कैंटीन में परोसा जाने वाला भोजन संतुलित आहार पर आधारित होगा, जिससे लोगों को पोषण भी मिल सके।

    सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अटल कैंटीन योजना को चरणबद्ध तरीके से दिल्ली के विभिन्न इलाकों में शुरू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोग इसका लाभ उठा सकें। कैंटीनों में साफ-सफाई और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

    इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी का पूरा जीवन गरीबों और आम जनता के कल्याण को समर्पित रहा है। उनकी जयंती पर इस तरह की योजना शुरू करना उनके विचारों और आदर्शों को सच्ची श्रद्धांजलि है।

    स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा है कि महंगाई के दौर में ₹5 में भरपेट भोजन मिलना गरीब और मेहनतकश वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित होगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह योजना दिल्ली के सामाजिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • यादव समाज पर विवादित बयान: कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने मांगी माफी

    यादव समाज पर विवादित बयान: कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने मांगी माफी

    कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। यादव समाज पर दिए गए उनके बयान के बाद मथुरा समेत कई इलाकों में नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कथावाचक यह कहते नजर आए कि यादव भगवान के वंशज नहीं हैं। इस बयान को लेकर यादव समाज के लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई और विरोध दर्ज कराया।

    विवाद बढ़ने के बाद कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वायरल हो रहा वीडियो हालिया नहीं है, बल्कि करीब चार साल पुराना है। उनका कहना है कि वीडियो को वर्तमान समय से जोड़कर फैलाया जा रहा है, जिससे समाज में गलतफहमी और तनाव पैदा हो रहा है।

    इंद्रेश उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी समाज, वर्ग या समुदाय की भावनाओं को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर उनके किसी कथन से यादव समाज की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।

    वायरल वीडियो सामने आने के बाद मथुरा में यादव समाज के लोगों में आक्रोश देखने को मिला। कई संगठनों ने बयान की निंदा करते हुए कथावाचक से माफी की मांग की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    धार्मिक और सामाजिक विषयों पर दिए गए बयानों को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। इस मामले में भी लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मंच से बोलते समय वक्ताओं को शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, ताकि किसी समाज या समुदाय की भावनाएं आहत न हों।

    फिलहाल, इंद्रेश उपाध्याय की माफी के बाद मामला शांत होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो वायरल होने से किस तरह नए विवाद खड़े हो जाते हैं। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

  • अमेठी में बांग्लादेश विरोध: VHP-बजरंग दल का प्रदर्शन, PM का पुतला दहन

    अमेठी में बांग्लादेश विरोध: VHP-बजरंग दल का प्रदर्शन, PM का पुतला दहन

    अमेठी में बांग्लादेश विरोध प्रदर्शन को लेकर शनिवार को माहौल गरमा गया। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कस्बे में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर नारेबाजी की और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया।प्रदर्शन की शुरुआत सब्जी मंडी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से हुई, जहां बड़ी संख्या में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता एकत्र हुए। जुलूस के दौरान “भारत माता की जय”, “जय श्रीराम” और “बांग्लादेश मुर्दाबाद” के नारों से पूरा कस्बा गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के साथ हो रहे कथित अत्याचारों पर गहरा आक्रोश जताया।

    जुलूस कस्बे के प्रमुख मार्गों से होता हुआ आगे बढ़ा, जहां आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के पुतले को पहले चप्पलों से पीटा और बाद में आग लगाकर पुतला दहन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की निंदा की और दोषियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की मांग की।

    प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद की जिला अध्यक्ष सरिता सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    सरिता सिंह ने भारत सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल पीड़ित हिंदुओं के समर्थन में हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे।

    प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की सतर्कता के चलते स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

  • फर्रुखाबाद में आधी रात क्रिसमस का जश्न, मसीह समाज ने मनाया प्रभु यीशु का जन्मोत्सव

    फर्रुखाबाद में आधी रात क्रिसमस का जश्न, मसीह समाज ने मनाया प्रभु यीशु का जन्मोत्सव

    फर्रुखाबाद में क्रिसमस का जश्न इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। बुधवार आधी रात जैसे ही घड़ी की सुइयों ने 12 बजने का संकेत दिया, सीएनआई बढ़पुर चर्च समेत पूरा मसीह समाज प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव की खुशियों में डूब गया। “मैरी क्रिसमस” की गूंज, रंग-बिरंगी रोशनियां और आपसी शुभकामनाओं से पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवपूर्ण नजर आया।

    रात करीब 11 बजे से ही सीएनआई बढ़पुर चर्च में विशेष प्रार्थना सभा के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी। पादरी मनोज कुमार ने पवित्र बाइबिल से प्रभु यीशु मसीह के संदेशों का पाठ करते हुए कहा कि क्रिसमस केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति बनाए रखने का आह्वान किया।

    प्रार्थना सभा के दौरान देश-दुनिया में शांति, समाज से भ्रष्टाचार के अंत और मानवता की मजबूती के लिए विशेष दुआएं की गईं। चर्च परिसर में मौजूद श्रद्धालु भावुक नजर आए और पूरे वातावरण में आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरों पर क्रिसमस की खास खुशी साफ झलक रही थी।

    चर्च परिसर को रंगीन झालरों, आकर्षक लाइटों और सजावटी प्रतीकों से भव्य रूप से सजाया गया था। इस दौरान सांता क्लॉज बच्चों को टॉफी और चॉकलेट बांटते नजर आए, जिससे बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोग एक-दूसरे को गले लगाकर प्रभु यीशु के प्रेम और करुणा का संदेश साझा करते रहे।

    रात 12 बजते ही सामूहिक रूप से क्रिसमस केक काटा गया और मसीही गीतों की मधुर धुनों के बीच प्रभु यीशु के जन्मोत्सव का उत्सव मनाया गया। पूरा चर्च परिसर किसी उत्सव नगरी में तब्दील हो गया।

    क्रिसमस को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा के मद्देनजर चर्च परिसर और आसपास पुलिस बल तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

  • सीरप कांड में सपा नेताओं की मिलीभगत का आरोप, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का बड़ा बयान

    सीरप कांड में सपा नेताओं की मिलीभगत का आरोप, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का बड़ा बयान

    उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित सीरप मामले में सपा नेताओं की मिलीभगत को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राज्य के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस पूरे प्रकरण में सपा नेताओं का सीधा कनेक्शन सामने आ रहा है। मंत्री ने दावा किया कि आरोपियों की तस्वीरें समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ मौजूद हैं, जिससे मिलीभगत स्पष्ट होती है।

    दयाशंकर सिंह ने कहा कि यह मामला केवल अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण की भी आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर नकली या संदिग्ध सीरप से जुड़े आरोप हैं, उनके संबंध सपा के प्रभावशाली नेताओं से रहे हैं। मंत्री के अनुसार, तस्वीरें और सार्वजनिक मंचों पर मौजूदगी इस बात का प्रमाण हैं कि आरोपी अकेले नहीं थे।

    परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान योगी सरकार इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं और चाहे कोई भी कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है।

    सीरप मामले में सपा नेताओं की मिलीभगत के आरोपों के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से भी पलटवार देखने को मिला है। सपा नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और कहा है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है।

    इस पूरे विवाद के बीच मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। जहां भाजपा इसे पिछली सरकारों के दौरान पनपे भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रही है, वहीं सपा इसे भाजपा की विफलताओं से ध्यान हटाने की रणनीति करार दे रही है।

    फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जांच प्रक्रिया जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच की दिशा क्या मोड़ लेती है, इस पर प्रदेश की राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं।

  • अटल बिहारी वाजपेयी का विश्वास और सिद्धांत, जन्मदिन पर जानिए घर के पते से जुड़ा किस्सा

    अटल बिहारी वाजपेयी का विश्वास और सिद्धांत, जन्मदिन पर जानिए घर के पते से जुड़ा किस्सा

    भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि विश्वास, सिद्धांत और सादगी की मिसाल थे। उनके जन्मदिन के अवसर पर उनसे जुड़ा एक ऐसा किस्सा सामने आता है, जो आज भी राजनीति और समाज दोनों के लिए प्रेरणा देता है। यह कहानी उनके घर के पते से जुड़ी है, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं।

    अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी के लिए जाना गया। कहा जाता है कि जब वह सक्रिय राजनीति में थे, तब उनके नाम से आने वाले पत्रों और दस्तावेजों में उनके घर का पता बेहद साधारण तरीके से लिखा जाता था। एक बार अधिकारियों ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए उनके आवास का पता औपचारिक और भव्य रूप में दर्ज किया जाए। लेकिन अटल जी ने इसे विनम्रता से ठुकरा दिया।

    उन्होंने साफ कहा कि घर का पता बदलने से व्यक्ति की पहचान नहीं बदलती। उनका मानना था कि पद अस्थायी होते हैं, लेकिन सिद्धांत और विश्वास स्थायी होते हैं। यही कारण था कि उन्होंने कभी अपने पद का उपयोग व्यक्तिगत सुविधा या दिखावे के लिए नहीं किया।

    अटल बिहारी वाजपेयी जन्मदिन किस्सा यह भी बताता है कि वह सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे। उनके लिए राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी थी। यही वजह है कि उनके निर्णयों में व्यक्तिगत लाभ के बजाय राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा।

    अटल जी की सादगी उनके पूरे जीवन में झलकती रही। चाहे पहनावा हो, रहन-सहन हो या फिर व्यवहार—हर जगह उनकी सरलता लोगों को प्रभावित करती थी। उनके इसी स्वभाव ने उन्हें विरोधियों के बीच भी सम्मान दिलाया।

    आज के राजनीतिक दौर में अटल बिहारी वाजपेयी का यह किस्सा हमें याद दिलाता है कि सच्चा नेता वही होता है जो सिद्धांतों से कभी समझौता न करे। उनके जन्मदिन पर यह कहानी सिर्फ स्मरण नहीं, बल्कि एक सीख है कि विश्वास और ईमानदारी ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होती है।