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  • अमेठी में अधिवक्ताओं के विरोध के बीच SDM के समर्थन में उतरे सैकड़ों फरियादी

    अमेठी में अधिवक्ताओं के विरोध के बीच SDM के समर्थन में उतरे सैकड़ों फरियादी

    संवाददाता नितेश अमेठी जिले की मुसाफिरखाना तहसील में बीते पांच दिनों से चल रहे अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। अधिवक्ताओं के आंदोलन के विपरीत अब सैकड़ों फरियादी और ग्राम प्रधान एसडीएम की कार्यशैली के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। यह समर्थन तहसील दिवस के दौरान उस समय देखने को मिला, जब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) द्वारा जनसुनवाई की जा रही थी।

    तहसील दिवस की जनसुनवाई में दिखा जनसमर्थन

    तहसील दिवस में पहुंचे सैकड़ों फरियादियों और ग्राम प्रधानों ने एक स्वर में कहा कि एसडीएम आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं और न्याय दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। फरियादियों का कहना है कि एसडीएम की कार्यशैली निष्पक्ष और जनहित में है, इसलिए उनके खिलाफ हो रहे विरोध को वे सही नहीं मानते।जनसुनवाई के दौरान कई ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखते हुए यह भी कहा कि वे दूर-दराज के गांवों से न्याय की उम्मीद लेकर तहसील आते हैं और एसडीएम के स्तर पर उन्हें राहत मिलती है।

    फरियादियों का आरोप: तारीख पर तारीख से नहीं मिल रहा न्याय

    फरियादियों ने अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अधिकारी न्याय करना चाहते हैं, तब कुछ मामलों में केवल तारीख पर तारीख दी जाती है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि वकीलों के विरोध के चलते कई दिनों से तहसील का कामकाज प्रभावित हो रहा है और उन्हें न्याय पाने में देरी हो रही है।कुछ फरियादियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिवक्ताओं के आंदोलन की वजह से उनकी शिकायतों की सुनवाई रुक गई है, जिससे गरीब और ग्रामीण वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।

    मुसाफिरखाना तहसील में 5 दिन से जारी है विरोध

    गौरतलब है कि इससे पहले लेखपालों के समर्थन में भी फरियादी सामने आ चुके हैं और अब एसडीएम के पक्ष में सैकड़ों लोग उतर आए हैं। मुसाफिरखाना तहसील में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार पांच दिनों से जारी है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले पर उच्च अधिकारियों की नजर बनी हुई है और स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं फरियादियों की मांग है कि न्याय प्रक्रिया बाधित न हो और तहसील में नियमित रूप से जनसुनवाई जारी रहे।

  • पवन सिंह के जन्मदिन वीडियो से तीसरी शादी की चर्चा तेज, सोशल मीडिया पर कयास

    पवन सिंह के जन्मदिन वीडियो से तीसरी शादी की चर्चा तेज, सोशल मीडिया पर कयास

    भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार पवन सिंह एक बार फिर अपनी फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनके जन्मदिन के मौके पर सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। इस वायरल वीडियो में पवन सिंह एक महिला के साथ केक काटते नजर आ रहे हैं, जिसके बाद तीसरी शादी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    महिला के साथ केक काटते दिखे पवन सिंह

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पवन सिंह एक महिला के साथ बेहद करीबी माहौल में जन्मदिन का केक काट रहे हैं। वीडियो में महिला की मांग में सिंदूर दिखाई दे रहा है, जबकि पवन सिंह की हालत और उनके हावभाव को लेकर भी लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।कुछ लोग इसे पवन सिंह की तीसरी शादी से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि यह सिर्फ एक निजी समारोह हो सकता है। हालांकि, वीडियो के सामने आने के बाद से यह मामला तेजी से वायरल हो गया है।

    सोशल मीडिया पर उठे सवाल

    जैसे ही वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कोई इसे अफवाह बता रहा है तो कोई पवन सिंह के वैवाहिक जीवन को लेकर सवाल उठा रहा है। कई यूजर्स महिला की पहचान जानने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे जानबूझकर फैलाया गया भ्रम भी बता रहे हैं।फिलहाल इस पूरे मामले पर पवन सिंह की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलें और भी तेज हो गई हैं।

    पत्नी ज्योति सिंह की बधाई से बढ़ी चर्चा

    इस पूरे विवाद के बीच एक और बात ने चर्चा को और हवा दे दी। पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है। ज्योति सिंह की इस बधाई के बाद लोग दोनों के रिश्तों को लेकर और ज्यादा सवाल करने लगे हैं।कुछ लोगों का मानना है कि अगर सब कुछ सामान्य है, तो तीसरी शादी की खबरें सिर्फ अफवाह हैं। वहीं कुछ का कहना है कि पवन सिंह की निजी जिंदगी पहले भी विवादों में रही है, इसलिए लोग किसी भी वायरल वीडियो को गंभीरता से ले रहे हैं।

    आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

    फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया कयासों तक ही सीमित है। जब तक पवन सिंह या उनके करीबी किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं करते, तब तक इन चर्चाओं को अफवाह ही माना जा सकता है।

  • वाराणसी में कमिश्नर के वाहन के सामने महिलाओं का धरना, जमीन विवाद का मामला

    वाराणसी में कमिश्नर के वाहन के सामने महिलाओं का धरना, जमीन विवाद का मामला

    संवाददाता मनीष पटेल वाराणसी में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई जब कुछ महिलाएं पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के कार्यालय के बाहर उनके वाहन के सामने धरने पर बैठ गईं। महिलाओं का आरोप था कि चोलापुर थाने में जमीन विवाद की शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।कार्यालय पुलिस आयुक्त के गेट पर धरना देख कैंट पुलिस महिलाओं को समझाकर हटाने का प्रयास कर रही थी। इसी दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए उन्होंने वाहन से उतरकर स्वयं महिलाओं से बातचीत की और उनकी समस्या को गंभीरता से सुना। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने सभी महिलाओं को अपने कार्यालय में बुलाया।

    चोलापुर थाने पर सुनवाई न होने का आरोप

    धरने पर बैठी महिलाओं ने बताया कि उनकी जमीन उनकी सास धनों देवी के नाम दर्ज है, लेकिन धनंजय यादव और उसके परिवार के लोग आए दिन उनकी जमीन पर आकर जबरन कब्जा करने का प्रयास करते हैं। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें धमकाया जाता है और मारपीट की जाती है।महिलाओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में चोलापुर थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब कथित आरोपियों को पता चला कि महिलाएं थाने गई हैं, तो वे उनके घर पर चढ़ आए और बच्चों व पुरुषों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की।

    पुलिस आयुक्त ने लिया संज्ञान

    थाने से न्याय न मिलने पर महिलाएं सीधे वाराणसी पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने महिलाओं की पूरी बात सुनी और मामले को गंभीर बताया।उन्होंने महिलाओं को आश्वासन दिया कि चोलापुर थाने को इस मामले में निर्देश दे दिए गए हैं। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर सुनवाई और कार्रवाई नहीं होती है, तो महिलाएं दोबारा उनसे संपर्क करें

    एक सप्ताह में कार्रवाई का भरोसा

    पुलिस आयुक्त के आश्वासन के बाद महिलाओं ने धरना समाप्त किया। प्रशासन की ओर से यह संदेश दिया गया कि जमीन विवाद जैसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा।यह मामला एक बार फिर स्थानीय थानों की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों की सुनवाई को लेकर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन के निर्देशों के बाद चोलापुर थाना इस विवाद में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

  • Gold and Silver Price Today: सस्‍ते या महंगे हो गए सोना-चांदी, जानें आज का भाव

    Gold and Silver Price Today: सस्‍ते या महंगे हो गए सोना-चांदी, जानें आज का भाव

    Gold and Silver Price Today:  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय कमोडिटी बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी के भाव में उछाल देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज़ बढ़त दर्ज की गई।

    MCX पर दोपहर 12:20 बजे तक फरवरी फ्यूचर वाले सोने की कीमत 1,972 रुपये बढ़कर 1,37,733 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। वहीं मार्च कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 6,914 रुपये की उछाल के साथ 2,43,230 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती नजर आई। यह बढ़त निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग को दर्शाती है।

    MCX पर क्यों बढ़े सोना-चांदी के भाव

    जानकारों के मुताबिक, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे हालात में निवेशक शेयर बाजार से निकलकर सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि MCX गोल्ड और सिल्वर प्राइस में अचानक उछाल दर्ज किया गया।हालांकि, बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को MCX पर सोने के दाम गिरावट के साथ बंद हुए थे, जबकि चांदी में हल्की मजबूती देखने को मिली थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बाद सोमवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

    रिकॉर्ड हाई से अभी भी नीचे हैं कीमतें

    एक अहम बात यह है कि मौजूदा तेजी के बावजूद सोना और चांदी दोनों ही अपने रिकॉर्ड हाई लेवल से नीचे हैं। दिसंबर 2025 में सोने ने 1,40,465 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ था, जबकि चांदी 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड पर पहुंची थी। मौजूदा भाव इन स्तरों से अभी भी कम हैं।

    निवेशकों के लिए क्या संकेत

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले दिनों में सोना और चांदी और मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव तेज़ रहता है, इसलिए निवेश से पहले बाजार की चाल और विशेषज्ञ सलाह पर ध्यान देना जरूरी है।कुल मिलाकर, सोना चांदी के भाव में उछाल ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर कीमती धातुओं की ओर खींच लिया है।

  • बुलंदशहर में पूर्व बसपा विधायक के भतीजे की हत्या, दूसरा गंभीर घायल

    बुलंदशहर में पूर्व बसपा विधायक के भतीजे की हत्या, दूसरा गंभीर घायल

    उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां बसपा के पूर्व विधायक हाजी अलीम के भतीजे सूफियान की हत्या कर दी गई, जबकि दूसरा भतीजा अकरम गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

    यह बुलंदशहर हत्या मामला कोतवाली देहात क्षेत्र के नीमखेड़ा गांव का है। जानकारी के अनुसार, सूफियान अपने भाई अकरम और अधिवक्ता कादिर के साथ गांव में स्थित आम के बाग की पैमाइश करने गया था। इसी दौरान एक स्कॉर्पियो सवार व्यक्ति मौके पर पहुंचा और पैमाइश को लेकर विवाद शुरू हो गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर स्कॉर्पियो सवार ने अपने अन्य साथियों को भी मौके पर बुला लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि हमलावरों ने सूफियान और अकरम को बेरहमी से पीटा और धारदार हथियार से हमला किया।

    गंभीर रूप से घायल सूफियान को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं अकरम की हालत नाजुक बनी हुई है और उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी दिनेश कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

    एसएसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। गांव और आसपास के इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है, जिसमें जमीन विवाद और पुरानी रंजिश के एंगल को भी खंगाला जा रहा है।

    इस घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आम के बाग को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घायलों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • कासगंज गौशाला में लापरवाही, जिलाधिकारी ने लिया कड़ा कदम

    कासगंज गौशाला में लापरवाही, जिलाधिकारी ने लिया कड़ा कदम

    संवाददाता सौरभ यादव कासगंज जिले के पटियाली क्षेत्र के नवादा गांव में स्थित गौशाला की स्थिति देखकर प्रशासन सख्त हो गया है। जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने गौशाला में हुई अनियमितताओं के मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया है। वहीं दो अन्य अधिकारियों को “कारण बताओ” नोटिस जारी किया गया है।

    सूचना मिलने पर गौ रक्षा दल के पदाधिकारियों ने एसडीएम पटियाली को बताया कि गौशाला की स्थिति बेहद खराब है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गायों को रखने के लिए बनाए गए गड्ढों में 8 से 10 गायें एक साथ पड़ी हुई थीं और उनकी सफाई व मिट्टी डालने की व्यवस्था बिल्कुल नहीं थी। इसके अलावा, गौशाला में 20 से 25 गायों की मृत्यु भी दर्ज की गई है।

    जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने स्पष्ट किया है कि गौशालाओं के संचालन में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि व्यवस्थाओं में शीघ्र सुधार किया जाए और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    मौके पर एसडीएम पटियाली, क्षेत्र अधिकारी और चौकी प्रभारी दरियागंज भी निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने गायों के लिए भूसा, पानी और साफ-सफाई की कमी का जायजा लिया। अधिकारियों ने इस बात का संज्ञान लिया कि गौशाला में पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण गायों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

    स्थानीय ग्रामीणों और गौ रक्षा दल के सदस्यों ने भी अधिकारियों को बताया कि गौशाला की नियमित देखभाल नहीं होने के कारण हालात बिगड़े हैं। उन्होंने प्रशासन से निवेदन किया कि गायों की सुरक्षा और पोषण के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

    जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अब से हर महीने गौशालाओं का निरीक्षण किया जाएगा और गायों की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कुल मिलाकर, कासगंज गौशाला लापरवाही का मामला प्रशासनिक गंभीरता के साथ उठाया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि भविष्य में गायों की देखभाल और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

  • “बहुत आगे तक जाएंगे…” सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद, बिहार राजनीति में बढ़ी हलचल

    “बहुत आगे तक जाएंगे…” सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद, बिहार राजनीति में बढ़ी हलचल

    बिहार की राजनीति में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुले मंच से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की जमकर सराहना की। मौका था बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शकुनी चौधरी के 90वें जन्मदिन का, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं उनके आवास पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।इस दौरान नीतीश कुमार ने न सिर्फ शकुनी चौधरी के राजनीतिक योगदान को याद किया, बल्कि उनकी मौजूदगी में सम्राट चौधरी के कामकाज की भी तारीफ की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट चौधरी मेहनती नेता हैं और “बहुत आगे तक जाएंगे”, यह कहते हुए उन्होंने उनके उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद भी दिया।

    सम्राट चौधरी के लिए खास रहा यह पल

    डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के लिए यह मौका बेहद खास माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार के इस बयान को सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नीतीश कुमार का इस तरह खुले मंच से सम्राट चौधरी का समर्थन करना आने वाले समय में बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

    शकुनी चौधरी के आवास पर जुटे दिग्गज

    पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शकुनी चौधरी के 90वें जन्मदिन पर कई वरिष्ठ नेता और समर्थक मौजूद रहे। नीतीश कुमार ने उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शकुनी चौधरी का सामाजिक और राजनीतिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

    सियासी मायने क्या हैं?

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह बयान केवल औपचारिक नहीं है। सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद ऐसे समय पर आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं। यह बयान यह भी दर्शाता है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भूमिका और नेतृत्व क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं।

    विपक्ष की भी बढ़ी नजर

    इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों की नजर भी इस बयान पर टिक गई है। सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कई लोग इसे भविष्य की राजनीति का संकेत मान रहे हैं।कुल मिलाकर, शकुनी चौधरी के जन्मदिन समारोह में नीतीश कुमार द्वारा दिया गया यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस आशीर्वाद का राजनीतिक असर कितना गहरा पड़ता है।

  • “जाट हूं, 50 थार खरीद दूंगी” वीडियो वायरल, गाजियाबाद में 2 दरोगाओं संग दबंगई

    “जाट हूं, 50 थार खरीद दूंगी” वीडियो वायरल, गाजियाबाद में 2 दरोगाओं संग दबंगई

    गाजियाबाद से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। गाजियाबाद दबंगई वीडियो में एक महिला खुलेआम यह कहते हुए नजर आ रही है कि “मैं जाट हूं, खड़े-खड़े 50 थार खरीद दूंगी”। हैरानी की बात यह है कि यह बयान दो पुलिस दरोगाओं की मौजूदगी में दिया गया, लेकिन मौके पर कोई सख्त कार्रवाई होती नजर नहीं आई।

    दरोगाओं के सामने दिखा दबंग अंदाज

    वायरल वीडियो में महिला खुद को प्रभावशाली बताते हुए पुलिस पर रौब झाड़ती दिख रही है। वीडियो में मौजूद दो दरोगा उसकी बातों को सुनते नजर आते हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला का यह व्यवहार सोशल मीडिया यूजर्स को खासा नाराज कर रहा है।बताया जा रहा है कि यह वीडियो किसी स्थानीय विवाद के दौरान रिकॉर्ड किया गया, जहां पुलिस मौके पर पहुंची थी। उसी दौरान महिला ने जाति और आर्थिक ताकत का हवाला देकर दबंगई दिखाई।

    सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा

    वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कानून सभी के लिए समान है। कई यूजर्स ने पुलिस पर आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के सामने कार्रवाई करने से बचा जाता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला मामला बताया है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर करते हैं।

    पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

    इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद हों और फिर भी इस तरह की दबंगई हो, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा। हालांकि, वीडियो के वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया है।पुलिस विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।फिलहाल, गाजियाबाद दबंगई वीडियो कानून, व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

  • कानपुर में मेयर-पार्षद विवाद सड़क पर, प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हंगामा

    कानपुर में मेयर-पार्षद विवाद सड़क पर, प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हंगामा

    कानपुर में नगर निगम की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। कानपुर मेयर पार्षद विवाद उस समय खुलकर सामने आ गया, जब एक सरकारी कार्यक्रम में पार्षद समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। खास बात यह रही कि जिस कार्यक्रम में यह विवाद हुआ, उसमें प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।

    प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हुआ हंगामा

    जानकारी के अनुसार, कानपुर में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया। पार्षदों के समर्थक कार्यक्रम स्थल पर नारेबाजी करने लगे और मेयर के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। हंगामे के चलते कुछ देर के लिए कार्यक्रम बाधित भी हुआ, जिससे प्रशासन और आयोजकों में अफरा-तफरी मच गई।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पार्षद समर्थक नगर निगम में अनदेखी और भेदभाव के आरोप लगा रहे थे। उनका कहना था कि विकास कार्यों और फैसलों में पार्षदों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    पार्षद समर्थकों की नाराजगी खुलकर सामने

    पार्षदों और उनके समर्थकों का आरोप है कि मेयर द्वारा लिए जा रहे कई फैसलों में उनकी सहमति नहीं ली जाती। इसी असंतोष ने धीरे-धीरे बड़े विवाद का रूप ले लिया। कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नगर निगम के भीतर चल रहा तनाव अब सार्वजनिक हो चुका है।

    स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुरक्षा बलों ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रण में लिया, ताकि कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके।

    नगर निगम की राजनीति पर सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते मेयर और पार्षदों के बीच संवाद नहीं हुआ, तो आने वाले समय में विवाद और गहरा सकता है।

    प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में हुआ यह हंगामा प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि सरकार इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर सकती है, ताकि नगर निगम में चल रही खींचतान को सुलझाया जा सके।

    फिलहाल, कानपुर मेयर पार्षद विवाद ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम की अंदरूनी राजनीति अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़क पर उतर आई है।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच की मांग, देहरादून में प्रदर्शन, हजारों पुलिस तैनात

    अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच की मांग, देहरादून में प्रदर्शन, हजारों पुलिस तैनात

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अंकिता भंडारी न्याय मांग को लेकर एक बार फिर माहौल गर्म हो गया है। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शहर में भारी पुलिस बल की तैनाती की है।

    सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

    प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने में हो रही देरी से जनता में गहरा आक्रोश है। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी भी की जा रही है और लोग दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग पर अड़े हुए हैं।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले में निष्पक्ष और तेज कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे जनता का भरोसा कमजोर पड़ रहा है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

    हजारों पुलिसकर्मी किए गए तैनात

    देहरादून में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। शहर के संवेदनशील इलाकों में हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पीएसी और अन्य सुरक्षा बलों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है। प्रमुख चौराहों और सरकारी इमारतों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैल सके।

    प्रशासन की अपील

    प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी। किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

    जनता की भावना

    अंकिता भंडारी का मामला उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का मानना है कि इस केस में न्याय मिलना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। यही कारण है कि अंकिता भंडारी न्याय मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।प्रशासन की कड़ी निगरानी के बीच फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनकी आवाज सड़कों पर गूंजती रहेगी।