Nation Now Samachar

Tag: Police brutality

  • Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University में छात्रों पर लाठीचार्ज, प्रशासनिक गाज और राजनीतिक विडंबना

    Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University में छात्रों पर लाठीचार्ज, प्रशासनिक गाज और राजनीतिक विडंबना

    Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University

    बाराबंकी की रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ हुई बर्बरता का मामला सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँच गया है। छात्रों को बेरहमी से पीटने वाले पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन इस घटना ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह लाठीचार्ज केवल एक हिंसक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी तस्वीर है जहाँ शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है और एक बड़े राजनीतिक संगठन की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आखिर क्या वजह थी कि चार साल से छात्रों की परीक्षा नहीं हुई? 2021 में मान्यता खत्म होने के बावजूद लाखों रुपये लेकर नए एडमिशन क्यों दिए गए? और इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा की आड़ में कौन सा बड़ा खेल खेला जा रहा था? यह रिपोर्ट इस पूरे मामले की परतें खोलती है।

    शिक्षण व्यवस्था की खुली पोल: छात्रों पर क्यों बरसी लाठियां?

    मामले की जड़ में रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी का एक गंभीर शैक्षणिक और प्रशासनिक कुप्रबंधन है। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी पिछले चार सालों से उनकी परीक्षाएं नहीं करवा रही थी, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया था। यह आरोप तब और भी गंभीर हो जाता है जब यह सामने आया कि यूनिवर्सिटी की मान्यता 2021 में ही खत्म हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद वह छात्रों से लाखों रुपये फीस लेकर एडमिशन देती रही।

    लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब छात्र अपनी डिग्री के लिए भटकने लगे और उनका भविष्य अंधकारमय दिखने लगा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया, अपनी आवाज उठाने का प्रयास किया। लेकिन, जब विरोध की यह आवाज प्रशासन तक पहुंची तो, छात्रों के आरोपों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पुलिस को बुलाकर उन्हें शांत कराने की कोशिश की। इसके बाद जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। पुलिस ने छात्रों पर बेरहमी से लाठियाँ भांजी, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।

    लाठीचार्ज के बाद का भयावह मंजर और सियासी हलचल

    पुलिस के इस हिंसक लाठीचार्ज में कम से कम 12 छात्र घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी हालात बदतर थे। अस्पताल में घायल छात्रों के लिए पर्याप्त बेड तक उपलब्ध नहीं थे, और वे दर्द से तड़पते रहे। यह स्थिति केवल पुलिस की क्रूरता नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को दर्शाती है।

    Barabanki university lathicharge

    जब हालात बेकाबू हो गए और प्रशासन पर सवाल उठने लगे, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। रात में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के आवास का घेराव किया, विरोध प्रदर्शन किया और दोषी अधिकारियों का पुतला दहन किया।

    यह घटना तब और भी ज्यादा चौंकाने वाली हो जाती है जब हम एबीवीपी की पृष्ठभूमि पर गौर करते हैं। एबीवीपी, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी और जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर आधारित है, आज दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। इस संगठन ने हमेशा छात्रों के अधिकारों, राष्ट्रवाद और शिक्षा के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाई है। भाजपा सरकार को सत्ता में लाने में भी इस संगठन की अहम भूमिका रही है। ऐसे में, उसी सरकार में पुलिस की लाठियों से एबीवीपी कार्यकर्ताओं का पिटना एक राजनीतिक विडंबना और प्रशासनिक चूक दोनों को उजागर करता है।

    सीएम योगी ने लिया संज्ञान, प्रशासनिक गाज गिरी

    जब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इस पर तत्काल और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम के दखल के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना शुरू हो गई।

    प्रशासनिक स्तर पर हुई प्रमुख कार्रवाइयां इस प्रकार हैं:

    • सीओ सिटी हर्षित चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
    • नगर कोतवाली प्रभारी और गदिया चौकी के तमाम पुलिसकर्मियों को उनकी लापरवाही और क्रूरता के कारण लाइन हाजिर कर दिया गया है।
    • इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    • कमिश्नर गौरव दयाल को यूनिवर्सिटी की मान्यता और वैधता की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया गया है, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि 2021 में मान्यता खत्म होने के बाद भी एडमिशन क्यों दिए गए।

    यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है, लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या सिर्फ अधिकारियों के निलंबन से इस तरह के मामलों में लगाम लग पाएगी?

    निष्कर्ष

    रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी की घटना ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में चल रही अनियमितताओं और छात्रों के शोषण की कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस शिक्षा व्यवस्था को युवाओं के भविष्य का निर्माण करना चाहिए, वही उनके लिए एक जाल बन गई। इस घटना ने प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवालिया निशान लगाए हैं, और राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।

    फिलहाल, जांच चल रही है और उम्मीद है कि दोषी अधिकारियों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। यह जरूरी है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता लाई जाए और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन को बख्शा न जाए। यह मामला भविष्य में सभी शिक्षण संस्थानों और प्रशासन के लिए एक सबक साबित होना चाहिए।

    ये भी पढ़े: तालाब से हनुमान प्रतिमा मिलने से हड़कंप

    सोर्स : UP CM Yogi orders probe into lathi charge on ABVP workers in Barabanki, cop removed