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  • कानपुर में पुलिस की दबंगई का वीडियो वायरल, छात्र को चौकी इंचार्ज ने बेरहमी से पीटा

    कानपुर में पुलिस की दबंगई का वीडियो वायरल, छात्र को चौकी इंचार्ज ने बेरहमी से पीटा

    कानपुर कानपुर में पुलिस की दबंगई का मामला सामने आया है, जिसमें किदवई नगर के चौकी इंचार्ज ने एक छात्र को बेरहमी से पीटा। छात्र का दोष केवल इतना था कि उसने ओवरस्पीड में पकड़े जाने के बाद मारपीट का नियम नहीं होने की बात कह दी। इस पर चौकी इंचार्ज ने वर्दी की रौब दिखाते हुए थप्पड़ और लात मार दी।

    मामला रविवार दोपहर का है, जब नारामऊ, बिठूर निवासी अक्षय प्रताप सिंह अपने बीटेक मित्र अभिषेक दुबे के साथ किदवई नगर से किसी काम से गुजर रहे थे। गौशाला चौराहे पर चेकिंग कर रहे चौकी इंचार्ज अमित विक्रम त्रिपाठी ने उन्हें रोकने का इशारा किया, लेकिन अक्षय ने बाइक बढ़ा दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों को पकड़कर चौकी लाया।

    जैसे ही छात्र ने कहा कि पुलिस उसे घसीट नहीं सकती, चौकी इंचार्ज आपा खो बैठे और अक्षय पर थप्पड़ों की बौछार और लात मारने लगे। छात्र के विरोध करने पर प्रभारी और भड़क गए और धमकी दी कि उसे “दुरुस्त किया जाएगा।” इस पूरी घटना को छात्र के साथी ने वीडियो में कैद करके सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

    वीडियो वायरल होने के बाद डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया और मामले की जांच एसीपी बाबूपुरवा को सौंपी गई है।यह घटना कानपुर में पुलिस की दबंगई और वर्दी के नाजायज इस्तेमाल की एक बार फिर पुष्टि करती है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग प्रशासन से तीव्र कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की घटनाओं में नागरिक अधिकारों और पुलिस जवाबदेही पर ध्यान देना बेहद आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी गलतियों और हिंसा से बचा जा सके।

  • Kannauj Delivery Death: “एक मिनट में निकल जाएगी गर्मी”,छिबरामऊ कोतवाल साहब का विवादित रवैया

    Kannauj Delivery Death: “एक मिनट में निकल जाएगी गर्मी”,छिबरामऊ कोतवाल साहब का विवादित रवैया

    कन्नौज :- कन्नौज जिले के छिबरामऊ क्षेत्र में डिलीवरी के दौरान महिला की मौत ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर अस्पताल पहुँचा, लेकिन उनका सामना प्रशासन के अनुचित व्यवहार से हुआ।मौके पर पहुंचे छिबरामऊ कोतवाल ने परिजनों से कहा, “एक मिनट में निकल जाएगी गर्मी।” यह कथन न केवल अनुचित था, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए मानसिक दबाव का कारण बन गया। इस बयान ने आसपास के लोगों में भी आक्रोश पैदा किया और प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े किए।

    घटना की जानकारी के अनुसार, मृतक महिला की डिलीवरी के दौरान उसकी स्थिति गंभीर थी। परिजन अस्पताल की उचित देखभाल की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अस्पताल का रवैया निराशाजनक और असंवेदनशील था। ऐसे में परिजन प्रशासन की ओर मदद के लिए पहुँचे, लेकिन पुलिस अधिकारियों का व्यवहार उन्हें और अधिक असुरक्षित महसूस करवा रहा था।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गरीब और कमजोर वर्ग के मामलों में पुलिस कभी-कभी संवेदनहीन रवैया अपनाती है, जबकि अमीर और रसूखदारों के सामने कार्रवाई पूरी तरह अलग होती है। इस घटना ने प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    परिवार ने स्पष्ट रूप से न्याय की मांग की है और प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर भी यह घटना व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग प्रशासन और अस्पताल की जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि गरीब और असहाय लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित किया जाए।

    अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और मृतक परिवार को न्याय दिलाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद जनता में यह चिंता बनी हुई है कि क्या गरीब और कमजोर वर्ग के लिए न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।इस घटना ने स्वास्थ्य और पुलिस प्रशासन में जवाबदेही की कमी को उजागर किया है। नियम और कानून होने के बावजूद प्रशासनिक कर्मियों का संवेदनशील और उचित व्यवहार आवश्यक है। यदि अधिकारी संवेदनशीलता और जवाबदेही दिखाएं, तो ऐसे दुखद मामलों में कम से कम पीड़ितों को मानसिक सहारा मिल सकता है।सोशल मीडिया और जनसंचार माध्यमों पर लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं। जनहित में लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।कुल मिलाकर, कन्नौज में डिलीवरी के दौरान महिला की मौत और उसके बाद छिबरामऊ कोतवाल द्वारा परिजनों को धमकाने की घटना प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता को उजागर करती है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और न्याय प्रक्रिया पर टिकी हैं।