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  • SanatanDharma : 23 साल की साध्वी की जलधारा तपस्या: 7 डिग्री तापमान में 108 मटकों से कर रहीं स्नान

    SanatanDharma : 23 साल की साध्वी की जलधारा तपस्या: 7 डिग्री तापमान में 108 मटकों से कर रहीं स्नान

    धर्म | आध्यात्म | वायरल न्यूज़

    SanatanDharma: कड़ाके की ठंड और 7 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच एक 23 साल की साध्वी इन दिनों अपनी जलधारा तपस्या को लेकर चर्चा में हैं। साध्वी रोजाना 108 मटकों के ठंडे पानी से स्नान कर रही हैं। उनकी यह कठिन तपस्या लोगों के बीच आस्था, श्रद्धा और बहस—तीनों का विषय बन गई है।साध्वी का कहना है कि यह तपस्या आत्मशुद्धि, संयम और साधना के लिए की जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “हर संत ढोंगी नहीं होता। सच्ची साधना दिखावे के लिए नहीं, आत्मबल के लिए होती है।”

    कड़ाके की ठंड में कठिन साधना

    जहां आम लोग ठंड से बचने के लिए अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं, वहीं साध्वी प्रतिदिन सुबह खुले स्थान पर जलधारा तपस्या कर रही हैं। 108 मटकों से गिरता बर्फ जैसा ठंडा पानी उनकी सहनशक्ति और संकल्प को दर्शाता है।

    आस्था और आलोचना—दोनों साथ

    सोशल मीडिया पर साध्वी की तपस्या के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।एक वर्ग इसे अद्भुत श्रद्धा और साहस बता रहा हैतो वहीं दूसरा वर्ग इसे अंधविश्वास करार दे रहा हैहालांकि साध्वी का कहना है कि उन्हें किसी की आलोचना से फर्क नहीं पड़ता।साध्वी ने कहा,“आज संतों को शक की नजर से देखा जाता है, लेकिन सच्ची साधना करने वाले आज भी मौजूद हैं। तपस्या शरीर को नहीं, आत्मा को मजबूत बनाती है।”

    देखने उमड़ रही भीड़

    स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भीड़ रोजाना तपस्या स्थल पर पहुंच रही है। कई लोग इसे प्रेरणा मान रहे हैं तो कई लोग साध्वी से आशीर्वाद लेने भी पहुंच रहे हैं।

  • छठ महापर्व की पौराणिक कथाएं: आस्था, श्रद्धा और सूर्योपासना का महात्म्य

    छठ महापर्व की पौराणिक कथाएं: आस्था, श्रद्धा और सूर्योपासना का महात्म्य

    छठ महापर्व की पौराणिक कथाएं – सनातन परंपरा में भगवान सूर्य देव और षष्ठी देवी (छठी मैया) की उपासना के लिए समर्पित छठ महापर्व का अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी (नहाय खाय) से आरंभ होकर चार दिनों तक चलता है। लोक आस्था से जुड़ा यह पर्व न केवल धार्मिक अनुशासन का प्रतीक है बल्कि यह 36 घंटे निर्जल व्रत के माध्यम से आत्मशक्ति, संकल्प और भक्ति का अद्भुत उदाहरण भी है।आइए जानते हैं छठ पर्व से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाएं, जिनमें इसकी महिमा और उत्पत्ति का वर्णन मिलता है


    कथा 1: भगवान श्रीराम और माता सीता ने किया छठ व्रत

    हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम सूर्यवंशी कुल में जन्मे थे। जब वे रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे, तब माता सीता ने भगवान सूर्य देव की उपासना करते हुए छठ व्रत किया था। इस व्रत के माध्यम से उन्होंने राज्य में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की थी। इसी दिन से छठ पर्व की परंपरा शुरू हुई मानी जाती है।


    कथा 2: द्रौपदी और पांडवों ने किया छठ व्रत

    महाभारत काल में जब पांडव जुएं में सबकुछ हार गए और वनवास भोगने लगे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को सलाह दी कि वे सूर्य साधना और छठ व्रत करें। मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने के बाद पांडवों को अपने कष्टों से मुक्ति मिली और उन्हें खोया वैभव पुनः प्राप्त हुआ।


    कथा 3: वैश्य को सूर्य देव ने लौटाई दृष्टि

    एक बार बिन्दुसर तीर्थ पर एक वैश्य, जिसका नाम महीपाल था, धर्म और देवताओं का विरोधी था। उसने एक बार सूर्य देव की मूर्ति का अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर सूर्य देव ने उसे अंधा होने का श्राप दिया।
    कष्टों से व्याकुल होकर जब वह गंगा में डूबकर प्राण त्यागने जा रहा था, तभी नारद मुनि ने उसे रोका और सूर्य उपासना करने की सलाह दी। वैश्य ने पूरे विधि-विधान से छठ व्रत किया, जिसके बाद उसकी दृष्टि लौट आई और उसका जीवन सुखमय हो गया।


    कथा 4: राजा प्रियव्रत और षष्ठी देवी का वरदान

    कहा जाता है कि राजा प्रियव्रत के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने महर्षि कश्यप की सलाह पर पुत्रयेष्टि यज्ञ कराया, जिसके बाद रानी को गर्भ तो हुआ लेकिन मृत बच्चे का जन्म हुआ। राजा और प्रजा शोक में डूब गए।
    तभी षष्ठी देवी (छठी मैया) प्रकट हुईं और उन्होंने शिशु के मृत शरीर को स्पर्श करते ही जीवित कर दिया। इसके बाद राजा प्रियव्रत ने हर वर्ष इस व्रत को करने का संकल्प लिया। तभी से छठ पर्व लोक आस्था का महापर्व बन गया।


    छठ महापर्व केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, तप, शुद्धता और कृतज्ञता का उत्सव है। सूर्य देव और षष्ठी मैया की उपासना से जीवन में प्रकाश, संतान सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • मुरादाबाद में नवरात्र के पहले माता काली मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़, दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें

    मुरादाबाद में नवरात्र के पहले माता काली मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़, दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें

    मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश। नवरात्र के शुभ अवसर से पहले मुरादाबाद के थाना मुगलपुरा क्षेत्र स्थित प्राचीन माता काली मंदिर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। हजारों की संख्या में लोग सुबह से ही दर्शन के लिए मंदिर के बाहर कतार में खड़े थे। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह मंदिर काफी प्राचीन है और माता रानी सच्ची निष्ठा और भावनाओं के साथ लाए गए मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

    मंदिर की विशेषताएँ

    मंदिर में तैनात पुजारी ने बताया कि यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है और यहाँ मातारानी, शिव, शनिदेव, विष्णु देव सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ की एक जोत पिछले 70 वर्षों से लगातार जली हुई है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।

    महंत और पुजारी की बातें

    महंत रामगिरी ने बताया कि मुरादाबाद एवं आसपास के श्रद्धालु नवरात्र के दौरान विशेष आस्था और श्रद्धा के साथ मंदिर में दर्शन करने आते हैं। उनका कहना है कि सनातन धर्म में यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है और सभी धर्मालंबियों को इस अवसर पर माता रानी के दर्शन अवश्य करने चाहिए। पंडित अनुदक्षित ने भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति मंदिर तक नहीं पहुँच पाता तो अपने घर में माता रानी के नाम से एक जोत जलाकर सेवा कर सकता है।

    प्रशासन और सरकार की सराहना

    श्रद्धालुओं ने पुलिस प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की भी तारीफ की कि मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था बेहतर बनाए रखी गई। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए कतार में खड़े थे, और यह दृश्य दर्शाता है कि नवरात्र जैसे पर्वों पर धार्मिक भावनाएँ कितनी प्रबल होती हैं।

  • 🔴 हमीरपुर LIVE: गोल्डन बाबा और नीम करौली बाबा अचानक पहुंचे हमीरपुर,देखने उमड़ा भक्तों का सैलाब

    🔴 हमीरपुर LIVE: गोल्डन बाबा और नीम करौली बाबा अचानक पहुंचे हमीरपुर,देखने उमड़ा भक्तों का सैलाब

    हमीरपुर- हमीरपुर सदर बस स्टॉप पर उस समय भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जब अचानक गूगल गोल्डन बाबा और नीम करौली सरकार महादेव बाबा (NeemKaroliBaba) के दर्शन हुए। जैसे ही बाबा की गाड़ी रोडवेज बस स्टैंड के पास दिखाई दी, भक्तों ने उन्हें घेर लिया। लोग माला, फूल और मिठाइयों के साथ उनका स्वागत करने पहुंचे और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।

    फूल-मालाओं से हुआ स्वागत, बाबा ने दिया सनातन धर्म का संदेश हमीरपुर LIVE: गोल्डन बाबा और नीम करौली बाबा अचानक पहुंचे हमीरपुर

    बताया गया है कि बाबा कुरारा विकासखंड के ग्राम भौली में अपने एक शिष्य के यहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे। लौटते वक्त बस स्टॉप पर बाबा को देखकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बन गया। देखते ही देखते दर्जनों लोग गाड़ी के पास इकट्ठा हो गए और जयकारों के साथ बाबा का स्वागत किया। हमीरपुर LIVE: गोल्डन बाबा और नीम करौली बाबा अचानक पहुंचे हमीरपुर

    इस दौरान बाबा ने कहा, “सनातन धर्म की यात्रा निरंतर चलती रहती है। देशभर में हम यही संदेश लेकर जाते हैं कि लोग अपने धर्म के प्रति जागरूक हों, आस्था और आत्मबल बढ़े। यही सनातन का सशक्तिकरण है।”कुछ देर रुकने के बाद बाबा का काफिला कानपुर के लिए रवाना हो गया, लेकिन उनके आगमन का दृश्य भक्तों के लिए अविस्मरणीय बन गया।