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  • BHU violence: छात्रों–सुरक्षाकर्मियों में भीषण पत्थरबाजी, 100 से ज्यादा घायल; दो घंटे तक मचा हंगामा

    BHU violence: छात्रों–सुरक्षाकर्मियों में भीषण पत्थरबाजी, 100 से ज्यादा घायल; दो घंटे तक मचा हंगामा

    BHU violence : वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) कैंपस सोमवार देर रात रणभूमि में बदल गया, जब छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी पत्थरबाजी और झड़प हो गई। घटना में 100 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें छात्र और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं।सूचना मिलते ही बीएचयू प्रशासन व पुलिस के कई थानों का फोर्स मौके पर पहुंचा और छात्रों को हॉस्टलों की ओर खदेड़कर स्थिति को नियंत्रित किया। दोनों पक्षों के बीच करीब दो घंटे तक तनाव और टकराव जारी रहा।

    कैसे शुरू हुआ विवाद?

    जानकारी के अनुसार घटना की शुरुआत राजाराम हॉस्टल के पास एक गाड़ी की टक्कर से हुई। टक्कर से नाराज छात्र प्रॉक्टर ऑफिस पहुंचे, जहां उनकी स्टाफ से झड़प हो गई। आरोप है कि इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, जिससे कुछ छात्र घायल हो गए।इसके बाद छात्रों की संख्या अचानक बढ़ने लगी और बड़ी संख्या में युवक हॉस्टलों से बाहर निकल आए।उग्र छात्रों ने तोड़फोड़ कीसुरक्षाकर्मियों पर पत्थरबाजी की एक स्कूटी तोड़ दी परिसर में लगे फ्लैक्स फाड़ दिएऔर कई छात्र वीसी आवास के बाहर धरना देने भी पहुंच गए।

    सुरक्षाकर्मियों का पक्ष

    सुरक्षा टीम का कहना है कि बवाल से पहले मुंह बांधकर आए कुछ छात्रों ने एक छात्र को घेरकर पीटना शुरू कर दिया, जिसके बाद हालात बिगड़ते चले गए।

    पुलिस का बयान

    एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि“फिलहाल स्थिति सामान्य है, परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।”

  • ‘सर तन से जुदा’ के नारे के बाद कानपुर में बवाल, पत्थरबाजी और आरोपी के घर पर भीड़

    ‘सर तन से जुदा’ के नारे के बाद कानपुर में बवाल, पत्थरबाजी और आरोपी के घर पर भीड़

    कानपुर-कानपुर में ‘सर तन से जुदा’ नारे को लेकर स्थिति गंभीर हो गई है। शहर के एक पुराने मोहल्ले में आरोपी के घर के बाहर नारे लिखे जाने के बाद वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। स्थानीय निवासियों और पुलिस के अनुसार, भीड़ ने पत्थरबाजी भी की, जिससे इलाके में डर और हड़कंप फैल गया।मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद के पीछे शिया और सुन्नी समुदाय के बीच पहले से चली आ रही असहमति है। आरोपी के घर पर नारे लिखे जाने के बाद स्थानीय लोग गुस्से में आ गए और पत्थरबाजी करने लगे। भीड़ ने आरोपी के घर के बाहर धक्का-मुक्की की और पुलिस को तुरंत मौके पर बुलाना पड़ा।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, विवाद बढ़ने का कारण छोटे मामलों का लंबित रहना और आपसी टकराव रहा। पुलिस ने तुरंत इलाके को सील किया और अतिरिक्त फोर्स तैनात की। मौके पर पहुंची फील्ड यूनिट ने पत्थरबाजी में शामिल लोगों को हटाया और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित की।पुलिस ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की अफवाह या सोशल मीडिया पोस्ट से स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे वाली गतिविधि में शामिल न होने की अपील की। इसके अलावा, आरोपी के परिवार को सुरक्षा देने के लिए भी विशेष टीम तैनात की गई।

    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी जल्द ही की जाएगी और मामले की गहन जांच की जा रही है। नारे लिखने और पत्थरबाजी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस ने यह भी कहा कि इलाके में शांति बनाए रखने के लिए सभी समुदायों से संयम बरतने का अनुरोध किया गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक और सामुदायिक तनाव लंबे समय तक समाज में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और दोनों पक्षों के बीच संवाद बेहद जरूरी होता है। कानपुर में यह घटना भी इसी तरह संवेदनशील मानी जा रही है।

    स्थानीय लोग डर के माहौल में जी रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी उकसावे वाली गतिविधि में शामिल होने वाले लोग कानून के तहत सख्त कार्रवाई का सामना करेंगे।थाना प्रभारी ने कहा, “हमने मौके पर अतिरिक्त टीम तैनात कर दी है। आरोपी की गिरफ्तारी जल्द ही होगी और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। हम चाहते हैं कि सभी समुदाय शांति बनाए रखें और कानून का पालन करें।”इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक और सामाजिक सह-अस्तित्व के लिए जागरूकता, प्रशासन की सक्रियता और संवाद कितना महत्वपूर्ण है। कानपुर प्रशासन की तत्परता और पुलिस की कार्रवाई से ही स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं।