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  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कुलदीप सिंह सेंगर को झटका

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कुलदीप सिंह सेंगर को झटका

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर रोक लगा दी है, जिससे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष में आए फैसले को फिलहाल लागू नहीं किया जा सकेगा। इस फैसले के साथ ही सेंगर को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है।

    हाई कोर्ट के फैसले पर रोक

    दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ दिनों पहले कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में ऐसा आदेश दिया था, जो उनके पक्ष में था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश की समीक्षा के लिए रोक (stay) लगा दी है। इस कदम का मतलब है कि हाई कोर्ट का फैसला तब तक लागू नहीं होगा जब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर अंतिम फैसला नहीं सुनाता।

    कानूनी प्रक्रिया जारी

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अवसर दिया है अपने तर्क पेश करने का, जिससे उच्च न्यायालय के आदेश और मामले की पूरी स्थिति की समीक्षा हो सके।

    पूर्व विधायक को झटका

    कुलदीप सिंह सेंगर के लिए यह निर्णय एक बड़ा झटका है, क्योंकि इससे उनके पक्ष में आए कानूनी लाभों को फिलहाल रोक दिया गया है। अब यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित रहेगा और आने वाले हफ्तों में इसके परिणाम पर पूरा ध्यान रहेगा।

  • ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय सियासत तेज होती नजर आ रही है। ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर “ठाकुरवादी सोच” को बढ़ावा देने और एक जाति विशेष को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि अब इस कथित जातिवादी रवैये के खिलाफ ब्राह्मण समाज भी खुलकर सामने आ गया है।

    समाजवादी पार्टी का कहना है कि अब तक दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय इस राजनीति के शिकार होते रहे हैं, लेकिन अब ब्राह्मण समाज की नाराजगी भाजपा के लिए नई चुनौती बन गई है। सपा नेताओं ने दावा किया कि ब्राह्मण समाज की यह नाराजगी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता से विदाई का कारण बनेगी।

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। सत्र के तीसरे दिन मंगलवार शाम कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर यह बैठक आयोजित हुई। इस बैठक को ‘सहभोज’ का नाम दिया गया था।

    इस सहभोज में पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। बैठक के बाद सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। विपक्ष ने इसे भाजपा के भीतर जातिगत संतुलन साधने की कवायद बताया है।

    सपा नेताओं का आरोप है कि भाजपा अब अंदरूनी असंतोष को दबाने के लिए इस तरह की बैठकें कर रही है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों से नाराज ब्राह्मण समाज अब सवाल उठाने लगा है और यही कारण है कि इस बैठक ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।

    हालांकि भाजपा की ओर से इस बैठक को सामान्य सामाजिक आयोजन बताया जा रहा है, लेकिन ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • एक ही लिफ्ट में दिखे केशव मौर्य और शिवपाल यादव, विधानसभा में सियासी चर्चा तेज

    एक ही लिफ्ट में दिखे केशव मौर्य और शिवपाल यादव, विधानसभा में सियासी चर्चा तेज

    केशव मौर्य और शिवपाल यादव एक लिफ्ट में नजर आने का मामला विधानसभा परिसर में चर्चा का विषय बन गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान उस समय सभी की नजरें ठहर गईं, जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव एक ही लिफ्ट से एकसाथ जाते हुए दिखाई दिए।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना विधानसभा भवन के भीतर की है। जैसे ही दोनों नेता लिफ्ट के पास पहुंचे, वहां मौजूद कुछ अन्य लोग भी लिफ्ट में चढ़ने लगे। इसी दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने हल्के-फुल्के अंदाज में वहां मौजूद लोगों से कहा, “तुम लोग बाहर आओ, मुझे शिवपाल जी के साथ जाने दो।” उनका यह बयान सुनते ही आसपास मौजूद लोग मुस्कुरा उठे और माहौल कुछ पल के लिए अनौपचारिक हो गया।

    केशव मौर्य और शिवपाल यादव एक लिफ्ट में दिखने का यह दृश्य देखते ही देखते राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। भाजपा और समाजवादी पार्टी के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को आमतौर पर अलग-अलग राजनीतिक खेमों में देखा जाता है, ऐसे में उनका इस तरह एकसाथ नजर आना कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।

    हालांकि, इस मुलाकात को लेकर किसी भी तरह की औपचारिक राजनीतिक बातचीत या संदेश की पुष्टि नहीं हुई है। इसे विधानसभा की सामान्य कार्यवाही के दौरान हुई एक सामान्य घटना बताया जा रहा है। फिर भी, नेताओं के बीच हुए इस संवाद और दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा सत्र के दौरान इस तरह के दृश्य अक्सर देखने को मिल जाते हैं, जहां अलग-अलग दलों के नेता औपचारिकता से इतर आपसी संवाद करते नजर आते हैं। लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस तरह की घटनाएं स्वतः ही सुर्खियों में आ जाती हैं।

    फिलहाल, दोनों नेताओं की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इतना तय है कि विधानसभा परिसर में हुआ यह छोटा सा दृश्य दिनभर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना रहा।

  • AhirRegiment : “120 बहादुर” से उठे राजनीतिक सवाल: अहीर रेजिमेंट और यूपी की बदलती सियासत

    AhirRegiment : “120 बहादुर” से उठे राजनीतिक सवाल: अहीर रेजिमेंट और यूपी की बदलती सियासत

    AhirRegiment : भारतीय सेना की बहादुरी पर आधारित फिल्म ‘120 बहादुर’ न सिर्फ देशभक्ति का संदेश दे रही है, बल्कि इसके साथ अहीर रेजिमेंट की लंबे समय से चल रही मांग को भी फिर एक बार चर्चा के केंद्र में ले आई है। फिल्म के रिलीज होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है, खासकर वहां जहाँ यादव समुदाय की बड़ी आबादी है।

    अहीर रेजिमेंट की मांग ने पकड़ी रफ्तार

    अहीर यानी यादव समुदाय का भारतीय सेना में योगदान इतिहास से दर्ज है, चाहे 1962 का रेजांग ला युद्ध हो या बाद के कई मोर्चे। लंबे समय से यादव समुदाय एक अलग “अहीर रेजिमेंट” की मांग करता रहा है।’120 बहादुर’ में दिखे साहस और शौर्य के दृश्यों ने इस मांग को नए सिरे से धार दी है।यूपी में बलिया, गोरखपुर, अयोध्या, जौनपुर, इटावा, मैनपुरी और कन्नौज जैसे जिलों में इस मुद्दे पर लगातार सभाएं, पोस्टर कैंपेन और सोशल मीडिया अभियान तेजी से बढ़े हैं।

    सियासी दलों की सक्रियता बढ़ी

    यूपी की राजनीति में यादव समुदाय का बड़ा प्रभाव रहा है। ऐसे में फिल्म के बाद अहीर रेजिमेंट की मांग पर सियासी दलों की नजरें टिक चुकी हैं।

    • सपा (समाजवादी पार्टी) इस मुद्दे को सक्रिय रूप से उठाती रही है और फिल्म के बाद इसे यादव वोटबैंक को जोड़ने का बड़ा अवसर मान रही है।
    • भाजपा भी इस पर बैलेंस बनाते हुए “सेना की नीति और संरचना राजनीतिक आधार पर नहीं बदलती” जैसे बयान दे रही है, लेकिन जमीन पर उसके स्थानीय नेता इस विषय पर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं।
    • कांग्रेस और क्षेत्रीय दल भी इसे “सामाजिक प्रतिनिधित्व” के नजरिए से देख रहे हैं।

    फिल्म से बदला माहौल, बढ़ रही बहस

    ‘120 बहादुर’ की सफलता के बाद सोशल मीडिया पर #AhirRegimentNow और #120Bahadur जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।
    वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी नई रेजिमेंट सेना की रणनीतिक आवश्यकता और ऐतिहासिक आधार पर बनती है, राजनीतिक मांगों पर नहीं।

    लेकिन राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में बड़ा मोड़ बन सकता है।

    अहीर समुदाय का साफ संदेश

    अहीर युवाओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मांग सिर्फ पहचान का सवाल नहीं, बल्कि सेना में योगदान के सम्मान की बात है।
    वे मानते हैं कि ‘120 बहादुर’ ने देशभर के युवाओं के मन में “अहीरों की ऐतिहासिक बहादुरी” का भाव फिर से जगा दिया है।

  • कानपुर देहात में जिला विकास समन्वय समिति की बैठक में हंगामा, सांसद और पूर्व सांसद में तीखी झड़प

    कानपुर देहात में जिला विकास समन्वय समिति की बैठक में हंगामा, सांसद और पूर्व सांसद में तीखी झड़प

    कानपुर देहात। जिला विकास समन्वय समिति की बैठक के दौरान रविवार को बड़ा हंगामा खड़ा हो गया, जब मौजूदा सांसद देवेंद्र सिंह भोले और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।बैठक में मौजूद अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी, तभी दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी शुरू हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस अधीक्षक और अपर पुलिस अधीक्षक को मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिकारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया।

    हंगामे के दौरान समिति के कई सदस्य और अफसरों ने दोनों नेताओं को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन विवाद बढ़ता गया। हालांकि बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप से बैठक को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराया गया।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं के बीच यह विवाद पुराने राजनीतिक मतभेदों को लेकर है, जो अब सार्वजनिक मंच पर फूट पड़ा। इस घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का माहौल है।जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और बैठक के बाद सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपने-अपने कार्यों में लौट गए हैं।

  • उत्तर प्रदेश ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने भारत बंद का विरोध किया, आरोप लगाया सियासी मकसद

    उत्तर प्रदेश ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने भारत बंद का विरोध किया, आरोप लगाया सियासी मकसद

    उत्तर प्रदेश। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने हाल ही में आयोजित भारत बंद का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि भारत बंद के पीछे कोई आम मुद्दा नहीं बल्कि सियासी मकसद छिपा हुआ है।

    जमात ने स्पष्ट किया कि धार्मिक और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है और किसी भी तरह के बंद या हिंसक प्रदर्शन से समाज को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने सरकार और जनता से अपील की कि वे इस तरह की सियासी चालों से प्रभावित न हों।

    ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रवक्ता ने कहा कि भारत बंद का विरोध लोकतांत्रिक अधिकार के तहत किया गया है और संगठन हमेशा शांतिपूर्ण विरोध में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समूह को किसी भी तरह का हिंसक प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जमात के प्रतिनिधियों ने बैठकें आयोजित कर लोगों को भारत बंद से दूर रहने और कानून का पालन करने का संदेश दिया।यह घटनाक्रम राज्य और देश में राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • Raja Bhai Vs Bhanavi Singh: राजा भैया पर पत्नी भानवी सिंह का बड़ा आरोप, PMO में की शिकायत

    Raja Bhai Vs Bhanavi Singh: राजा भैया पर पत्नी भानवी सिंह का बड़ा आरोप, PMO में की शिकायत

    लखनऊ – Raja Bhai Vs Bhanavi Singh: उत्तर प्रदेश के राजनीति जगत में एक नया विवाद सामने आया है। राजा भैया रघुराज प्रताप सिंह के खिलाफ उनकी पत्नी भानवी सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दर्ज कराई है। भानवी सिंह का आरोप है कि राजा भैया के पास अवैध और प्रतिबंधित हथियारों का जखीरा मौजूद है।

    शिकायत में यह भी कहा गया कि इनमें सामूहिक विनाश यानी मास डिस्ट्रक्शन से जुड़े विदेशी हथियार भी शामिल हैं। भानवी सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि राजा भैया के पास ऐसे हथियारों की मौजूदगी न केवल कानून के विरुद्ध है, बल्कि राज्य और देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

    राजा भैया उत्तर प्रदेश के एक प्रभावशाली और विवादास्पद नेता माने जाते हैं। उनके राजनीतिक करियर में कई बार विवाद और कानूनी मामलों की वजह से सुर्खियां रही हैं। इस नए आरोप ने उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन दोनों में हलचल पैदा कर दी है।

    पीएमओ द्वारा इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जांच की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस मामले में स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय करके जांच कर सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले में राजा भैया के खिलाफ यदि साक्ष्य मिले तो यह उनके राजनीतिक करियर पर बड़ा असर डाल सकता है। वहीं, इस विवाद के बीच जनता और मीडिया की नजरें लगातार इस मामले पर टिकी हुई हैं।

    यह घटना उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और सुरक्षा दोनों ही मोर्चों पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप, मोहल्ला बना ‘खुला सीवर’

    बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप, मोहल्ला बना ‘खुला सीवर’

    फरीदपुर, बरेली: जब जनता पानी में डूबी हो और जनप्रतिनिधि सत्ता के मद में डूबे हों, तब लोकतंत्र की नालियां नहीं, नीयतें चोक हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के फरीदपुर नगर पालिका क्षेत्र से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।

    आरोप — नाले की दिशा बदल दी गई बरेली: नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका अध्यक्ष शराफत जरीवाला पर सार्वजनिक नाले पर अवैध कब्जा और निर्माण कार्य कराने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। आरोप यह भी है कि कब्जा इतना ठोस है कि नाले की दिशा ही गुम हो गई और बारिश होते ही पूरा मोहल्ला एक खुले सीवर में तब्दील हो जाता है।

    लोगों का आक्रोश सड़कों और सोशल मीडिया पर बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    निवासियों का कहना है —

    • “पहले 2 घंटे में पानी निकल जाता था, अब 2 दिन तक कीचड़ और सड़ांध में जीना पड़ता है।”
    • “यह सामान्य अतिक्रमण नहीं, जनता के हितों का खुला अपमान है।”

    प्रशासन हरकत में आया बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एसडीएम फरीदपुर मालिका नैन ने नायब तहसीलदार अजय सिंह के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर मौके पर भेजा।

    • नायब तहसीलदार ने कहा — “नाले पर अवैध कब्जे की शिकायत की जांच की जा रही है, पैमाइश के बाद रिपोर्ट तैयार होगी और उसी के आधार पर कार्रवाई होगी।”
    • एसडीएम ने स्पष्ट किया कि यदि अतिक्रमण साबित हुआ तो निर्माण ध्वस्त किया जाएगा और आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सकता है।

    चुप्पी ने बढ़ाया विवाद बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    गंभीर आरोपों के बावजूद अध्यक्ष शराफत जरीवाला की चुप्पी ने लोगों के गुस्से में आग में घी डालने का काम किया है।

    बड़े सवाल

    • क्या इस बार जिला प्रशासन दबाव में आएगा या निष्पक्ष कार्रवाई करेगा?
    • क्या नाले पर बनी दीवार गिरेगी या भरोसे की नींव यूं ही ढहती रहेगी?