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  • अयोध्या में नॉनवेज पर पूर्ण प्रतिबंध, प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए

    अयोध्या में नॉनवेज पर पूर्ण प्रतिबंध, प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए

    अयोध्या। राम नगरी अयोध्या की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। 8 जनवरी से शहर में पूरी तरह से नॉनवेज की बिक्री पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

    नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई

    अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि होटल, ढाबा और होम-स्टे सहित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर यह नियम लागू होगा। किसी भी स्थान पर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    ऑनलाइन डिलीवरी पर भी रोक

    शहर में नॉनवेज खाने की ऑनलाइन डिलीवरी पर भी रोक लगा दी गई है। इसका मतलब है कि अब अयोध्या में कोई भी व्यक्ति नॉनवेज भोजन ऑर्डर या खरीद नहीं सकता

    प्रशासन का उद्देश्य

    अयोध्या प्रशासन का कहना है कि यह कदम धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों ने सभी व्यवसायियों और नागरिकों से नियमों का पालन करने की अपील की है।

  • कानपुर जलकल विभाग में ट्रांसफर के बाद भी अफसर कुर्सी से चिपके: “रवानगी” पर सिफारिश की दीवार!

    कानपुर जलकल विभाग में ट्रांसफर के बाद भी अफसर कुर्सी से चिपके: “रवानगी” पर सिफारिश की दीवार!

    कानपुर। जलकल विभाग में ट्रांसफर तो हो चुका है, लेकिन रवानगी (Relieving) का आदेश मानो किसी वीआईपी काउंटर पर अटक गया हो। दो अफसरों का तबादला जारी होने के बावजूद वे अब तक अपनी कुर्सी पर डटे हैं। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि इनके “ऊँचे संपर्क” और “सिफारिश” ने रवानगी को रोक रखा है।विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि अफसरों की कुर्सी से ऐसी मोहब्बत है कि फाइलें जाम पड़ी हैं, काम रुका है, ठेकेदार परेशान हैं—पर साहब अभी भी उसी रौब में बैठते हैं, जैसे विभाग उनकी निजी जागीर हो।

    ठेकेदारों की चुभती शिकायतें

    विभाग के ठेकेदार बताते हैं कि एक अधिकारी से काम की बात करने जाइए तो वे योग्यता नहीं, पहले जाति पूछते हैं। आरोप यह भी है कि उनका एक “मौन-सहयोगी” हर गड़बड़ी में शामिल रहता हैकाम सब देखता है, लेकिन दिखाई कहीं नहीं देता।

    सवालों के घेरे में सिस्टम

    अब बड़ा सवाल यह है कि जब ट्रांसफर आदेश जारी है, तो रवानगी रोकी क्यों गई?क्या विभाग में नियम नहीं, “पहुँच” चलती है?क्या शहर की जलापूर्ति व्यवस्था ऐसे अफसरों के भरोसे है, जिनकी रवानगी सिफारिश पर निर्भर है?

    जलकल विभाग पर उठ रहे सवाल

    कानपुर की जनता पूछ रही है“ट्रांसफर हो गया, अब तबादला अमल में कौन करवाएगा?”विभागीय सूत्रों का कहना है कि फाइलें चल रही हैं, लेकिन वहां अटकी हैं जहां “सिस्टम और सिफारिश” की दोस्ती सबसे मजबूत होती है। आने वाले दिनों में साफ होगा कि जलकल विभाग के ये अफसर कुर्सी छोड़ेंगे या सिस्टम का मज़ाक बनाते रहेंगे।

  • कानपुर देहात को मिला नया जिलाधिकारी ,कपिल सिंह की तैनाती, आलोक सिंह का तबादला लखनऊ

    कानपुर देहात को मिला नया जिलाधिकारी ,कपिल सिंह की तैनाती, आलोक सिंह का तबादला लखनऊ

    कानपुर देहात -उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कानपुर देहात जिले को नया जिलाधिकारी (DM) दिया है। कपिल सिंह को कानपुर देहात का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि वर्तमान डीएम आलोक सिंह का स्थानांतरण लखनऊ कर दिया गया है।

    प्रशासनिक बदलाव का फैसला कानपुर देहात को मिला नया जिलाधिकारी

    राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, आलोक सिंह को अब राज्य संपत्ति अधिकारी (Estate Officer) के पद पर लखनऊ में तैनात किया गया है। वहीं, कपिल सिंह, जिनके पास प्रशासनिक सेवा का अच्छा अनुभव है, अब कानपुर देहात जिले की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    कौन हैं कपिल सिंह? कानपुर देहात को मिला नया जिलाधिकारी

    कपिल सिंह एक ईमानदार और दक्ष आईएएस अधिकारी माने जाते हैं। इससे पहले वह विभिन्न जिलों में ADM और CDO जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं।
    उनसे कानपुर देहात में बेहतर प्रशासन और विकास कार्यों को गति देने की अपेक्षा की जा रही है।

    पदअधिकारीनई तैनाती
    जिलाधिकारी, कानपुर देहातकपिल सिंहनए DM नियुक्त
    पूर्व जिलाधिकारीआलोक सिंहलखनऊ स्थानांतरित – राज्य संपत्ति अधिकारी

    🧵 प्रशासनिक फेरबदल की मुख्य बातें: कानपुर देहात को मिला नया जिलाधिकारी

    • यह तबादला नीति के तहत किया गया रूटीन शिफ्ट है।
    • लोकसभा चुनाव 2024 के बाद लगातार जिला प्रशासन में नए सिरे से टीम जमाई जा रही है।
    • कानपुर देहात में कानून व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण, किसानों से संवाद, और शासन योजनाओं की मॉनिटरिंग अब नए डीएम की प्राथमिकता होगी।
  • संपूर्ण समाधान दिवस में दिखा प्रशासनिक संवेदनहीनता का चेहरा,पीड़िता ने टेबल पर पटका सिर पढ़िये क्या वजह

    संपूर्ण समाधान दिवस में दिखा प्रशासनिक संवेदनहीनता का चेहरा,पीड़िता ने टेबल पर पटका सिर पढ़िये क्या वजह

    फरीदपुर (बरेली): राज्य सरकार द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु शुरू की गई संपूर्ण समाधान दिवस की सार्थकता उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई जब तहसील फरीदपुर में आयोजित कार्यक्रम में एक पीड़िता को अपनी बात तक कहने का मौका नहीं दिया गया, और उसने निराशा में टेबल पर सिर पटक दिया

    मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) देवयानी की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस में करीब 200 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें अधिकतर मामले राजस्व, ब्लॉक, पूर्ति विभाग और पुलिस से संबंधित थे। मात्र 10 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया।लेकिन व्यवस्था पर असली सवाल उस वक्त खड़ा हुआ जब शिकायतकर्ता पुष्पा (पुत्री भजनलाल) अपनी शिकायत लेकर मंच पर पहुंचीं। जैसे ही पुष्पा ने अधिकारियों के सामने कदम रखा, वहां मौजूद कोतवाल राधेश्याम, एसडीएम मल्लिका नयन, तहसीलदार सुरभि राय और संबंधित लेखपाल एक स्वर में अपनी सफाई देने लगे, मानो वे पहले से जानते हों कि सवाल क्या आने वाला है।

    इस बीच, पीड़िता को मुख्य विकास अधिकारी के सामने अपनी बात रखने तक नहीं दिया गया, जिससे आहत और असहाय होकर उसने सार्वजनिक रूप से टेबल पर सिर पटक दिया। इस दृश्य को देखकर अधिकारियों के साथ-साथ ग्रामीण भी स्तब्ध रह गए।ग्रामीणों ने स्पष्ट तौर पर कहा —“जब अफसर ही जवाबदेही से भागते नजर आएं और पीड़ित को बोलने तक न दिया जाए, तो ऐसे आयोजन ‘समाधान’ नहीं बल्कि ‘दबाव और डर’ के मंच बन जाते हैं।”

    इस घटना ने यह साबित कर दिया कि संपूर्ण समाधान दिवस, यदि सही भावना और पारदर्शिता से न चलाया जाए, तो यह राजनीतिक औपचारिकता और प्रशासनिक दिखावा भर बनकर रह जाता है।यदि पीड़ितों की आवाज को दबाया जाएगा और अधिकारी खुद कठघरे में खड़े न होकर दबंगों की भाषा बोलने लगेंगे, तो जनता का प्रशासन और न्याय प्रणाली से भरोसा उठना तय है।

    राज्य सरकार को चाहिए कि ऐसे जनसुनवाई कार्यक्रमों की न सिर्फ मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे, बल्कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करे। वरना “समाधान दिवस” जल्द ही जनता के लिए “समस्या दिवस” बन सकता है।