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  • Ayodhya News: “गौ सेवा ही ईश्वर सेवा है” महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने ‘गोदान’ फिल्म को दिया आशीर्वाद

    Ayodhya News: “गौ सेवा ही ईश्वर सेवा है” महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने ‘गोदान’ फिल्म को दिया आशीर्वाद

    Ayodhya News: अयोध्या | गौ माता के महत्व और सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जा रही फिल्म ‘गोदान’ को आध्यात्मिक समर्थन मिला है। फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक विनोद कुमार चौधरी को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के प्रमुख पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक विनोद कुमार चौधरी आज अयोध्या स्थित मणिरामदास की छावनी पहुंचे, जहां उन्होंने पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान महाराज जी ने गौ सेवा को ईश्वर सेवा बताते हुए फिल्म की सराहना की और इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    “गौ सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है” — महंत नृत्य गोपाल दास जी

    पूज्य महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा,“गौ सेवा ही ईश्वर सेवा है। गौ माता पर आधारित यह फिल्म समाज को सही दिशा देने का कार्य करेगी। मेरी शुभकामनाएं और आशीर्वाद ‘गोदान’ फिल्म के साथ हैं। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि यह फिल्म सफलता की ओर अग्रसर हो।”उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गौ माता के संरक्षण और उनके महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे में इस विषय पर फिल्म बनाना एक सराहनीय एवं पुण्य कार्य है।

    निर्माता विनोद कुमार चौधरी के प्रयासों की प्रशंसा

    महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने निर्माता एवं निर्देशक विनोद कुमार चौधरी की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि गौ माता पर आधारित फिल्म बनाकर उन्होंने समाज के सामने एक सकारात्मक संदेश रखने का प्रयास किया है। यह फिल्म न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक चेतना के स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    ‘गोदान’ फिल्म से जुड़ी उम्मीदें

    फिल्म ‘गोदान’ को लेकर यह माना जा रहा है कि यह गौ माता के प्रति श्रद्धा, सेवा और संरक्षण के भाव को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी। संत समाज के समर्थन से फिल्म को आध्यात्मिक मजबूती मिली है, जिससे दर्शकों में इसके प्रति उत्सुकता और विश्वास दोनों बढ़े हैं।

  • मणिकर्णिका घाट विवाद: सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस का 72 घंटे का अल्टीमेटम

    मणिकर्णिका घाट विवाद: सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस का 72 घंटे का अल्टीमेटम

    वाराणसी: काशी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मणिकर्णिका घाट को लेकर फैले विवाद ने अब सियासी रूप ले लिया है। घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने की अफवाह और कथित फेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता पप्पू यादव समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों को 72 घंटे के भीतर बयान दर्ज कराने का नोटिस जारी किया है। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि तय समय सीमा में बयान दर्ज नहीं कराया गया, तो आगे की कानूनी कार्रवाई और सख्त की जा सकती है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था कथित वीडियो

    दरअसल, मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को लेकर कुछ वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि घाट पर प्राचीन मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है। इन वीडियो के सामने आने के बाद धार्मिक भावनाएं भड़कने लगीं और माहौल तनावपूर्ण हो गया।जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि वायरल वीडियो भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। पुलिस के अनुसार, इन वीडियो का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना और जनता को गुमराह करना था।

    नेताओं की भूमिका की हो रही जांच

    पुलिस का कहना है कि जांच में यह सामने आया है कि कुछ राजनीतिक नेताओं ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए सोशल मीडिया पर इन वीडियो और दावों को साझा किया, जिससे अफवाहों को और बल मिला। इसी आधार पर आईटी एक्ट और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या बड़ा राजनीतिक चेहरा। अफवाह फैलाने और धार्मिक भावनाएं भड़काने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।

    प्रशासन ने की शांति बनाए रखने की अपील

    इस पूरे मामले के बीच जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या वीडियो पर विश्वास न करें और अफवाहों से दूर रहें। प्रशासन का कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर हो रहा कार्य पूरी तरह नियमों और परंपराओं के अनुरूप है।पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मणिकर्णिका घाट विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी और राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।

  • महाराजगंज में BJP जिलामंत्री का नोटों के बंडल संग वीडियो वायरल, तंत्र-मंत्र बताकर दी सफाई

    महाराजगंज में BJP जिलामंत्री का नोटों के बंडल संग वीडियो वायरल, तंत्र-मंत्र बताकर दी सफाई

    उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलामंत्री गौतम तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में गौतम तिवारी नोटों के बंडल के साथ नजर आ रहे हैं, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। वीडियो सामने आते ही विपक्ष ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है, वहीं पार्टी के भीतर भी इस मामले को लेकर असहजता देखी जा रही है।

    सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    वायरल वीडियो में कथित तौर पर भाजपा जिलामंत्री के सामने बड़ी मात्रा में नकदी दिखाई दे रही है। वीडियो के सामने आते ही यह फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर तेजी से फैल गया। लोग वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे पैसों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे साजिश बता रहे हैं।

    नेता ने दी अजीबोगरीब सफाई

    वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा जिलामंत्री गौतम तिवारी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक चौंकाने वाली सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला जादू-टोना और तंत्र-मंत्र से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, कुछ तंत्र-मंत्र करने वाले लोगों ने उन्हें साजिश के तहत जाल में फंसाया है और यह वीडियो उसी साजिश का हिस्सा है।

    गौतम तिवारी का कहना है कि वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और इसका उद्देश्य उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वे जल्द ही सच्चाई सामने लाएंगे।

    विपक्ष का हमला तेज

    इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन उनके ही नेता नोटों के बंडल के साथ वीडियो में नजर आ रहे हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और सवाल उठाया है कि अगर नेता निर्दोष हैं, तो वीडियो में नकदी कहां से आई।

    पार्टी की बढ़ी मुश्किलें

    वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा संगठन की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। फिलहाल पार्टी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने चर्चा तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह मामला आगामी चुनावों में पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

    जांच की मांग

    स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है।

    कुल मिलाकर, महाराजगंज में भाजपा जिलामंत्री गौतम तिवारी का नोटों के बंडल के साथ वायरल वीडियो अब सिर्फ एक सोशल मीडिया विवाद नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जिस पर आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

  • Prateek Aparna Divorce: प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव से तलाक का किया ऐलान, इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा हड़कंप

    Prateek Aparna Divorce: प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव से तलाक का किया ऐलान, इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा हड़कंप

    Prateek Aparna Divorce: सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा यादव से तलाक लेने का फैसला किया है। इस फैसले की जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा कर दी, जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। प्रतीक यादव के इस बयान से राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही हलकों में हलचल मच गई है।

    प्रतीक यादव ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि वह जल्द से जल्द इस “स्वार्थी महिला” से तलाक लेने जा रहे हैं। पोस्ट में प्रतीक ने आरोप लगाया कि अपर्णा यादव ने उनके पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया और उनकी मानसिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी का एकमात्र लक्ष्य केवल मशहूर और प्रभावशाली बनना है, जबकि उनके मानसिक हालात की उन्हें कोई परवाह नहीं है।

    प्रतीक यादव ने अपने पोस्ट में भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि उन्होंने कभी ऐसी “बुरी आत्मा” नहीं देखी और यह उनका दुर्भाग्य था कि उन्होंने उनसे शादी की। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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    गौरतलब है कि अपर्णा यादव और प्रतीक यादव की शादी साल 2012 में हुई थी। इससे पहले दोनों की सगाई 2011 में हुई थी। यह शादी उत्तर प्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल शादियों में गिनी जाती है। शादी समारोह में बॉलीवुड और राजनीति की कई नामचीन हस्तियां शामिल हुई थीं, जिनमें अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और उद्योगपति अनिल अंबानी जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की पहली मुलाकात साल 2001 में एक बर्थडे पार्टी के दौरान हुई थी। बताया जाता है कि प्रतीक ने उसी दौरान अपर्णा की ईमेल आईडी ली थी और वहीं से दोनों के बीच बातचीत और फिर रिश्ता शुरू हुआ। लगभग 10 साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया था।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर अपर्णा यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, प्रतीक यादव का यह पोस्ट राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • अमेठी:  खिचड़ी भोज व कंबल वितरण, सती महारानी ट्रस्ट का सेवा संगम के द्वारा कराया गया

    अमेठी: खिचड़ी भोज व कंबल वितरण, सती महारानी ट्रस्ट का सेवा संगम के द्वारा कराया गया

    संवाददाता नितेश तिवारी अमेठी के स्वामी परमहंस आश्रम, अमेयमाफी की पावन धरती पर मानवता, करुणा और निःस्वार्थ सेवा का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। सती महारानी जन कल्याण ट्रस्ट एवं परमार्थ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अमेठी खिचड़ी भोज कंबल वितरण कार्यक्रम ने समाज के जरूरतमंद वर्ग के चेहरों पर मुस्कान ला दी।

    इस सेवा आयोजन में बड़ी संख्या में असहाय, वृद्ध और जरूरतमंद लोगों को खिचड़ी भोज कराया गया तथा ठंड से राहत देने के उद्देश्य से कंबलों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रकाश जी (विभाग प्रचारक) और श्री पवन जी (जिला प्रचारक) उपस्थित रहे। आयोजन का नेतृत्व सती महारानी जन कल्याण ट्रस्ट की अध्यक्ष बहुरानी शाम्भवी सिंह एवं पूर्व विधायक महारानी गरिमा सिंह के सुपुत्र युवराज श्री अनंत विक्रम सिंह ने किया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बहुरानी शाम्भवी सिंह ने कहा कि सेवा किसी पहचान या पद की मोहताज नहीं होती। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत और सम्मान नहीं पहुंचता, तब तक सेवा का उद्देश्य अधूरा रहता है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का लक्ष्य पीड़ा और अभाव से जूझ रहे लोगों के लिए निरंतर सेवा कार्य करना है।

    वहीं युवराज अनंत विक्रम सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा सेवा, त्याग और समर्पण में निहित है। खिचड़ी भोज और कंबल वितरण जैसे कार्यक्रम समाज में अपनत्व, समरसता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करते हैं। जब समाज एकजुट होकर जरूरतमंदों का सहारा बनता है, तभी सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।

    कार्यक्रम में पूर्व मंडल अध्यक्ष अमेठी त्रियुगी नारायण शुक्ल, भेटुवा मंडल अध्यक्ष निमिषा त्रिपाठी, सहित अनेक समाजसेवी और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाई और आयोजन की सराहना की।

    ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को कंबल मिलने से उन्हें न केवल शारीरिक राहत मिली, बल्कि समाज से जुड़ाव और सम्मान की अनुभूति भी हुई। आयोजन के अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी कार्यक्रम जारी रखने का संकल्प दोहराया।

  • कानपुर मेयर ने CM का सिर झुकाकर किया स्वागत, कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी में पूर्व राष्ट्रपति भी पहुंचे

    कानपुर मेयर ने CM का सिर झुकाकर किया स्वागत, कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी में पूर्व राष्ट्रपति भी पहुंचे

    कानपुर में एक अनोखा और हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम देखने को मिला जब कानपुर मेयर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सिर झुकाकर स्वागत किया। यह दृश्य शहर में चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में मौजूद कई विधायकों ने भी आशीर्वाद लिया और राज्य सरकार के नेतृत्व में सम्मान और सम्मानजनक व्यवहार की झलक दिखाई।

    मेयर और CM के बीच सम्मानपूर्वक स्वागत

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन पर कानपुर मेयर ने अपने सिर को झुका कर उन्हें आदरपूर्वक स्वागत किया। इस स्वागत ने राजनीतिक शिष्टाचार और स्थानीय प्रशासन के सम्मान की मिसाल पेश की। इस अवसर पर उपस्थित अन्य अधिकारी और विधायक भी मुख्यमंत्री के साथ मिले और उनका आशीर्वाद लिया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक प्रतिष्ठान और स्थानीय प्रशासन के बीच सम्मान और तालमेल कितना महत्वपूर्ण है।

    कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी में हाई-प्रोफाइल शिरकत

    इसी कार्यक्रम के दौरान कानपुर के एक कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी का आयोजन भी हुआ, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति ने भी शिरकत की। पूर्व राष्ट्रपति की मौजूदगी ने समारोह का महत्व और बढ़ा दिया। यह शादी न केवल राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि स्थानीय मीडिया और जनता का ध्यान भी आकर्षित किया। शादी समारोह में राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की भी भागीदारी देखने को मिली।

    राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की भागीदारी

    शादी और मुख्यमंत्री के स्वागत कार्यक्रम में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक हस्तियों ने भाग लिया। विधायकों ने भी आशीर्वाद दिया और कार्यक्रम के दौरान अपने संदेश साझा किए। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक और सामाजिक मेलजोल से ही किसी बड़े आयोजन का महत्व और बढ़ता है।

    कानपुर में कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण

    कानपुर में आयोजित इस समारोह और स्वागत कार्यक्रम का आयोजन शहर के प्रमुख स्थल पर किया गया। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान समारोह स्थल और आसपास की सड़कें नियंत्रित रूट और सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखी गई थीं। मुख्यमंत्री के स्वागत और शादी समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने आयोजनों का आनंद लिया और इसका पूरा लाभ उठाया।

    इस प्रकार यह आयोजन कानपुर मेयर के नेतृत्व में CM के स्वागत और कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी दोनों ही दृष्टियों से हाई-प्रोफाइल और महत्वपूर्ण रहा। इसने न केवल प्रशासन और राजनीतिक शिष्टाचार को उजागर किया, बल्कि स्थानीय नागरिकों और मीडिया के लिए भी एक आकर्षक घटना का रूप लिया।

    कुल मिलाकर, कानपुर में यह कार्यक्रम राजनीतिक सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक खुशी का अद्भुत मिश्रण साबित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वागत और पूर्व राष्ट्रपति की शिरकत ने इसे और भी यादगार बना दिया।

  • हमीरपुर में 40 साल बाद बेटी का जन्म, DJ और 12 स्कॉर्पियो के साथ जश्न

    हमीरपुर में 40 साल बाद बेटी का जन्म, DJ और 12 स्कॉर्पियो के साथ जश्न

    संवाददाता प्रवीण कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने बुंदेलखंड की पारंपरिक सामाजिक सोच को नई दिशा देने का काम किया है। आमतौर पर इस क्षेत्र में आज भी बेटा-बेटी के बीच भेदभाव देखने को मिलता है, लेकिन मौदहा कस्बे के फत्तेपुर मोहल्ले में 40 साल बाद बेटी के जन्म पर जिस तरह खुशियां मनाई गईं, उसने समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।

    फत्तेपुर निवासी अंजुम परवेज उर्फ राजू और उनकी पत्नी निकहत फातिमा के घर नवजात बेटी के जन्म के बाद पूरा परिवार जश्न में डूब गया। बेटी को अस्पताल से घर लाने के लिए डीजे, ढोल-नगाड़ों और 12 स्कॉर्पियो गाड़ियों का काफिला निकाला गया। परिवार के सदस्य और मोहल्ले के लोग नाचते-गाते नवजात को घर लेकर पहुंचे। इस दृश्य ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    बुंदेलखंड क्षेत्र खेती और मजदूरी पर निर्भर है और यहां लंबे समय से बेटे को वंश का सहारा मानने की सोच हावी रही है। ऐसे माहौल में बेटी के जन्म पर इस तरह का सार्वजनिक उत्सव सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है। यह आयोजन साफ तौर पर बताता है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए खुशियों की वजह होती हैं।

    बेटी के पिता अंजुम परवेज उर्फ राजू ने भावुक होते हुए कहा,“बेटियां अल्लाह की रहमत होती हैं। हमारे परिवार में लंबे समय से कोई संतान नहीं थी। अल्लाह ने 40 साल बाद हमें बेटी से नवाजा है, इसलिए खुशियां मनाना तो बनता है।

    इस मामले पर डॉक्टर अंशु मिश्रा ने बताया कि बीते तीन वर्षों में हमीरपुर जिले में यह पहला मामला है, जब बेटी के जन्म पर इस तरह सार्वजनिक रूप से भव्य जश्न मनाया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल समाज की सोच बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है और अन्य परिवारों को भी प्रेरित कर सकती है।

    बेटी के जन्म पर मनाई गई यह खुशी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक संदेश है। यह घटना साबित करती है कि सामाजिक सोच धीरे-धीरे बदल रही है और बेटियों को समान सम्मान देने की दिशा में समाज आगे बढ़ रहा है।

  • MaghMelaControversy: अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने पर बवाल, शंकराचार्य नाराज़

    MaghMelaControversy: अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने पर बवाल, शंकराचार्य नाराज़

    MaghMelaControversy : प्रयागराज माघ मेला विवाद उस समय गहराता चला गया जब ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम क्षेत्र में रोके जाने को लेकर संत समाज और प्रशासन आमने-सामने आ गया। घटना के बाद माघ मेले के प्रशासनिक इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।मिली जानकारी के अनुसार, माघ मेला क्षेत्र में प्रवेश और गतिविधियों को लेकर बनाए गए नियमों के तहत जब अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों को रोका गया

    तो मामला तेजी से तूल पकड़ गया। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद बड़े अधिकारियों द्वारा संतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें मारा-पीटा गया। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को यह सब “ऊपर से मिले आदेश” के तहत करना पड़ा होगा।

    इस घटना के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बेहद नाराज़ हो गए और अपने शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति संभालने की पूरी कोशिश की। अधिकारियों ने हाथ जोड़कर समझाने का प्रयास किया, लेकिन शंकराचार्य किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

    करीब दो घंटे तक माघ मेला क्षेत्र में गहमा-गहमी और तनाव का माहौल बना रहा। संत समाज के लोग एकत्र होते चले गए और प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताने लगे। इस दौरान किसी बड़े टकराव से बचने के लिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे रहे।

    शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि संतों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और यदि साधु-संतों के साथ इस तरह का व्यवहार होता रहा, तो वे इसका खुलकर विरोध करेंगे। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संत समाज के सम्मान से जोड़ते हुए गंभीर मुद्दा बताया।

    घटना के बाद माघ मेला प्रशासन की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और वरिष्ठ स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। स्थानीय प्रशासन यह भी दावा कर रहा है कि मेला क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।फिलहाल, प्रयागराज माघ मेला विवाद ने प्रशासन और संत समाज के बीच तालमेल को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई या स्पष्टीकरण दिया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने विपक्षी दलों, खासतौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि काशी में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्य कांग्रेस को पसंद नहीं आ रहे हैं, इसलिए वह लगातार भ्रामक और झूठे प्रचार के जरिए देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

    सीएम योगी ने यह बातें वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर काशी को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी आज विकास की एक नई गाथा लिख रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। इन परियोजनाओं से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

    सीएम योगी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके निर्माण के समय कुछ लोगों ने खंडित प्रतिमाओं को दिखाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि उस समय भी कांग्रेस और उसके समर्थकों ने झूठा प्रचार किया, लेकिन आज सच्चाई सबके सामने है। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 10 से 15 हजार तक सीमित थी।

    मुख्यमंत्री ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण और विकास कार्यों को लेकर भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि घाट के विकास को लेकर अनर्गल बयानबाजी की जा रही है, जबकि काशी की जनता भली-भांति जानती है कि सरकार विकास और विरासत दोनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक परंपरा से छेड़छाड़ नहीं की जा रही है।

    सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग भ्रामक जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार अपने विकास एजेंडे से पीछे हटने वाली नहीं है।

    वहीं मुख्यमंत्री योगी के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि क्या ये बातें काशी के घाट पर जाकर काशीवासियों की आंखों में आंखें डालकर कही जा सकती हैं। उन्होंने इसे सवाल नहीं, बल्कि चुनौती बताया।

    कुल मिलाकर, वाराणसी में चल रहे विकास कार्यों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। जहां सरकार इसे विकास और विरासत का संतुलन बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।

  • बांदा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बड़े बयान, हिंदुत्व, शिक्षा और जनसंख्या पर खुलकर बोले

    बांदा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बड़े बयान, हिंदुत्व, शिक्षा और जनसंख्या पर खुलकर बोले

    रिपोर्ट-मोहित पाल हनुमत कथा करने बांदा पहुंचे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर कई बड़े और चर्चित बयान दिए। उनके बयानों को लेकर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं के साथ-साथ सियासी और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

    हरिद्वार की हर की पौड़ी में मुसलमानों की एंट्री बैन की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनके अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है। उन्होंने कहा कि जब हिंदू काबा नहीं जाते, तो फिर उन लोगों को हिंदू धार्मिक स्थलों पर जाने की आवश्यकता क्यों है, जिन्हें हिंदुत्व से परहेज है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई मुसलमान श्रद्धा के साथ उनकी कथा में आता है तो उसका स्वागत है, लेकिन यदि आपत्ति है तो घर पर रहकर टीवी के माध्यम से प्रवचन सुनना भी एक विकल्प है।

    अपने चर्चित “वेद नहीं पढ़ोगे तो नावेद और जावेद बनोगे” वाले बयान पर सफाई देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह बयान विशेष रूप से सनातन समाज के लिए था। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य हिंदू समाज के लोगों को वेद पढ़ने और पढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस बयान से आपत्ति है, तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

    गुरुकुलम शिक्षा पद्धति को लेकर उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सबसे पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था पर हमला किया। उनका कहना था कि पहले बच्चों को ‘ग से गणेश’ पढ़ाया जाता था, जिसे सांप्रदायिक कहा गया और अब ‘ग से गधा’ पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुकुलम पद्धति का विरोध करने वालों ने ही देश को नुकसान पहुंचाया है।

    जनसंख्या के मुद्दे पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज से अपनी जनसंख्या बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि जल, जंगल, जमीन और परिवार को सुरक्षित रखना है तो हिंदुओं को अपनी संख्या बढ़ानी होगी।इस दौरान उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के बागेश्वर धाम में 2027 तक कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बागेश्वर धाम आएंगे।