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  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी दौरे पर, मॉरीशस के पीएम संग करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी दौरे पर, मॉरीशस के पीएम संग करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

    वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी दौरे पर हैं। इस दौरे के दौरान उनके कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक है। दोनों नेताओं की इस मुलाकात का उद्देश्य व्यापार, निवेश, संस्कृति, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करना है।

    प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में शहर की प्रमुख विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी करेंगे। इसके तहत सड़क सुधार, जल प्रबंधन और शहर की ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण से जुड़े कार्यों का जायजा लिया जाएगा। वाराणसी का यह दौरा न केवल स्थानीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दोस्ताना संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा।

    मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ बैठक में विशेष रूप से व्यापारिक साझेदारी, निवेश आकर्षण और पर्यटन सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। दोनों देश अपने आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी और मॉरीशस के पीएम के बीच होने वाली बातचीत में डिजिटल अर्थव्यवस्था, शिक्षा और युवा परियोजनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही वाराणसी में स्थानीय समुदाय के विकास और रोजगार सृजन से जुड़ी पहल पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

    इस दौरे से वाराणसी और मॉरीशस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी। साथ ही यह भारत और मॉरीशस के मित्रवत संबंधों और आपसी सहयोग का प्रतीक भी माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के वाराणसी दौरे से न केवल शहर में विकास की गति बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की दोस्ताना छवि को भी बल मिलेगा।

  • औरैया – बिधूना लापता छात्राएं इटावा से सुरक्षित बरामद

    औरैया – बिधूना लापता छात्राएं इटावा से सुरक्षित बरामद

    रिपोर्टर: अमित शर्मा औरैया के बिधूना थाना क्षेत्र से बुधवार को तीन छात्राओं के अचानक लापता होने से सनसनी फैल गई। तीनों छात्राएं सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन न तो स्कूल पहुंचीं और न ही घर लौटीं। परिजनों की सूचना पर पुलिस हरकत में आई और देर रात उन्हें इटावा से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

    कैसे लापता हुईं छात्राएं?

    सीसीटीवी फुटेज में छात्राएं चौराहे पर पेट्रोल पंप के पास एक ई-रिक्शा में बैठकर दुर्गा मंदिर की ओर जाती दिखीं।

    • अनुष्का: भाई के साथ स्कूल जा रही थी, लेकिन रास्ते में साइकिल पंचर होने के बाद ऑटो से चौराहे पर पहुंची।
    • पायल और शिव्या: भरथना रोड की ओर से चौराहे पर आईं और वहीं से ई-रिक्शा में बैठकर आगे निकल गईं।
    • इसके बाद उनका घर व स्कूल दोनों से संपर्क टूट गया।

    पुलिस की सक्रियता

    जांच में सामने आया कि तीनों छात्राएं इटावा चली गईं। पायल ने शास्त्री चौराहे से एक राहगीर का फोन लेकर घर पर सूचना दी। सूचना मिलते ही बिधूना पुलिस ने इटावा पुलिस से संपर्क किया और तीनों छात्राओं को बरामद कर लिया।तीनों छात्राएं सुरक्षित हैं और इटावा पुलिस की निगरानी में हैं। बिधूना थाना पुलिस छात्राओं को परिजनों के सुपुर्द करने के लिए इटावा रवाना हो चुकी है।

  • हमीरपुर खाद के लिए परेशान किसानों से SDM करन वीर सिंह का अभद्रता करते वीडियो हुआ था वायरल

    हमीरपुर खाद के लिए परेशान किसानों से SDM करन वीर सिंह का अभद्रता करते वीडियो हुआ था वायरल

    हमीरपुर : खाद की किल्लत के चलते किसानों और प्रशासन के बीच विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हमीरपुर जिले के मौदहा क्षेत्र में SDM करन वीर सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे किसानों से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में SDM कह रहे हैं, “एक झापड़ मारेंगे तो पेशाब निकल जाएगा।” इस आपत्तिजनक बातचीत से किसानों में रोष फैल गया और सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से शेयर किया जाने लगा।

    किसानों का आरोप है कि खाद की समय पर आपूर्ति न होने से उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और ऐसे में SDM का रवैया पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से ध्यान भटकाकर केवल सत्ता का दबाव दिखा रहे हैं। इस घटना के बाद इलाके में सियासी हलचल भी तेज हो गई है।

    UP कांग्रेस ने इस मामले को लेकर ट्विटर पर योगी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार का ‘किसान सम्मान मॉडल’ केवल दिखावा है, असलियत में किसानों को अपमान और धमकी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार और अधिकारी किसानों की समस्याओं के समाधान में नाकामयाब हैं और ऐसे कृत्यों से किसानों में डर और असंतोष फैल रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों का यह रवैया केवल किसान विरोधी नहीं बल्कि राज्य की छवि पर भी असर डालता है। किसानों के साथ संवाद और उनकी समस्याओं को समझने के बजाय, ऐसी अभद्रता से केवल असंतोष और विरोध को बढ़ावा मिलता है।इस घटना के बाद प्रशासन की जवाबदेही और किसानों के लिए खाद की सही समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। जिले के लोग और किसान अब इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

  • पीएम मोदी का नेपाल की जनता को संदेश- शांति भारत के लिए जरूरी, हालात पर नजर

    पीएम मोदी का नेपाल की जनता को संदेश- शांति भारत के लिए जरूरी, हालात पर नजर

    न्यूज़ डेस्क : नेपाल में पिछले कुछ दिनों से हालात बेहद खराब हो चुके हैं। कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कई जिलों से लूटपाट, हिंसा और अराजकता की खबरें सामने आ रही हैं। लोग शोरूम और मॉल में घुसकर टीवी, एसी और फ्रिज जैसी चीजें खुलेआम उठा ले जा रहे हैं। वहीं पुलिस और प्रशासन पूरी तरह नदारद है। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की जनता को सीधा संदेश दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि नेपाल की शांति भारत के लिए बेहद जरूरी है और भारत लगातार वहां की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    पीएम मोदी ने नेपाल की जनता से क्या कहा?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा, “भारत और नेपाल का रिश्ता सिर्फ पड़ोसी देशों का नहीं, बल्कि परिवार का है। नेपाल की स्थिरता और शांति भारत के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी नेपाल की जनता के लिए।”मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत नेपाल की मौजूदा स्थिति पर नजर रख रहा है और वहां शांति बहाल करने में हर संभव सहयोग देगा। उन्होंने कहा कि नेपाल में हो रही हिंसा और अव्यवस्था से भारत भी चिंतित है क्योंकि दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से गहरे जुड़े हुए हैं।

    नेपाल में क्यों बिगड़े हालात?

    नेपाल में मौजूदा हालात की वजह प्रशासनिक विफलता मानी जा रही है।

    • हाल के दिनों में राजधानी समेत कई शहरों में लोग बिना किसी डर के दुकानों और मॉल में घुसकर सामान लूट रहे हैं।
    • सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग टीवी, एसी और फ्रिज जैसी बड़ी चीजें उठाकर ले जा रहे हैं।
    • पुलिस और प्रशासन की गैरमौजूदगी ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
    • इससे आम जनता में दहशत का माहौल है।

    भारत क्यों चिंतित है?

    भारत और नेपाल के बीच गहरी सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक कड़ियां हैं।

    • भारत-नेपाल की खुली सीमा दोनों देशों के लिए अहम है।
    • नेपाल में अस्थिरता सीधे तौर पर भारत की सीमाओं को प्रभावित कर सकती है।
    • खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों पर इसका असर पड़ सकता है।
    • नेपाल में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी भारत की प्राथमिकता है।

    पीएम मोदी का संदेश यह साफ करता है कि भारत नेपाल की स्थिति को लेकर बेहद गंभीर है।

    • भारत यह नहीं चाहता कि पड़ोसी देश में अराजकता फैले।
    • मोदी का सीधा संदेश नेपाल की जनता को आश्वस्त करने के लिए भी है।
    • भारत ने पहले भी नेपाल की आपदा और संकट के समय मदद की है और इस बार भी मदद के लिए तैयार है।
    • नेपाल में मौजूदा हालात ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। लूटपाट, हिंसा और प्रशासनिक नाकामी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पीएम मोदी का यह संदेश साफ करता है कि भारत नेपाल की स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और वहां की जनता के साथ खड़ा है।
  • कानपुर में महिला सशक्तिकरण के लिए 10 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम

    कानपुर में महिला सशक्तिकरण के लिए 10 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम

    कानपुर -जनपद कानपुर में जिला प्रोबेशन अधिकारी श्री विकास सिंह के नेतृत्व में संकल्प हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना के तहत 10 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना था। 08.09.2025 को महिला महाविद्यालय, किदवई नगर में विशेष विधिक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।

    छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों और अधिनियमों के बारे में जानकारी दी गई।जिला समन्वयक मोनिका यादव उपाध्याय ने POCSO अधिनियम और सोशल मीडिया के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के बारे में समझाया। इससे छात्राओं को अपने जीवन में सुरक्षित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।जेंडर स्पेशलिस्ट शैल शुक्ल ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, मातृ वंदन योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, शक्ति सदन, सखी निवास जैसी सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

    जेंडर स्पेशलिस्ट रागनी श्रीवास्तव ने हेल्पलाइन नंबर 181, 1090 और 198 के बारे में बताया, ताकि छात्राएं किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद ले सकें। कार्यक्रम में महिला महाविद्यालय की प्रधानाचार्या अंजू चौधरी, प्रोफेसर ममता और अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।

    इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक बनाना है। छात्राओं ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी दिखाई और अपने सवालों के माध्यम से जानकारी हासिल की। यह पहल उन्हें अपने जीवन में सशक्त और सुरक्षित बनाने में सहायक होगी।

  • Kannauj Delivery Death: “एक मिनट में निकल जाएगी गर्मी”,छिबरामऊ कोतवाल साहब का विवादित रवैया

    Kannauj Delivery Death: “एक मिनट में निकल जाएगी गर्मी”,छिबरामऊ कोतवाल साहब का विवादित रवैया

    कन्नौज :- कन्नौज जिले के छिबरामऊ क्षेत्र में डिलीवरी के दौरान महिला की मौत ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर अस्पताल पहुँचा, लेकिन उनका सामना प्रशासन के अनुचित व्यवहार से हुआ।मौके पर पहुंचे छिबरामऊ कोतवाल ने परिजनों से कहा, “एक मिनट में निकल जाएगी गर्मी।” यह कथन न केवल अनुचित था, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए मानसिक दबाव का कारण बन गया। इस बयान ने आसपास के लोगों में भी आक्रोश पैदा किया और प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े किए।

    घटना की जानकारी के अनुसार, मृतक महिला की डिलीवरी के दौरान उसकी स्थिति गंभीर थी। परिजन अस्पताल की उचित देखभाल की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अस्पताल का रवैया निराशाजनक और असंवेदनशील था। ऐसे में परिजन प्रशासन की ओर मदद के लिए पहुँचे, लेकिन पुलिस अधिकारियों का व्यवहार उन्हें और अधिक असुरक्षित महसूस करवा रहा था।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गरीब और कमजोर वर्ग के मामलों में पुलिस कभी-कभी संवेदनहीन रवैया अपनाती है, जबकि अमीर और रसूखदारों के सामने कार्रवाई पूरी तरह अलग होती है। इस घटना ने प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    परिवार ने स्पष्ट रूप से न्याय की मांग की है और प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर भी यह घटना व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग प्रशासन और अस्पताल की जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि गरीब और असहाय लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित किया जाए।

    अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और मृतक परिवार को न्याय दिलाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद जनता में यह चिंता बनी हुई है कि क्या गरीब और कमजोर वर्ग के लिए न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।इस घटना ने स्वास्थ्य और पुलिस प्रशासन में जवाबदेही की कमी को उजागर किया है। नियम और कानून होने के बावजूद प्रशासनिक कर्मियों का संवेदनशील और उचित व्यवहार आवश्यक है। यदि अधिकारी संवेदनशीलता और जवाबदेही दिखाएं, तो ऐसे दुखद मामलों में कम से कम पीड़ितों को मानसिक सहारा मिल सकता है।सोशल मीडिया और जनसंचार माध्यमों पर लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं। जनहित में लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।कुल मिलाकर, कन्नौज में डिलीवरी के दौरान महिला की मौत और उसके बाद छिबरामऊ कोतवाल द्वारा परिजनों को धमकाने की घटना प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता को उजागर करती है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और न्याय प्रक्रिया पर टिकी हैं।

  • Aniruddhacharya Controversy-करौली सरकार का अनिरुद्धाचार्य पर प्रहार: “ये संत स्वभाव नहीं, अहंकार है”

    Aniruddhacharya Controversy-करौली सरकार का अनिरुद्धाचार्य पर प्रहार: “ये संत स्वभाव नहीं, अहंकार है”

    धर्मगुरु करौली सरकार ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की युवतियों पर टिप्पणी को लेकर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ऐसे शब्द संत स्वभाव नहीं बल्कि अहंकार है। पढ़ें पूरी खबर विस्तार से।

    धार्मिक प्रवचन और संत समाज का उद्देश्य हमेशा से समाज को नैतिकता, सदाचार और भक्ति की ओर प्रेरित करना रहा है। लेकिन हाल ही में चर्चित कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की एक टिप्पणी ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। युवतियों को लेकर उनकी टिप्पणी के बाद न केवल सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई, बल्कि अब कई धर्मगुरुओं ने भी इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। इन्हीं में से एक हैं करौली सरकार (धर्मगुरु), जिन्होंने अनिरुद्धाचार्य के बयान को लेकर सीधा हमला बोला है।

    करौली सरकार ने अनिरुद्धाचार्य के विवादित बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

    करौली सरकार ने अनिरुद्धाचार्य के विवादित बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:”उन्होंने बच्चियों को लेकर जिस तरीके से गंद मचाया है और बार-बार बयान को पुष्टि करने की कोशिश की है, ये संत स्वभाव नहीं, अहंकार है।””जो अपशब्द बोले जा रहे हैं, मेरा प्रश्न है कि उन्हें अनुभव हुआ कैसे?””इस तरह के शब्दों का उच्चारण उस व्यक्ति के लिए अच्छा नहीं, जिसे लोग सुनते हों और आदर्श मानते हों।”स्पष्ट है कि करौली सरकार ने इस बयान को न केवल आपत्तिजनक बताया, बल्कि संत समाज के लिए कलंक जैसा करार दिया।

    विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

    अनिरुद्धाचार्य, जो कि अपने प्रवचनों और धार्मिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध हैं, ने हाल ही में एक कथा के दौरान युवतियों पर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने सबको चौंका दिया।उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।कई लोग इस टिप्पणी को अमर्यादित और महिलाओं के प्रति अपमानजनक मान रहे हैं।वहीं, कुछ समर्थक इसे अलग तरह से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अब संत समाज के ही लोग उनके खिलाफ बोल रहे हैं।

    भारत में संतों और कथावाचकों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। करोड़ों लोग उनके प्रवचनों को सुनकर जीवन में प्रेरणा लेते हैं। ऐसे में जब कोई कथावाचक या संत अनुचित टिप्पणी करता है, तो यह समाज में गलत संदेश पहुंचाता है।करौली सरकार ने इसीलिए चेताया कि जो लोग धर्म और अध्यात्म के मार्गदर्शक हैं, उन्हें अपने शब्दों का खास ध्यान रखना चाहिए।लोगों की भावनाओं और समाज की संवेदनशीलता को ठेस पहुंचाना धर्म की मूल भावना के विपरीत है।

    सोशल मीडिया पर बवाल

    अनिरुद्धाचार्य के बयान के बाद सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ट्विटर (X) पर लोग #अनिरुद्धाचार्य और #करौलीसरकार ट्रेंड कराने लगे।फेसबुक और यूट्यूब पर लाखों लोगों ने वीडियो देखकर नाराजगी जताई।कई लोगों ने इसे महिला असम्मान करार दिया और कार्रवाई की मांग की।संत समाज में दरार या चेतावनी?करौली सरकार के बयान को कई लोग संत समाज के भीतर की असहमति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह दरार नहीं बल्कि चेतावनी है। यह संदेश है कि कोई भी संत, चाहे वह कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो, अगर धर्म और मर्यादा से बाहर जाकर कुछ बोलेगा तो समाज और संत दोनों उसकी आलोचना करेंगे।ऐसी घटनाएं युवाओं और भक्तों की आस्था को झटका देती हैं।लोगों के मन में संत समाज को लेकर संदेह पैदा होता है।महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचती है।करौली सरकार का बयान इसीलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह संदेश देता है कि संत समाज भी गलत को गलत कहने से पीछे नहीं हटेगा।अनिरुद्धाचार्य के विवादित बयान पर करौली सरकार की प्रतिक्रिया ने एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि धर्मगुरुओं और कथावाचकों की जिम्मेदारी कितनी बड़ी है और क्या वे अपनी वाणी से समाज को सही राह दिखा रहे हैं?
    यह घटना इस बात का सबक है कि संतों और

  • ‘सर तन से जुदा’ के नारे के बाद कानपुर में बवाल, पत्थरबाजी और आरोपी के घर पर भीड़

    ‘सर तन से जुदा’ के नारे के बाद कानपुर में बवाल, पत्थरबाजी और आरोपी के घर पर भीड़

    कानपुर-कानपुर में ‘सर तन से जुदा’ नारे को लेकर स्थिति गंभीर हो गई है। शहर के एक पुराने मोहल्ले में आरोपी के घर के बाहर नारे लिखे जाने के बाद वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। स्थानीय निवासियों और पुलिस के अनुसार, भीड़ ने पत्थरबाजी भी की, जिससे इलाके में डर और हड़कंप फैल गया।मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद के पीछे शिया और सुन्नी समुदाय के बीच पहले से चली आ रही असहमति है। आरोपी के घर पर नारे लिखे जाने के बाद स्थानीय लोग गुस्से में आ गए और पत्थरबाजी करने लगे। भीड़ ने आरोपी के घर के बाहर धक्का-मुक्की की और पुलिस को तुरंत मौके पर बुलाना पड़ा।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, विवाद बढ़ने का कारण छोटे मामलों का लंबित रहना और आपसी टकराव रहा। पुलिस ने तुरंत इलाके को सील किया और अतिरिक्त फोर्स तैनात की। मौके पर पहुंची फील्ड यूनिट ने पत्थरबाजी में शामिल लोगों को हटाया और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित की।पुलिस ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की अफवाह या सोशल मीडिया पोस्ट से स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे वाली गतिविधि में शामिल न होने की अपील की। इसके अलावा, आरोपी के परिवार को सुरक्षा देने के लिए भी विशेष टीम तैनात की गई।

    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी जल्द ही की जाएगी और मामले की गहन जांच की जा रही है। नारे लिखने और पत्थरबाजी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस ने यह भी कहा कि इलाके में शांति बनाए रखने के लिए सभी समुदायों से संयम बरतने का अनुरोध किया गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक और सामुदायिक तनाव लंबे समय तक समाज में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और दोनों पक्षों के बीच संवाद बेहद जरूरी होता है। कानपुर में यह घटना भी इसी तरह संवेदनशील मानी जा रही है।

    स्थानीय लोग डर के माहौल में जी रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी उकसावे वाली गतिविधि में शामिल होने वाले लोग कानून के तहत सख्त कार्रवाई का सामना करेंगे।थाना प्रभारी ने कहा, “हमने मौके पर अतिरिक्त टीम तैनात कर दी है। आरोपी की गिरफ्तारी जल्द ही होगी और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। हम चाहते हैं कि सभी समुदाय शांति बनाए रखें और कानून का पालन करें।”इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक और सामाजिक सह-अस्तित्व के लिए जागरूकता, प्रशासन की सक्रियता और संवाद कितना महत्वपूर्ण है। कानपुर प्रशासन की तत्परता और पुलिस की कार्रवाई से ही स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं।

  • “पीलीभीत बाढ़: सीएमओ की मौजूदगी में लगाया गया निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, मरीजों को मुफ्त दवा वितरण”

    “पीलीभीत बाढ़: सीएमओ की मौजूदगी में लगाया गया निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, मरीजों को मुफ्त दवा वितरण”

    संवाददाता :-संजय शुक्ल पीलीभीत। लगातार हो रही बारिश से आई बाढ़ ने ट्रांस शारदा क्षेत्र में स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। बुखार, डायरिया, उल्टी-दस्त और त्वचा रोग जैसे मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत रामनगर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आलोक कुमार की मौजूदगी में निशुल्क स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया।

    पूरनपुर तहसील के अंतर्गत ट्रांस शारदा क्षेत्र के कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। जलभराव और गंदगी के कारण ग्रामीणों में बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भरतपुर मौरेनियां गांधी नगर की टीम लगातार बाढ़ग्रस्त गांवों में निशुल्क मेडिकल कैंप लगा रही है।

    रामनगर में आयोजित शिविर में डॉ. आलोक कुमार और प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि श्रीवास्तव की टीम ने दर्जनों मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उन्हें निशुल्क दवाइयां वितरित कीं। ज्यादातर मरीज बुखार, पेट दर्द, खांसी-जुकाम, त्वचा रोग और दस्त जैसी मौसमी बीमारियों से पीड़ित पाए गए।

    डॉ. रश्मि श्रीवास्तव ने ग्रामीणों को बरसात में सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान से बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। उन्होंने ग्रामीणों को उबला या फिल्टर किया पानी पीने, मच्छरदानी का उपयोग करने और बाढ़ के पानी में अधिक समय न बिताने की हिदायत दी।सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। मेडिकल कैंप में मरीजों की जांच, मुफ्त दवा वितरण और संक्रामक रोगों से बचाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम मौजूद रही और ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।

  • अमेठी: लगातार बारिश से सरकारी स्कूलों में जलभराव, बच्चों के लिए बनी मुश्किलें

    अमेठी: लगातार बारिश से सरकारी स्कूलों में जलभराव, बच्चों के लिए बनी मुश्किलें

    अमेठी – अमेठी में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को हो रही है। जिले के लगभग 30 से 35 स्कूलों में पानी भर गया है, जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र अभिषेक ने बताया कि पिछले तीन दिनों से स्कूल तक पहुंचने के लिए उन्हें पानी भरे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। अन्य छात्रों ने भी बताया कि जलभराव के कारण डर महसूस होता है, लेकिन पढ़ाई के लिए स्कूल आना जरूरी है। अमेठी: लगातार बारिश से सरकारी स्कूलों में जलभराव

    अमेठी के बीएसए संजय तिवारी ने बताया कि अधिक बारिश के कारण कई स्कूलों में खेल के मैदान और खाली जगहों में पानी भर गया है। हालांकि बच्चों के पठन-पाठन में कोई गंभीर बाधा नहीं है। जिन स्कूलों में जलभराव है, वहां जल निकासी की व्यवस्था की जा रही है। अमेठी: लगातार बारिश से सरकारी स्कूलों में जलभराव