Nation Now Samachar

Tag: UPTourism

  • ताजमहल पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, डायना बेंच पर बैठकर कराई फोटो कहा, अगली बार बच्चों संग आऊंगा

    ताजमहल पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, डायना बेंच पर बैठकर कराई फोटो कहा, अगली बार बच्चों संग आऊंगा

    आगरा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर गुरुवार को आगरा पहुंचे और विश्वप्रसिद्ध ताजमहल का दीदार किया। वे अपनी मित्र बेटिना एंडरसन, एक दोस्त और उसकी मित्र के साथ विशेष विमान से दोपहर करीब 1:30 बजे आगरा एयरपोर्ट पहुंचे। कड़ी सुरक्षा में उनके काफिले को सीधे पांच सितारा होटल ले जाया गया, जहां लंच के बाद वे 2:45 बजे ताजमहल पहुंचे

    ताज भ्रमण के दौरान ट्रंप जूनियर सफेद आउटफिट में जबकि बेटिना लाल वेस्टर्न ड्रेस में नजर आईं। उन्होंने गाइड नितिन सिंह से ताजमहल के इतिहास, पच्चीकारी, निर्माण तकनीक और मजदूरों की संख्या के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

    सबसे दिलचस्प पल तब आया जब उन्हें बताया गया कि जिस सीट पर वे फोटो खिंचा रहे हैं, उसे ‘डायना सीट’ कहा जाता है। यह वही स्थान है जहां प्रिंसेस डायना ने कभी फोटो खिंचवाया था। यह सुनकर ट्रंप जूनियर हैरान रह गए और बोले—
    “मैं अगली बार अपने बच्चों को भी ताज दिखाने लेकर आऊंगा।”

    ताजमहल परिसर में उन्होंने फाउंटेन और भूमिगत वाटर सिस्टम को भी समझा, जो स्मारक के मुख्य गुंबद का दृश्य और भी आकर्षक बनाता है। भ्रमण के बाद वे अपने साथियों के साथ विशेष विमान से जामनगर रवाना हो गए। जाते समय उन्होंने प्रशासन और पुलिस की व्यवस्थाओं की तारीफ की।

  • श्रावस्ती में CM योगी का बयान: “बौद्ध और जैन धर्म का पावन स्थल, 7 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती पर प्रदेश में छुट्टी”

    श्रावस्ती में CM योगी का बयान: “बौद्ध और जैन धर्म का पावन स्थल, 7 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती पर प्रदेश में छुट्टी”

    श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावस्ती में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “श्रावस्ती का गौरवशाली इतिहास है, यह बौद्ध और जैन धर्म का पावन स्थल है।”सीएम योगी ने यहां आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से भी अपील की कि वे शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का संरक्षण करें और सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखें।

    उन्होंने कहा कि श्रावस्ती का इतिहास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 7 अक्टूबर 2025 को वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेश भर में छुट्टी रहेगी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों को इस विशेष अवसर में शामिल होने का अवसर प्रदान करने के लिए लिया गया है।

    कार्यक्रम में अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार श्रावस्ती जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास और संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इन स्थलों को पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि राज्य का गौरवशाली इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे। इस प्रकार, मुख्यमंत्री का यह बयान न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि लोगों को सांस्कृतिक चेतना और उत्सव में भाग लेने के लिए भी प्रेरित करता है।

  • ब्रिटिश इंजीनियरिंग का कमाल: 19वीं सदी का सोंधिया पुल आज भी मजबूती का प्रतीक

    ब्रिटिश इंजीनियरिंग का कमाल: 19वीं सदी का सोंधिया पुल आज भी मजबूती का प्रतीक

    संवाददाता लवलेश कुमार कौशाम्बी। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बनाई गई इंजीनियरिंग की मिसाल, सोंधिया का पुल आज भी मजबूती और सटीक निर्माण का प्रतीक बना हुआ है। ग्राम पंचायत सोंधिया में स्थित यह पुल 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा बनवाया गया था, और अब भी यह तीन प्रमुख कार्यों को एक साथ निभा रहा है।

    इस पुल के नीचे किलनहाई नदी बहती है, पुल के बीच से नहर गुजरती है और ऊपर से सड़क बनी हुई है। ब्रिटिश हुकूमत ने इस नहर के माध्यम से मंझनपुर और चायल तहसील के कई क्षेत्रों के किसानों को पानी पहुंचाने की सुविधा दी थी। वर्तमान में यह नहर किशनपुर पम्प कैनाल से संचालित हो रही है।

    ब्रिटिश काल में इस पुल के निरीक्षण के लिए नगरेहा में एक कोठी बनाई गई थी, जिसे आज भी निरीक्षण भवन के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि पुल की मजबूती और डिज़ाइन अद्भुत है, और 19वीं सदी से यह बिना किसी रिसाव या बड़े नुकसान के खड़ा है।

    स्थानीय लोग सरकार से अपील कर रहे हैं कि इसे संरक्षित रखने और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए ध्यान दिया जाए। पुल न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि ग्रामीण जीवन और कृषि के लिए भी आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटिश इंजीनियरिंग का यह उदाहरण आधुनिक निर्माण के लिए प्रेरणा है। सोंधिया का पुल आज भी तकनीकी दक्षता और टिकाऊ निर्माण का जीवंत प्रमाण है।

  • Kashi Vishwanath- सावन के अंतिम सोमवार पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, महाराष्ट्र से आए भक्तों ने गाए भजन

    Kashi Vishwanath- सावन के अंतिम सोमवार पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, महाराष्ट्र से आए भक्तों ने गाए भजन

    रिपोर्ट: मनीष पटेल | 5 अगस्त 2025 वाराणसी, उत्तर प्रदेश- सावन के पवित्र महीने के अंतिम सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु वाराणसी पहुंचे। सुबह से ही श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। विशेष तौर पर महाराष्ट्र से आए भक्तों का एक समूह बाबा के लिए भक्तिमय गीत गाता नजर आया, जिसने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।मंदिर प्रांगण में भक्ति और श्रद्धा का माहौल श्रद्धालु हाथों में पूजा की थाली, गंगाजल और बेलपत्र लिए नजर आए महाराष्ट्र से आए भक्तों ने गाया – “जय शंकरा, भोले शंकरा…”

    सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद: सावन के अंतिम सोमवार पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन के अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए:

    • ड्रोन से मंदिर क्षेत्र की निगरानी
    • कमांडो दस्ते और पीएसी की तैनाती
    • सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग, मंदिर में प्रवेश के लिए सुरक्षा जांच अनिवार्य

    वाराणसी प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पूरे क्षेत्र में साफ-सफाई, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की तैनाती की थी। सावन के अंतिम सोमवार पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब