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  • Unnao Rape Case: सजा सस्पेंड का मतलब क्या? कोर्ट की शर्तें समझें

    Unnao Rape Case: सजा सस्पेंड का मतलब क्या? कोर्ट की शर्तें समझें

    Unnao Rape Case : उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी सजा को सस्पेंड करते हुए जमानत मंजूर कर दी है। हालांकि, यह राहत सीमित है और इससे कुलदीप सेंगर की तत्काल रिहाई संभव नहीं हो पाई है।

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    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कुलदीप सेंगर सजा सस्पेंड होने का मतलब क्या है। सजा सस्पेंड का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी दोषमुक्त हो गया है या उसकी सजा खत्म कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक अदालत ने सजा के क्रियान्वयन (Execution of Sentence) को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यानी दोष कायम रहता है, लेकिन सजा पर रोक लग जाती है।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपील के निस्तारण में लगने वाले समय को देखते हुए सजा सस्पेंड की जा सकती है। इसी आधार पर उन्हें जमानत दी गई है, लेकिन कोर्ट ने कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं।

    अदालत की शर्तों के अनुसार, कुलदीप सेंगर को बिना अनुमति देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। वे पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं कर सकेंगे और न ही मामले से जुड़े किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर पाएंगे। इसके अलावा, उन्हें तय समय पर अदालत में पेश होना भी अनिवार्य होगा।

    हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। वजह यह है कि पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसे वे अभी भुगत रहे हैं। इस कारण उनकी रिहाई पर कानूनी रोक बनी हुई है।

    कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल तकनीकी राहत है, न कि दोष से मुक्ति। अंतिम फैसला अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा, जो आने वाले समय में इस केस की दिशा तय करेगा।

  • अमेठी में घने कोहरे से भीषण सड़क हादसा, कई वाहन टकराए, 2 की मौत

    अमेठी में घने कोहरे से भीषण सड़क हादसा, कई वाहन टकराए, 2 की मौत

    संवाददाता नितेश तिवारी अमेठी उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में घने कोहरे ने एक बार फिर जानलेवा रूप दिखाया है। अमेठी सड़क हादसा मंगलवार देर रात उस समय हुआ, जब मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र से गुजरने वाले लखनऊ–वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक के बाद एक कई वाहन आपस में टकरा गए। इस भीषण दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 लोग घायल हो गए।

    जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलम डिग्री कॉलेज के पास ओवरब्रिज से पहले रात करीब दो बजे हुआ। अपर पुलिस अधीक्षक अमेठी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि लखनऊ से सुल्तानपुर की ओर जा रहा एक ट्रक घने कोहरे के कारण डिवाइडर से टकराकर पलट गया। ट्रक के पलटते ही पीछे से आ रही चार अन्य ट्रकें भी आपस में भिड़ गईं।

    इसी दौरान पीछे से आ रही यात्रियों से भरी रोडवेज की जनरथ बस के चालक ने अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाया, लेकिन कोहरे की वजह से दृश्यता बेहद कम थी। बस पलटे हुए ट्रक से टकरा गई। इसके बाद पीछे चल रही एक कार भी बस से जा भिड़ी। कुछ ही पलों में हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और चारों ओर चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

    सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। सभी घायलों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान दो लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। 18 घायलों में से 14 की हालत सामान्य बताई जा रही है, जबकि दो गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।

    मृतकों में एक की पहचान मोहम्मद शमशाद निवासी जायस के रूप में हुई है, जबकि दूसरे मृतक की शिनाख्त की जा रही है। दोनों मृतक ट्रक चालक बताए जा रहे हैं। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कराया और मामले में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • कानपुर में खूंखार कुत्तों को उम्रकैद, दो बार काटने पर ताउम्र कैद का नियम

    कानपुर में खूंखार कुत्तों को उम्रकैद, दो बार काटने पर ताउम्र कैद का नियम

    कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर में कुत्तों के हमले की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब दो बार इंसानों को काटने वाले खूंखार कुत्तों को ताउम्र आजादी नहीं मिलेगी। नए नियम के तहत ऐसे कुत्तों को ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर में आजीवन कैद में रखा जाएगा। यह नियम पूरे यूपी में लागू कर दिया गया है।नगर निगम के अनुसार, अब तक आवारा और हमलावर कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और इलाज के बाद छोड़ दिया जाता था, लेकिन बार-बार हमले की शिकायतों के बाद नीति में बदलाव किया गया है। कानपुर में खूंखार कुत्तों को उम्रकैद देने का यह फैसला प्रदेश में पहली बार इतनी सख्ती के साथ लागू हुआ है।

    ABC सेंटर बना ‘काला पानी’

    नए नियम के अनुसार, यदि कोई कुत्ता पहली बार किसी व्यक्ति को काटता है तो उसे चेतावनी के तौर पर पकड़कर निगरानी में रखा जाएगा। लेकिन दूसरी बार हमला करने पर उस कुत्ते को सीधे ABC सेंटर भेजा जाएगा, जहां उसे जीवनभर के लिए रखा जाएगा। इस सेंटर को अब हमलावर कुत्तों के लिए ‘काला पानी’ कहा जा रहा है।

    कानपुर में 5 कुत्तों को उम्रकैद

    नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, कानपुर में अब तक 5 खूंखार कुत्तों को आजीवन कारावास की सजा दी जा चुकी है। इन कुत्तों पर अलग-अलग इलाकों में दो से अधिक बार लोगों को काटने के आरोप साबित हुए थे। इसके बाद नियमों के तहत इन्हें खुले में छोड़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।

    प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य कुत्तों को सजा देना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि किसी भी डॉग बाइट की घटना की तुरंत नगर निगम या प्रशासन को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • Codeine Cough Syrup Case: यूपी में मौत नहीं, CM योगी का विपक्ष पर बड़ा हमला

    Codeine Cough Syrup Case: यूपी में मौत नहीं, CM योगी का विपक्ष पर बड़ा हमला

    Codeine Cough Syrup Case को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। विधानसभा में दिए गए अपने बयान में सीएम योगी ने साफ कहा कि यूपी के भीतर कोडीन कफ सिरप से किसी भी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों पर NDPS एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई होगी।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यूपी सरकार इस पूरे मामले में कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी और सरकार को पूरा विश्वास है कि वह इसे जीतेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप का उत्पादन नहीं होता, बल्कि इसका निर्माण मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में किया जाता है। यूपी में केवल इसके स्टॉकिस्ट और होलसेलर हैं।

    नकली दवाओं के आरोप खारिज

    Codeine Cough Syrup Case को लेकर उठाए जा रहे नकली दवाओं से मौत के आरोपों पर सीएम योगी ने कहा कि शासन के संज्ञान में अब तक नकली दवाओं से हुई किसी भी मौत की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जिन मौतों की बात की जा रही है, वे अन्य राज्यों से संबंधित हैं, न कि उत्तर प्रदेश से।

    एसटीएफ की कार्रवाई और लाइसेंस विवाद

    मुख्यमंत्री ने बताया कि यूपी में सबसे बड़े होलसेलर को सबसे पहले एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में उस होलसेलर को समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान लाइसेंस जारी किया गया था। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

    विपक्ष पर तीखा हमला

    सीएम योगी ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “देश के अंदर दो नमूने हैं—एक दिल्ली में और एक लखनऊ में बैठते हैं। जब देश में कोई चर्चा होती है, तो वे तुरंत देश छोड़कर भाग जाते हैं।” उन्होंने इसे राजनीतिक ड्रामा करार देते हुए कहा कि यूपी सरकार कानून के तहत सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

  • कानपुर : यूपी में लगातार BLO की आत्महत्या पर बोले केशव प्रसाद मौर्य, दिया बड़ा बयान

    कानपुर : यूपी में लगातार BLO की आत्महत्या पर बोले केशव प्रसाद मौर्य, दिया बड़ा बयान

    कानपुर। यूपी में लगातार सामने आ रही BLO की आत्महत्या की घटनाओं पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सभी बीएलओ से संयम रखने की अपील की और कहा कि विपक्ष की बातों में आकर कोई भी ऐसा कदम न उठाएं, जिससे उन्हें या उनके परिवार को नुकसान हो।

    “यह निर्वाचन आयोग की नियमित प्रक्रिया है” – केशव प्रसाद मौर्य

    केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बीएलओ जो कार्य कर रहे हैं, वह निर्वाचन आयोग की एक निर्धारित प्रक्रिया है, जो समय-समय पर होती रहती है। ऐसे में अफवाहों या राजनीतिक बयानबाज़ी के दबाव में आकर किसी प्रकार का कठोर कदम उठाना ठीक नहीं है।

    BLO से मौर्य की अपील

    उपमुख्यमंत्री ने कहा“बीएलओ संयम से काम करें। विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन किसी को भी हताश होने की आवश्यकता नहीं है।”

    SIR फॉर्म की तिथि बढ़ने पर क्या बोले?

    चुनाव आयोग द्वारा SIR फॉर्म भरने की तिथि बढ़ाए जाने पर केशव मौर्य ने निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा“यह एक स्वागत योग्य कदम है। इससे बीएलओ को और समय मिलेगा और काम आसान होगा।”विपक्ष पर सीधा वार केशव मौर्य ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस तरह विपक्ष व्यवहार कर रहा है,“आने वाले समय में संसद विपक्ष-विहीन भी हो सकती है।”

    https://nationnowsamachar.com/headlines/up-bjp-new-president-soon-rss-unhappy-over-sir-mp-mla-response/
  • भोगनीपुर: गुलौली की सराय में मुख्य रास्ता तबाही की कगार पर, कीचड़ और गंदे पानी से ग्रामीण परेशान,बच्चे-बुजुर्ग घायल होने का खतरा

    भोगनीपुर: गुलौली की सराय में मुख्य रास्ता तबाही की कगार पर, कीचड़ और गंदे पानी से ग्रामीण परेशान,बच्चे-बुजुर्ग घायल होने का खतरा

    कानपुर देहात के भोगनीपुर क्षेत्र के मलासा ब्लॉक स्थित गुलौली ग्राम पंचायत के मजरा सराय में मुख्य रास्ते की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। यह मार्ग पूरी तरह टूट चुका है और हमेशा कीचड़ से भरा रहता है, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थानीय निवासी रामखेलावन, राजू और सरवन ने बताया कि यह गांव का मुख्य मार्ग है, जिससे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दैनिक मजदूरी करने वालों का आना-जाना होता है। लेकिन सड़क पर फैले कीचड़ और गड्ढों में भरे गंदे पानी के कारण लोग हर दिन गिरने का जोखिम झेलते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चे अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे कई बार चोट भी लग जाती है।

    ग्रामीणों के अनुसार, बारिश में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। गंदा पानी लंबे समय तक जमा रहता है और सड़क चलने लायक नहीं बचती। गाँव में दुर्गंध और मच्छरों का फैलाव बढ़ गया है। कीचड़ और जलभराव बीमारी की आशंका भी बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में बुखार, त्वचा संक्रमण और पेट संबंधी रोग बढ़े हैं।

    एक दिव्यांग महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें हर दिन गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया, “हमारे लिए यह रास्ता जीवन-जोखिम बन चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस समस्या की शिकायत कई बार अधिकारियों और संबंधित विभागों को की गई, लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर स्थिति देखने तक नहीं आया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है।

  • महोबा में SIR कार्य में लापरवाही: 27 पंचायत सहायकों को सेवा समाप्ति का नोटिस, एक सचिव का वेतन काटा

    महोबा में SIR कार्य में लापरवाही: 27 पंचायत सहायकों को सेवा समाप्ति का नोटिस, एक सचिव का वेतन काटा

    यूपी के महोबा जिले में मतदाता सूची के प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर बीएलओ के सहयोग हेतु तैनात पंचायत सहायकों की गैरहाजिरी और उदासीनता को देखते हुए जिला पंचायती राज अधिकारी (DPRO) ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।जिले के 27 पंचायत सहायकों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है, जबकि एक ग्राम पंचायत सचिव का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई से SIR कार्य में लगे अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

    कई ब्लॉकों में लापरवाही उजागर

    प्रशासनिक जांच में पाया गया कि कबरई, चरखारी, जैतपुर और पनवाड़ी ब्लॉक के कई पंचायत सहायक कार्यस्थल पर मौजूद ही नहीं थे।नियमों के मुताबिक, बीएलओ को मतदाता सूची पुनरीक्षण में सहयोग देने के लिए ग्राम प्रधान, कोटेदार, पंचायत सहायक, ग्राम सचिव और सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।

    इसके साथ ही एसडीएम और तहसीलदार भी निगरानी में लगे हैं।इसके बावजूद जिले में केवल 50% डेटा ही ऑनलाइन अपलोड हो सका, जिससे SIR की प्रगति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

    किस ब्लॉक में कितने पंचायत सहायकों पर कार्रवाई?

    • कबरई ब्लॉक: डिगरिया, श्रीनगर, सिचौरा, सिजहरी, ढिकवाहा, कबरई देहात सहित 6 पंचायतों के सहायक
    • पनवाड़ी ब्लॉक: अमानपुरा, विजयपुर, पनवाड़ी, नकरा, कोहनिया, किल्हौआ, काशीपुरा, तेईया, चौका, सौरा और बम्हौरीकुर्मिन — कुल 11 पंचायत
    • चरखारी ब्लॉक: अक्ठौंहा, कुड़ार, बमरारा, गौरहारी — कुल 4 पंचायत
    • जैतपुर ब्लॉक: गुढ़ा, जैलवारा, कमालपुरा, बिहार, थुरट, सलैयामाफ — कुल 6 पंचायत

    DPRO ने दिए कड़े निर्देश

    DPRO चंद्रकिशोर वर्मा ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग की ऑनलाइन मीटिंग के बाद सीडीओ ने सभी सचिवों और ब्लॉक अधिकारियों को SIR कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। पंचायत सहायकों की उपस्थिति जांच में 27 सहायक अनुपस्थित पाए गए, जिसके बाद तीन दिनों के भीतर सेवा समाप्ति प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।प्रशासन की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि SIR कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी।

  • AhirRegiment : “120 बहादुर” से उठे राजनीतिक सवाल: अहीर रेजिमेंट और यूपी की बदलती सियासत

    AhirRegiment : “120 बहादुर” से उठे राजनीतिक सवाल: अहीर रेजिमेंट और यूपी की बदलती सियासत

    AhirRegiment : भारतीय सेना की बहादुरी पर आधारित फिल्म ‘120 बहादुर’ न सिर्फ देशभक्ति का संदेश दे रही है, बल्कि इसके साथ अहीर रेजिमेंट की लंबे समय से चल रही मांग को भी फिर एक बार चर्चा के केंद्र में ले आई है। फिल्म के रिलीज होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है, खासकर वहां जहाँ यादव समुदाय की बड़ी आबादी है।

    अहीर रेजिमेंट की मांग ने पकड़ी रफ्तार

    अहीर यानी यादव समुदाय का भारतीय सेना में योगदान इतिहास से दर्ज है, चाहे 1962 का रेजांग ला युद्ध हो या बाद के कई मोर्चे। लंबे समय से यादव समुदाय एक अलग “अहीर रेजिमेंट” की मांग करता रहा है।’120 बहादुर’ में दिखे साहस और शौर्य के दृश्यों ने इस मांग को नए सिरे से धार दी है।यूपी में बलिया, गोरखपुर, अयोध्या, जौनपुर, इटावा, मैनपुरी और कन्नौज जैसे जिलों में इस मुद्दे पर लगातार सभाएं, पोस्टर कैंपेन और सोशल मीडिया अभियान तेजी से बढ़े हैं।

    सियासी दलों की सक्रियता बढ़ी

    यूपी की राजनीति में यादव समुदाय का बड़ा प्रभाव रहा है। ऐसे में फिल्म के बाद अहीर रेजिमेंट की मांग पर सियासी दलों की नजरें टिक चुकी हैं।

    • सपा (समाजवादी पार्टी) इस मुद्दे को सक्रिय रूप से उठाती रही है और फिल्म के बाद इसे यादव वोटबैंक को जोड़ने का बड़ा अवसर मान रही है।
    • भाजपा भी इस पर बैलेंस बनाते हुए “सेना की नीति और संरचना राजनीतिक आधार पर नहीं बदलती” जैसे बयान दे रही है, लेकिन जमीन पर उसके स्थानीय नेता इस विषय पर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं।
    • कांग्रेस और क्षेत्रीय दल भी इसे “सामाजिक प्रतिनिधित्व” के नजरिए से देख रहे हैं।

    फिल्म से बदला माहौल, बढ़ रही बहस

    ‘120 बहादुर’ की सफलता के बाद सोशल मीडिया पर #AhirRegimentNow और #120Bahadur जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।
    वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी नई रेजिमेंट सेना की रणनीतिक आवश्यकता और ऐतिहासिक आधार पर बनती है, राजनीतिक मांगों पर नहीं।

    लेकिन राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में बड़ा मोड़ बन सकता है।

    अहीर समुदाय का साफ संदेश

    अहीर युवाओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मांग सिर्फ पहचान का सवाल नहीं, बल्कि सेना में योगदान के सम्मान की बात है।
    वे मानते हैं कि ‘120 बहादुर’ ने देशभर के युवाओं के मन में “अहीरों की ऐतिहासिक बहादुरी” का भाव फिर से जगा दिया है।

  • संभल में झाड़ियों के बीच दबा प्राचीन कुआं मिला, दोबारा खुदाई से 1978 के दंगे की कहानी फिर चर्चा में

    संभल में झाड़ियों के बीच दबा प्राचीन कुआं मिला, दोबारा खुदाई से 1978 के दंगे की कहानी फिर चर्चा में

    संभल के मोहम्मदखां सराय क्षेत्र में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एकता चौकी के पास झाड़ियों और मिट्टी के बीच दबा एक प्राचीन बंद कुआं मिलने की जानकारी सामने आई। जैसे ही स्थानीय लोगों में यह खबर फैली, प्रशासन सक्रिय हो गया और जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर पालिका ने तत्काल कुएं की खुदाई का काम शुरू कराया

    सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार और अधिशासी अधिकारी मणिभूषण तिवारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कार्यदायी टीम को निर्देश दिए कि खुदाई तेज गति से की जाए, लेकिन कुएं की उम्र और सतह की कमजोर स्थिति को देखते हुए पूरी सावधानी बरती जाए।खुदाई के दौरान वर्षों पुराना एक विशाल पेड़ सबसे बड़ा अवरोध बना। टीम को पेड़ को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से हटाने का आदेश दिया गया है। नगर पालिका की टीम कुएं को साफ करने और उसकी गहराई तक पहुंचने में जुटी है।

    1978 के दंगे का पुराना आरोप फिर चर्चा में

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कुआं कई दशक पहले बंद कर दिया गया था। इसी के साथ एक पुराना दावा भी फिर चर्चा में है बताया जाता है कि 1978 के दंगे के दौरान एक व्यापारी की हत्या कर उसके शव को इसी कुएं में फेंकने की बात कही गई थी। हालाँकि, उस समय कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।कुएं की दोबारा खुदाई शुरू होने के बाद लोग एक बार फिर उसी घटना की याद ताजा कर रहे हैं। यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या कुएं में कई दशकों पुराना कोई सच दफन है?

    पुलिस बल तैनात, क्षेत्र सील

    किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासन ने क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। कुएं की पूरी खुदाई खत्म होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसके अंदर क्या मौजूद है और क्या कोई पुराना राज सामने आएगा।

  • मुरादाबाद में देसी अंडों की फैक्ट्री का भंडाफोड़: आर्टिफिशियल कलर से बनते थे अंडे, एक लाख जब्त

    मुरादाबाद में देसी अंडों की फैक्ट्री का भंडाफोड़: आर्टिफिशियल कलर से बनते थे अंडे, एक लाख जब्त

    मुरादाबाद में आर्टिफिशियल कलर से देसी अंडे तैयार करने वाली फैक्ट्री का खाद्य सुरक्षा विभाग ने भंडाफोड़ कर दिया है। लंबे समय से चल रहे इस फर्जीवाड़े की सूचना मिलते ही टीम ने छापा मारा और मौके से लगभग एक लाख रंगीन अंडे बरामद किए। ये अंडे बाजार में “देसी अंडे” के नाम पर महंगे दामों में बेचे जा रहे थे।

    जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि फैक्ट्री में साधारण सफेद अंडों को आर्टिफिशियल फूड कलर में डुबोकर देसी अंडा जैसा रंग दिया जाता था। इसके बाद इन्हें थोक बाजार में ऊँची कीमत पर सप्लाई किया जाता था।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इन सभी अंडों को तुरंत जब्त कर पूरे गोदाम को सील कर दिया। मौके से कई बैरल कैमिकल, फूड कलर और पैकिंग सामग्री भी बरामद हुई है। कार्रवाई के बाद फैक्ट्री मालिक को पुलिस के हवाले कर दिया गया है और उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

    अधिकारियों का कहना है कि जांच के लिए अंडों और इस्तेमाल किए गए कलर के सैंपल लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस खुलासे के बाद स्थानीय बाजार में हड़कंप मच गया है। लोग चिंता में हैं कि कहीं उनके घर तक भी ये नकली देसी अंडे तो नहीं पहुंचे। खाद्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि अंडे खरीदते समय सतर्क रहें और संदिग्ध अंडों की सूचना विभाग को दें।