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  • Hamirpur Flood Update- बाढ़ में आया मगरमच्छ और विशालकाय मछली, वीडियो हुआ वायरल | यमुना-बेतवा उफान पर

    Hamirpur Flood Update- बाढ़ में आया मगरमच्छ और विशालकाय मछली, वीडियो हुआ वायरल | यमुना-बेतवा उफान पर

    पवन सिंह परिहार हमीरपुर, उत्तर प्रदेश –यमुना और बेतवा नदी के उफान के बीच एक मगरमच्छ और विशालकाय मछली का वीडियो वायरल हो रहा है। यह नज़ारा हमीरपुर के दपसौरा और संगम रेलवे पुल के पास देखा गया, जहां बाढ़ का पानी तेज़ी से बह रहा है।

    स्थानीय युवक ने किया वीडियो पोस्ट Hamirpur Flood Update- बाढ़ में आया मगरमच्छ और विशालकाय मछली

    वीडियो को बिंदु निषाद नामक युवक ने फेसबुक पर पोस्ट किया है, जिसमें एक मगरमच्छ और साथ ही एक विशाल मछली तैरती हुई नजर आ रही है। इस दृश्य के सामने आने के बाद तटीय इलाकों में दहशत का माहौल बन गया है।

    यमुना और बेतवा खतरे के निशान पर Hamirpur Flood Update- बाढ़ में आया मगरमच्छ और विशालकाय मछली

    हमीरपुर जिले में दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे बाढ़ग्रस्त इलाकों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मगरमच्छ जैसे खतरनाक जीवों का दिखाई देना स्थानीय लोगों की चिंता को और बढ़ा रहा है। वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तटवर्ती गांवों में चौकसी बढ़ा दी है और लोगों को नदी के किनारे न जाने की अपील की है।

  • हमीरपुर: नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, ससुराल पक्ष पर लगा हत्या का आरोप

    हमीरपुर: नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, ससुराल पक्ष पर लगा हत्या का आरोप

    पवन सिंह परिहार हमीरपुर, उत्तर प्रदेश। हमीरपुर जिले के मुस्करा कस्बे में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि घर सुनसान पाकर युवती ने कमरे में रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं मृतका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।

    क्या है पूरा मामला? नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

    घटना मुस्करा कस्बे के पुरवा मुहाल की है। जानकारी के अनुसार, 21 वर्षीय विद्या की शादी करीब दो साल पहले महोबा जिले के डढ़त गांव निवासी अरुण के साथ हुई थी। मृतका के ससुर कंधी कुशवाहा के अनुसार, विद्या ने 11 जून को एक बच्ची को जन्म दिया था और तब से वह अपने मायके में रह रही थी। बीते दिन ही ससुर अपनी बहू को वापस मुस्करा स्थित घर लाया था।बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह घर में कोई नहीं था। इसी दौरान विद्या ने घर के बाहर बने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी।

    मायके पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

    घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज हत्या का आरोप लगाया और जमकर हंगामा किया। उनका कहना है कि विद्या की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप दिया गया है।

    पुलिस ने क्या कहा? नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

    मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    जांच में जुटी पुलिस नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

    फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। ससुराल पक्ष से पूछताछ की जा रही है और मृतका के परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

  • संपूर्ण समाधान दिवस में दिखा प्रशासनिक संवेदनहीनता का चेहरा,पीड़िता ने टेबल पर पटका सिर पढ़िये क्या वजह

    संपूर्ण समाधान दिवस में दिखा प्रशासनिक संवेदनहीनता का चेहरा,पीड़िता ने टेबल पर पटका सिर पढ़िये क्या वजह

    फरीदपुर (बरेली): राज्य सरकार द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु शुरू की गई संपूर्ण समाधान दिवस की सार्थकता उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई जब तहसील फरीदपुर में आयोजित कार्यक्रम में एक पीड़िता को अपनी बात तक कहने का मौका नहीं दिया गया, और उसने निराशा में टेबल पर सिर पटक दिया

    मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) देवयानी की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस में करीब 200 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें अधिकतर मामले राजस्व, ब्लॉक, पूर्ति विभाग और पुलिस से संबंधित थे। मात्र 10 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया।लेकिन व्यवस्था पर असली सवाल उस वक्त खड़ा हुआ जब शिकायतकर्ता पुष्पा (पुत्री भजनलाल) अपनी शिकायत लेकर मंच पर पहुंचीं। जैसे ही पुष्पा ने अधिकारियों के सामने कदम रखा, वहां मौजूद कोतवाल राधेश्याम, एसडीएम मल्लिका नयन, तहसीलदार सुरभि राय और संबंधित लेखपाल एक स्वर में अपनी सफाई देने लगे, मानो वे पहले से जानते हों कि सवाल क्या आने वाला है।

    इस बीच, पीड़िता को मुख्य विकास अधिकारी के सामने अपनी बात रखने तक नहीं दिया गया, जिससे आहत और असहाय होकर उसने सार्वजनिक रूप से टेबल पर सिर पटक दिया। इस दृश्य को देखकर अधिकारियों के साथ-साथ ग्रामीण भी स्तब्ध रह गए।ग्रामीणों ने स्पष्ट तौर पर कहा —“जब अफसर ही जवाबदेही से भागते नजर आएं और पीड़ित को बोलने तक न दिया जाए, तो ऐसे आयोजन ‘समाधान’ नहीं बल्कि ‘दबाव और डर’ के मंच बन जाते हैं।”

    इस घटना ने यह साबित कर दिया कि संपूर्ण समाधान दिवस, यदि सही भावना और पारदर्शिता से न चलाया जाए, तो यह राजनीतिक औपचारिकता और प्रशासनिक दिखावा भर बनकर रह जाता है।यदि पीड़ितों की आवाज को दबाया जाएगा और अधिकारी खुद कठघरे में खड़े न होकर दबंगों की भाषा बोलने लगेंगे, तो जनता का प्रशासन और न्याय प्रणाली से भरोसा उठना तय है।

    राज्य सरकार को चाहिए कि ऐसे जनसुनवाई कार्यक्रमों की न सिर्फ मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे, बल्कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करे। वरना “समाधान दिवस” जल्द ही जनता के लिए “समस्या दिवस” बन सकता है।