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  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष: लखनऊ में विजयदशमी पर भव्य पदसंचलन

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष: लखनऊ में विजयदशमी पर भव्य पदसंचलन

    अजय शर्मा, लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की बस्ती मोतीनगर स्थित नेहरू नगर पार्क में विजयदशमी उत्सव और पदसंचलन का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में संघ के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पदसंचलन कर शांति और अनुशासन का संदेश दिया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मनोज राय (संपर्क प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र) ने संघ के शताब्दी वर्ष की कठिन और दुर्गम यात्रा का बोध स्वयंसेवकों को कराया। उन्होंने कहा कि RSS की शताब्दी यात्रा डॉ. हेडगेवार की लोक नैतिकता और विचार साझेदारी की परंपरा का परिणाम है। संघ को व्यक्तिगत महत्वकांक्षा से ऊपर उठाकर वैचारिक साक्षरता और आदर्श आचरण पर खड़ा किया गया है।

    मनोज राय ने पंचपरिवर्तन और शाखा विस्तार के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी और स्वयंसेवकों को निर्देशित किया कि हर हिंदू परिवार से व्यक्तिगत संपर्क कर शाखा में नई सदस्यता सुनिश्चित की जाए।कार्यक्रम में मंच पर वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार शर्मा और नगर संघ चालक कैलाश उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नगर कार्यवाहक प्रदीप और बस्ती प्रमुख मनोज राय ने किया।

    पदसंचलन मोतीनगर से शुरू होकर ब्लंट्सक्वायर, मवैया होते हुए पुनः नेहरू नगर पार्क में संपन्न हुआ। रास्ते में उपस्थित नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों के अलावा मातृशक्ति और वरिष्ठ नागरिकों की भी अच्छी खासी संख्या मौजूद रही।

    कार्यक्रम ने न केवल RSS के अनुशासन और संगठन शक्ति को प्रदर्शित किया, बल्कि हिंदू समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश को भी मजबूती प्रदान की। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने शस्त्रपूजन और विजयदशमी उत्सव के महत्व को समझते हुए इसे पूर्ण भक्ति और समर्पण के साथ संपन्न किया।

  • विजयदशमी के अवसर पर ऐशबाग रामलीला मैदान में रावण दहन देखने पहुंची हजारों की भीड़

    विजयदशमी के अवसर पर ऐशबाग रामलीला मैदान में रावण दहन देखने पहुंची हजारों की भीड़

    लखनऊ में विजयदशमी का पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। ऐशबाग रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला में इस बार 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का भव्य दहन किया गया। जैसे ही प्रभु श्रीराम ने रावण पर बाण चलाया, पूरे मैदान में “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंज उठे और आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा। इस बार रामलीला समिति ने पुतले को इस सोच के साथ जलाया कि विदेशी निर्भरता, नक्सलवाद और जातिवाद जैसी बुराइयों का नाश हो।

    हर साल की तरह इस साल भी रामलीला में हजारों श्रद्धालु और दर्शक शामिल हुए। भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन और पुलिस ने कड़े इंतज़ाम किए थे। मंच पर रामलीला के पात्रों ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीला का अद्भुत मंचन किया, जिसे देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे।

    रामलीला के अध्यक्ष हरीश चंद्र अग्रवाल के अनुसार, ऐशबाग की रामलीला सबसे बड़ी और प्रसिद्ध है और यह कई सौ सालों से आयोजित होती आ रही है। रामलीला में बंगाल और स्थानीय 250 से 300 कलाकार भाग लेते हैं। पिछले पांच सालों से समिति केवल रावण के पुतले का दहन करती है, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले नहीं जलाए जाते। ऐसा इसलिए क्योंकि मेघनाथ और कुंभकर्ण ने रावण के अहंकार में माता सीता और राम से माफी मांगने की कोशिश की थी, पर रावण वशीभूत और अहंकारी था। मेघनाथ और कुंभकर्ण ने अपने पिता और बड़े भाई की आज्ञा का पालन करते हुए बलिदान दिया। इसीलिए केवल अहंकारी रावण का वध किया जाता है।

    इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाया बल्कि आधुनिक समाज में बुराइयों के खिलाफ संदेश भी दिया। ऐशबाग रामलीला मैदान की यह परंपरा हजारों श्रद्धालुओं के लिए हर साल आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।