Nation Now Samachar

Tag: VratKatha

  • करवा चौथ 2025: निर्जला व्रत, चंद्र दर्शन और व्रत कथा का महत्व

    करवा चौथ 2025: निर्जला व्रत, चंद्र दर्शन और व्रत कथा का महत्व

    करवा चौथ 2025 -कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महाव्रत माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जो महिलाएं इस व्रत को करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य मिलता है और उनके जीवनसाथी स्वस्थ रहते हैं।

    करवा चौथ निर्जला व्रत है, यानी महिलाएं पूरे दिन जल और अन्न का त्याग करती हैं। व्रत की शुरुआत सुबह सरगी खाने के बाद होती है और दिनभर निर्जल रहकर शाम को चंद्र दर्शन और पूजन के साथ व्रत पूर्ण होता है।

    इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, विशेषकर लाल रंग को शुभ मानते हुए। घर में शिव-पार्वती, गणेश और करवा माता की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। व्रत के दौरान क्रोध से बचना, मन को शांत रखना और दिन में सोने से परहेज करना जरूरी है। जरूरतमंदों को सहायता या सुहाग का सामान दान करना भी शुभ माना जाता है।

    करवा चौथ की कथा

    व्रत कथा वीरावती नाम की महिला से जुड़ी है। पहले व्रत में दिनभर भूखी-प्यासी रहने पर वह बेहोश हो गई। उसके भाई ने झूठा चंद्रमा दिखाकर व्रत तोड़वाया। इस अधूरी निष्ठा के कारण उसके पति की मृत्यु हो गई। वीरावती ने माता से प्रार्थना की और अगली बार विधिपूर्वक व्रत किया, जिससे उसके पति को जीवनदान मिला। कथा यह सिखाती है कि व्रत में छल या अधूरी निष्ठा नहीं होनी चाहिए।इस वर्ष करवा चौथ 2025, 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। व्रत का पालन करते समय सावधानी और स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • हरितालिका तीज 2025: व्रत कथा,महत्व और पूजा विधि | 26 अगस्त का शुभ दिन जानें सब कुछ

    हरितालिका तीज 2025: व्रत कथा,महत्व और पूजा विधि | 26 अगस्त का शुभ दिन जानें सब कुछ

    हरितालिका तीज 2025 -सोमवार को नहाय खाय के साथ हरितालिका तीज की शुरुआत हो गई है. त्योहार कल यानि 26 अगस्त को मनाया जाएगा. महिलाएं भगवान की पूजा के साथ व्रत का आरंभ करेंगी और कल महादेव और मां पार्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना करेंगी और अखंड सौभाग्य और सुख समृद्धि की कामना करेंगी. चलिए जानते हैं क्यों मनाई जाती है हरतालिका तीज क्या रहेगा शुभ मुहूर्त और इसे लेकर पौराणिक मान्यता क्या है?

    हरतालिका तीज कब और क्यों मनाई जाती है? हरितालिका तीज 2025
    हरतालिका तीज इस साल 26 अगस्त, मंगलवार को मनाई जा रही है. यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है. मान्यता है कि इस दिन मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और सुहाग की रक्षा के लिए किया जाता है.

    क्या इस व्रत की शुरुआत एक दिन पहले होती है? हरितालिका तीज 2025
    हरतालिका तीज का पर्व दो दिन का होता है. 25 अगस्त को नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है. महिलाएं स्नान कर शुद्ध भोजन बनाती हैं, भगवान को भोग लगाकर खुद भोजन करती हैं. इसके साथ ही व्रत की शुरुआत हो जाती है.

    व्रत के दिन महिलाएं क्या करती हैं? हरितालिका तीज 2025
    26 अगस्त को महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं यानी पूरे दिन ना तो अन्न ग्रहण करती हैं, ना जल. वे सोलह श्रृंगार करके मां पार्वती और भगवान शिव की विधिविधान से पूजा करती हैं. पूजा में मिट्टी की मूर्तियां, सुहाग की सामग्री और व्रत कथा का विशेष महत्व होता है.

    पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा? हरितालिका तीज 2025
    इस बार हरतालिका तीज की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त प्रातः 5:56 से 8:31 बजे तक रहेगा. इस दौरान पूजा करने से विशेष फल मिलता है.

    इस व्रत की पौराणिक मान्यता क्या है?हरितालिका तीज 2025
    पौराणिक कथा के अनुसार, जब मां पार्वती को पता चला कि उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया गया है, तो वे अपनी सखी के साथ घने जंगल में चली गईं और भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप करने लगीं. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया. तभी से इस व्रत की परंपरा शुरू हुई.

    क्या कुंवारी लड़कियां भी यह व्रत कर सकती हैं? हरितालिका तीज 2025
    हां, इस व्रत को विवाह योग्य कन्याएं भी करती हैं ताकि उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिले. कहा जाता है कि मां पार्वती की तरह अगर यह व्रत श्रद्धा से किया जाए, तो भगवान शिव जैसे वर की प्राप्ति होती है.

    व्रत के दौरान क्या सावधानियां रखनी चाहिए?हरितालिका तीज 2025
    व्रत के दिन पूरी शुद्धता और संयम का पालन जरूरी है. महिलाएं गुस्सा न करें, विवाद से बचें और व्रत कथा जरूर सुनें. पूजा के बाद भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है.

    इस पर्व का महत्व किन क्षेत्रों में ज्यादा है?हरितालिका तीज 2025
    हरतालिका तीज का व्रत खासतौर पर उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है. यहां की महिलाएं इसे अपना सबसे खास और कठिन व्रत मानती हैं. हरतालिका तीज सिर्फ एक व्रत नहीं, श्रद्धा, आस्था और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है. मां पार्वती जैसी निष्ठा और प्रेम के साथ किया गया यह व्रत, महिलाओं को न सिर्फ अखंड सौभाग्य देता है, बल्कि परिवार में सुख-शांति भी लाता है.