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  • CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने विपक्षी दलों, खासतौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि काशी में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्य कांग्रेस को पसंद नहीं आ रहे हैं, इसलिए वह लगातार भ्रामक और झूठे प्रचार के जरिए देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

    सीएम योगी ने यह बातें वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर काशी को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी आज विकास की एक नई गाथा लिख रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। इन परियोजनाओं से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

    सीएम योगी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके निर्माण के समय कुछ लोगों ने खंडित प्रतिमाओं को दिखाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि उस समय भी कांग्रेस और उसके समर्थकों ने झूठा प्रचार किया, लेकिन आज सच्चाई सबके सामने है। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 10 से 15 हजार तक सीमित थी।

    मुख्यमंत्री ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण और विकास कार्यों को लेकर भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि घाट के विकास को लेकर अनर्गल बयानबाजी की जा रही है, जबकि काशी की जनता भली-भांति जानती है कि सरकार विकास और विरासत दोनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक परंपरा से छेड़छाड़ नहीं की जा रही है।

    सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग भ्रामक जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार अपने विकास एजेंडे से पीछे हटने वाली नहीं है।

    वहीं मुख्यमंत्री योगी के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि क्या ये बातें काशी के घाट पर जाकर काशीवासियों की आंखों में आंखें डालकर कही जा सकती हैं। उन्होंने इसे सवाल नहीं, बल्कि चुनौती बताया।

    कुल मिलाकर, वाराणसी में चल रहे विकास कार्यों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। जहां सरकार इसे विकास और विरासत का संतुलन बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।

  • भाजपा नेता रवि सतीजा बोले अखिलेश दुबे को बचा रहे IPS अमिताभ यश, राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु

    भाजपा नेता रवि सतीजा बोले अखिलेश दुबे को बचा रहे IPS अमिताभ यश, राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु

    कानपुर।कानपुर में चल रहे चर्चित अखिलेश दुबे कांड को लेकर अब राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा नेता रवि सतीजा ने IPS अधिकारी अमिताभ यश पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे अखिलेश दुबे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। सतीजा ने आरोप लगाया कि पिछले दो महीने से पूरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

    भाजपा नेता रवि सतीजा ने कहा कि उन्होंने इस प्रकरण में बार-बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डीजीपी और पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कार्रवाई ठप है। उन्होंने कहा, “अगर न्याय नहीं मिला तो मैं राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग करूंगा। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, और निष्पक्ष जांच की जगह दबाव बनाया जा रहा है।”

    इस मामले में आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने भी केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से CBI जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि रवि सतीजा ने सार्वजनिक मंच पर पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार का हवाला देते हुए बताया था कि IPS अमिताभ यश आरोपी अखिलेश दुबे को बचा रहे हैं। ठाकुर ने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है ताकि पुलिस की साख पर कोई दाग न लगे।

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला कानपुर में सत्ता, प्रशासन और पुलिस तंत्र के बीच टकराव का रूप ले चुका है। जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं में भी इस घटना को लेकर नाराजगी है। अब सभी की निगाहें केंद्र और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि क्या इस मुद्दे पर CBI जांच या विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी या नहीं।

  • Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University में छात्रों पर लाठीचार्ज, प्रशासनिक गाज और राजनीतिक विडंबना

    Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University में छात्रों पर लाठीचार्ज, प्रशासनिक गाज और राजनीतिक विडंबना

    Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University

    बाराबंकी की रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ हुई बर्बरता का मामला सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँच गया है। छात्रों को बेरहमी से पीटने वाले पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन इस घटना ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह लाठीचार्ज केवल एक हिंसक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी तस्वीर है जहाँ शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है और एक बड़े राजनीतिक संगठन की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आखिर क्या वजह थी कि चार साल से छात्रों की परीक्षा नहीं हुई? 2021 में मान्यता खत्म होने के बावजूद लाखों रुपये लेकर नए एडमिशन क्यों दिए गए? और इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा की आड़ में कौन सा बड़ा खेल खेला जा रहा था? यह रिपोर्ट इस पूरे मामले की परतें खोलती है।

    शिक्षण व्यवस्था की खुली पोल: छात्रों पर क्यों बरसी लाठियां?

    मामले की जड़ में रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी का एक गंभीर शैक्षणिक और प्रशासनिक कुप्रबंधन है। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी पिछले चार सालों से उनकी परीक्षाएं नहीं करवा रही थी, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया था। यह आरोप तब और भी गंभीर हो जाता है जब यह सामने आया कि यूनिवर्सिटी की मान्यता 2021 में ही खत्म हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद वह छात्रों से लाखों रुपये फीस लेकर एडमिशन देती रही।

    लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब छात्र अपनी डिग्री के लिए भटकने लगे और उनका भविष्य अंधकारमय दिखने लगा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया, अपनी आवाज उठाने का प्रयास किया। लेकिन, जब विरोध की यह आवाज प्रशासन तक पहुंची तो, छात्रों के आरोपों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पुलिस को बुलाकर उन्हें शांत कराने की कोशिश की। इसके बाद जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। पुलिस ने छात्रों पर बेरहमी से लाठियाँ भांजी, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।

    लाठीचार्ज के बाद का भयावह मंजर और सियासी हलचल

    पुलिस के इस हिंसक लाठीचार्ज में कम से कम 12 छात्र घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी हालात बदतर थे। अस्पताल में घायल छात्रों के लिए पर्याप्त बेड तक उपलब्ध नहीं थे, और वे दर्द से तड़पते रहे। यह स्थिति केवल पुलिस की क्रूरता नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को दर्शाती है।

    Barabanki university lathicharge

    जब हालात बेकाबू हो गए और प्रशासन पर सवाल उठने लगे, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। रात में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के आवास का घेराव किया, विरोध प्रदर्शन किया और दोषी अधिकारियों का पुतला दहन किया।

    यह घटना तब और भी ज्यादा चौंकाने वाली हो जाती है जब हम एबीवीपी की पृष्ठभूमि पर गौर करते हैं। एबीवीपी, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी और जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर आधारित है, आज दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। इस संगठन ने हमेशा छात्रों के अधिकारों, राष्ट्रवाद और शिक्षा के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाई है। भाजपा सरकार को सत्ता में लाने में भी इस संगठन की अहम भूमिका रही है। ऐसे में, उसी सरकार में पुलिस की लाठियों से एबीवीपी कार्यकर्ताओं का पिटना एक राजनीतिक विडंबना और प्रशासनिक चूक दोनों को उजागर करता है।

    सीएम योगी ने लिया संज्ञान, प्रशासनिक गाज गिरी

    जब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इस पर तत्काल और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम के दखल के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना शुरू हो गई।

    प्रशासनिक स्तर पर हुई प्रमुख कार्रवाइयां इस प्रकार हैं:

    • सीओ सिटी हर्षित चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
    • नगर कोतवाली प्रभारी और गदिया चौकी के तमाम पुलिसकर्मियों को उनकी लापरवाही और क्रूरता के कारण लाइन हाजिर कर दिया गया है।
    • इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    • कमिश्नर गौरव दयाल को यूनिवर्सिटी की मान्यता और वैधता की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया गया है, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि 2021 में मान्यता खत्म होने के बाद भी एडमिशन क्यों दिए गए।

    यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है, लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या सिर्फ अधिकारियों के निलंबन से इस तरह के मामलों में लगाम लग पाएगी?

    निष्कर्ष

    रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी की घटना ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में चल रही अनियमितताओं और छात्रों के शोषण की कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस शिक्षा व्यवस्था को युवाओं के भविष्य का निर्माण करना चाहिए, वही उनके लिए एक जाल बन गई। इस घटना ने प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवालिया निशान लगाए हैं, और राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।

    फिलहाल, जांच चल रही है और उम्मीद है कि दोषी अधिकारियों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। यह जरूरी है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता लाई जाए और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन को बख्शा न जाए। यह मामला भविष्य में सभी शिक्षण संस्थानों और प्रशासन के लिए एक सबक साबित होना चाहिए।

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    सोर्स : UP CM Yogi orders probe into lathi charge on ABVP workers in Barabanki, cop removed

  • UP Top News Today : घुमंतू जातियों के लिए गठित होगा बोर्ड : सीएम योगी

    UP Top News Today : घुमंतू जातियों के लिए गठित होगा बोर्ड : सीएम योगी

    लखनऊ, 31 अगस्त। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ‘विमुक्त जाति दिवस’ समारोह में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार घुमंतू और विमुक्त जातियों के कल्याण के लिए एक विशेष बोर्ड का गठन करेगी। इसके साथ ही इन समुदायों को कॉलोनी और मकान उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम होगा। UP Top News Today

    सीएम योगी ने कहा कि नट, बंजारा, बावरिया, सासी, कंजड़, कालबेलिया, सपेरा और जोगी जैसी जातियां भारत की वीर जातियां रही हैं। इन जातियों ने विदेशी हमलावरों, मुगलों और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। अंग्रेज इनसे भयभीत होकर 1871 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लेकर आए और इन्हें अपराधी घोषित कर दिया। यह कलंक 1952 तक बना रहा, लेकिन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रयासों से 31 अगस्त 1952 को इन जातियों को मुक्ति मिली। UP Top News Today

    सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार इन जातियों के लिए शिक्षा, आवास और कल्याण योजनाएं चला रही हैं।उन्होंने बताया –9 जिलों में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित हैं। 2 आवासीय आश्रम पद्धति विद्यालय शुरू हुए हैं। 101 आवासीय विद्यालय पहले से चल रहे हैं।264 अनुसूचित जाति छात्रावासों में विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वनटांगिया समाज को राजस्व गांव का दर्जा, मताधिकार, घर, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं दीं। इसी तरह मुसहर, कोल, थारू, गौड़, चेरो, सहरिया, कुम्हार, निषाद और राजभर समाज को भी सरकारी योजनाओं से लाभ मिल रहा है।उन्होंने मंच से ही समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को निर्देश दिया कि घुमंतू जातियों के लिए बोर्ड का गठन किया जाए। UP Top News Today

    योगी आदित्यनाथ ने कहा – “जैसे शामली और वनटांगिया समाज का मॉडल बना, उसी तरह घुमंतू जातियों के लिए भी योजनाएं लागू होंगी।” UP Top News Today

  • 11th International Yoga Day:गोरखपुर में सीएम योगी ने किया योग, दिया स्वस्थ भारत का संदेश

    11th International Yoga Day:गोरखपुर में सीएम योगी ने किया योग, दिया स्वस्थ भारत का संदेश

    11th International Yoga Day: विश्व भर में योग की महत्ता को बढ़ावा देने वाला 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस गोरखपुर में उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद रवि किशन शुक्ला ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, छात्र, चिकित्सक, और स्वयंसेवी संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    सांसद रवि किशन ने योग को भारत की अनमोल धरोहर बताते हुए कहा, “योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करने की कला है। यह भारत की संस्कृति का ऐसा उपहार है, जिसे आज विश्व ने अपनाया है।” उन्होंने लोगों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। 11th International Yoga Day

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से योग आज वैश्विक स्तर पर एक आंदोलन बन चुका है। योगी ने जोर देकर कहा, “योग स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच का आधार है, जो हमें समृद्ध और समर्थ भारत की ओर ले जाता है।”


    कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, नगर निगम के अधिकारी, और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी योगासनों का प्रदर्शन कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। सामूहिक योग सत्र के बाद सभी ने मिलकर “स्वस्थ भारत, समर्थ भारत” के लिए संकल्प लिया। 11th International Yoga Day

    इस आयोजन ने न केवल योग के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि गोरखपुरवासियों में एकता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने कहा, “ऐसे आयोजनों से हमारी युवा पीढ़ी योग के प्रति प्रेरित होती है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि गोरखपुर योग के इस उत्सव का हिस्सा बना।” 11th International Yoga Day

    गोरखपुर का यह योग कार्यक्रम एक बार फिर साबित करता है कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। आइए, हम सभी योग को अपनाकर स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दें। 11th International Yoga Day