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Tag: YOGI GOVERNMENT

  • YOGI GOVERNMENT: योगी सरकार का श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास पर फोकस

    YOGI GOVERNMENT: योगी सरकार का श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास पर फोकस

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर श्रम एवं सेवायोजन विभाग (YOGI GOVERNMENT) के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रमिक और उद्योगपति एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि विरोधी, इसलिए नीतियों को इस भावना के साथ तैयार किया जाए.

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक तरक्की प्रो-इंडस्ट्री और प्रो-श्रमिक दृष्टिकोण के संतुलन से ही सम्भव है. श्रम कानूनों को इस प्रकार सरल बनाया जाए जिससे उद्योगों को सुगमता हो, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि श्रमिकों का किसी भी प्रकार से शोषण न हो.

    उद्योग विस्तार-रोजगार सृजन- YOGI GOVERNMENT

    मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि “हर हाथ को काम देने के लिए हमें उद्योगों को सशक्त बनाना होगा.” औद्योगिक विस्तार ही अधिकाधिक रोजगार निर्माण का माध्यम है. उन्होंने कहा कि यदि उद्योग बंद होंगे तो कोई भी रोजगार सृजित नहीं हो सकेगा.

    साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी जोर दिया कि दुर्घटनाओं की स्थिति में श्रमिकों और उनके परिवारों को सुरक्षा और सम्मानजनक मानदेय के साथ बीमा सुरक्षा दी जाए. राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे श्रमिक हितैषी और उद्योग समर्थ राज्य बने.

    बाल श्रमिकों का पुनर्वासन और उज्जवल भविष्य

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रमिकों को आजीविका, शिक्षा और पुनर्वासन के लिए ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ और अन्य प्रायोजित योजनाओं से जोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि यह केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास है. उन्होंने अटल आवासीय विद्यालयों को देश में मॉडल के रूप में उभरने की बात कही और इनकी गुणवत्ता की मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने को भी कहा.

    श्रमिक अड्डों को बनाएं मॉडल हब

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिक अड्डों को मॉडल के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया. इन स्थानों पर डोरमेट्री, शौचालय, पेयजल, कैंटीन और ट्रेनिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. कैंटीन में चाय-नाश्ता और भोजन 5-10 रुपये में मिलना सुनिश्चित किया जाए.

    साथ ही उन्होंने कहा कि असंगठित श्रमिकों की स्किल मैपिंग कर न्यूनतम मानदेय की गारंटी दी जाए, ताकि यह कार्यबल संगठित श्रम शक्ति में परिवर्तित हो सके.

    विदेश जाने वाले श्रमिकों के लिए विशेष योजना

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विदेश में रोजगार के लिए जाने वाले निर्माण श्रमिकों को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ गंतव्य देश की भाषा का भी प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए. यह उनकी कार्यक्षमता के साथ सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी जरूरी है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर निजी अस्पतालों को कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESI) से जोड़ा जाए ताकि संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें.

    उत्तर प्रदेश बना ‘अचीवर स्टेट’

    बैठक में जानकारी दी गई कि आजादी के बाद से 2016 तक प्रदेश में 13,809 कारखाने पंजीकृत थे, जबकि पिछले 9 वर्षों में 13,644 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है. यह लगभग 99% की वृद्धि को दर्शाता है. भारत सरकार के BRAP (Business Reforms Action Plan) रिकमेंडेशन में श्रम विभाग को ‘अचीवर स्टेट’ का दर्जा मिला है, जिसकी सराहना मुख्यमंत्री ने की.

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  • भ्रष्टाचार, साइबर फ्रॉड और महंगाई ने जनता को त्रस्त किया- अखिलेश यादव- AKHILESH YADAV SLAMS YOGI GOVT

    भ्रष्टाचार, साइबर फ्रॉड और महंगाई ने जनता को त्रस्त किया- अखिलेश यादव- AKHILESH YADAV SLAMS YOGI GOVT

    लखनऊ: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस (AKHILESH YADAV SLAMS YOGI GOVT) कर योगी सरकार पर जमकर हमला बोला. इस दौरान उन्होंने छात्र सभा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी चुनाव की रणनीति पर विचार किया और उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए. अखिलेश यादव ने कहा कि, “प्रदेश में तमाम ऐसे कार्य हो रहे हैं जो केवल अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किए जा रहे हैं. भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, जिसके चलते महंगाई भी आसमान छू रही है. आम आदमी का जीवन मुश्किल होता जा रहा है, और सरकार आंखें मूंदे बैठी है.”

    उन्होंने राज्य में बढ़ते साइबर क्राइम पर चिंता जताते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश साइबर फ्रॉड के मामलों में नंबर वन हो गया है. आए दिन लोगों से ऑनलाइन ठगी हो रही है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रखकर बैठी है. न कोई ठोस कार्रवाई हो रही है और न ही कोई जागरूकता अभियान.” (AKHILESH YADAV SLAMS YOGI GOVT)

    चुनाव को बताया ‘योगी बनाम प्रतियोगी’
    अखिलेश यादव ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा, “इस बार का चुनाव ‘योगी बनाम प्रतियोगी’ होगा. जो युवा पढ़े-लिखे हैं, जो रोजगार की मांग कर रहे हैं, जो शिक्षा में गुणवत्ता चाहते हैं – वे सभी सरकार को हटाने में जुटेंगे. यह चुनाव बदलाव का चुनाव होगा.”

    सुरक्षा इंतजामों पर उठाए सवाल
    सड़क दुर्घटनाओं पर बोलते हुए अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा, “राज्य सुरक्षा के इंतजामों में फेल हो चुका है. सरकार को जो कदम उठाने चाहिए, वे नहीं उठा रही है, जिसकी वजह से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं.”

    छात्र सभा को दिए दिशा निर्देश
    छात्र सभा की बैठक में अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आपस में सम्मान और सहयोग का वातावरण बनाएं. उन्होंने कहा, “वीडियो और डिजिटल माध्यमों की ताकत को समझें और उसका सही इस्तेमाल करें. छात्र सभा को और सशक्त बनाने के लिए तकनीक का सहयोग जरूरी है.”

    स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार को घेरा
    अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा, “जिस जिले में सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री ने जनता दरबार लगाए हैं, वहां एम्स और मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा है. यह सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है.”

    आरक्षण और रोजगार एजेंडे से बाहर: अखिलेश
    अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “नौकरी और आरक्षण बीजेपी के एजेंडे में नहीं हैं. युवाओं को रोजगार देने के नाम पर सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी की जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है.”

    पर्यावरण को लेकर भी रखी बात
    अखिलेश ने लखनऊ के दो बड़े पार्कों का ज़िक्र करते हुए कहा, “लोहिया पार्क और जनेश्वर मिश्र पार्क में आपको अच्छी क्वालिटी का प्लांटेशन देखने को मिलेगा. हमारी सरकार ने पर्यावरण और हरियाली को लेकर गंभीर काम किए हैं.”

    अंतिम संदेश में युवाओं से जुड़ने का आह्वान
    अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि अब समय आ गया है जब देश के युवा जागरूक होकर निर्णय लें. उन्होंने कहा कि छात्र, बेरोजगार और शिक्षित वर्ग यदि एकजुट हो जाएं, तो बदलाव सुनिश्चित है. उन्होंने कहा, “हमारे कार्यकर्ता हर गली, हर कॉलेज और हर गाँव में छात्रों को जोड़ें और बदलाव की मशाल जलाएं.”

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  • लखनऊ: योगी सरकार की बड़ी पहल, सस्ती दरों पर बिजली खरीदेगा उत्तर प्रदेश- YOGI GOVERNMENT

    लखनऊ: योगी सरकार की बड़ी पहल, सस्ती दरों पर बिजली खरीदेगा उत्तर प्रदेश- YOGI GOVERNMENT

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार (YOGI GOVERNMENT) ने राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है. राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में मंगलवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसके तहत सरकार ने 1600 मेगावाट की तापीय परियोजना से 1500 मेगावाट बिजली 25 वर्षों तक सस्ती दर पर खरीदने का फैसला किया है. यह निर्णय उत्तर प्रदेश को दीर्घकालिक ऊर्जा संकट से राहत देने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी भारी लाभ दिलाएगा.

    निजी कंपनी से होगी बिजली की खरीद
    बिजली खरीद की यह पूरी प्रक्रिया बिडिंग के माध्यम से की गई है, जिसमें सबसे कम टैरिफ (5.38 रुपये प्रति यूनिट) देने वाली एक निजी कंपनी को चुना गया है. इस डील के तहत यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को 25 वर्षों में करीब 2958 करोड़ रुपये की बचत होगी. यह सौदा उत्तर प्रदेश में मौजूदा और प्रस्तावित तापीय परियोजनाओं की तुलना में कहीं अधिक किफायती है.

    2030-31 से मिलने लगेगी बिजली
    सरकार की योजना के मुताबिक यह परियोजना वित्तीय वर्ष 2030-31 तक चालू हो जाएगी और उसी समय से 1500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी. यह बिजली 6.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगी, जो जवाहरपुर, ओबरा, घाटमपुर और पनकी जैसी परियोजनाओं की तुलना में काफी सस्ती होगी, जहां बिजली की दरें 6.60 रुपये से लेकर 9 रुपये प्रति यूनिट तक हैं.

    सार्वजनिक संयंत्रों से भी सस्ती बिजली
    ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि यह सौदा न केवल निजी कंपनियों की पिछली डील्स से सस्ता है, बल्कि उत्तर प्रदेश के सार्वजनिक पावर प्लांट्स से खरीदी जा रही बिजली से भी किफायती है. उन्होंने बताया कि बिजली की दरें पहले की तुलना में काफी कम होंगी और यह राज्य के उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात होगी.

    DBFOO मॉडल के तहत परियोजना
    इस पूरी परियोजना को DBFOO मॉडल के तहत लागू किया जाएगा. DBFOO का मतलब है Design, Build, Finance, Own और Operate. इस मॉडल के तहत परियोजना का निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और स्वामित्व निजी कंपनी के पास रहेगा, जबकि सरकार कोयला लिंक देती है और बिजली खरीदती है. इस मॉडल से सरकारी निवेश की जरूरत नहीं होती, और राज्य को कम कीमत पर बिजली मिलती है.

    बिडिंग प्रक्रिया का विवरण
    ऊर्जा विभाग द्वारा जुलाई 2024 में रिक्वेस्ट फॉर क्वालीफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें 7 कंपनियों ने भाग लिया. इसके बाद 5 कंपनियों ने फाइनेंशियल बिड में हिस्सा लिया, जिनमें से सबसे कम दर वाली कंपनी को चुना गया. इस कंपनी ने फिक्स्ड चार्ज 3.727 रुपये और फ्यूल चार्ज 1.656 रुपये प्रति यूनिट तय किया, जिससे कुल टैरिफ 5.38 रुपये प्रति यूनिट बनता है.

    2033-34 तक बढ़ेगी बिजली की मांग
    केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्ययन के अनुसार, राज्य को वर्ष 2033-34 तक लगभग 10,795 मेगावाट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की जरूरत होगी. इसके अलावा, 23,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लिए भी एक रोडमैप तैयार किया गया है.

    क्या होगा लाभ?
    इस नई नीति से उत्तर प्रदेश में उद्योगों को निर्बाध और किफायती बिजली मिल सकेगी. इससे राज्य की औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. वहीं, आम नागरिकों को भी बिजली की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है.

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  • लखनऊ को मिलेगी नई पहचान: सीएम योगी के निर्देश पर राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल और अंतरराष्ट्रीय एक्जीबिशन सेंटर का निर्माण तेज- YOGI GOVERNMENT

    लखनऊ को मिलेगी नई पहचान: सीएम योगी के निर्देश पर राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल और अंतरराष्ट्रीय एक्जीबिशन सेंटर का निर्माण तेज- YOGI GOVERNMENT

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (YOGI GOVERNMENT) के नेतृत्व में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की कई परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल लखनऊ को एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है, बल्कि प्रदेश के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देना है.

    राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में
    लखनऊ के बसंत कुंज योजना के अंतर्गत बन रहे राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का निर्माण कार्य लगभग 90% पूरा हो चुका है. इस परियोजना का उद्देश्य देश की महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है. यहां राष्ट्रवादी नेताओं की विशाल मूर्तियां स्थापित की जा रही हैं, जिनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी बाजपेयी की 63 फीट ऊंची मूर्तियां शामिल हैं.

    राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल में एक संग्रहालय, रैली स्थल, स्टेज, ओपेन थियेटर और हरियाली से भरे लैंडस्केप की योजना भी है. हालांकि, वर्तमान में क्युरेशन, आर्ट वर्क, लैंडस्केपिंग और हार्टीकल्चर के कुछ कार्य बाकी हैं, जिनके पूर्ण होने के बाद यह स्थल आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा. यह स्थल युवाओं और पर्यटकों के लिए एक प्रेरणा का केंद्र बनेगा, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव से जुड़े प्रदर्शन किए जाएंगे. इस परियोजना के पूरा होने के बाद, राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल लखनऊ के पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा.

    अंतरराष्ट्रीय एक्जीबिशन और कन्वेंशन सेंटर का निर्माण तेज़ी से जारी
    लखनऊ में बन रहे अंतरराष्ट्रीय एक्जीबिशन और कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कार्य भी अपनी पूरी रफ़्तार पकड़ चुका है. यह परियोजना 32.50 एकड़ भूमि पर विकसित हो रही है, और अगले 2 वर्षों में इसे पूरा कर लिया जाएगा. इस परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है और इसका कॉन्सेप्ट प्लान भी स्वीकृत हो चुका है.

    यह केंद्र वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और व्यापार मेले आयोजित करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. इससे लखनऊ में वैश्विक स्तर पर व्यापार और निवेश आकर्षित करने के अवसर उत्पन्न होंगे. इस केंद्र का निर्माण प्रदेश में नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा और उत्तर प्रदेश की वन ट्रिलियन इकॉनमी बनाने के लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा.

    लखनऊ का भविष्य उज्जवल
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि ये दोनों परियोजनाएं न केवल लखनऊ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएंगी, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेंगी. अंतरराष्ट्रीय एक्जीबिशन और कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से लखनऊ एक प्रमुख वैश्विक व्यापार और निवेश केंद्र के रूप में उभर कर सामने आएगा. ये दोनों परियोजनाएं लखनऊ और उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, जो राज्य के पर्यटन, रोजगार, और वैश्विक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.

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  • लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 24 आईपीएस अधिकारियों के तबादले, वाराणसी के IG मोहित गुप्ता बने सचिव गृह- IPS OFFICERS TRANSFERRED IN UP

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 24 आईपीएस अधिकारियों के तबादले, वाराणसी के IG मोहित गुप्ता बने सचिव गृह- IPS OFFICERS TRANSFERRED IN UP

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर देर रात तबादला एक्सप्रेस चलाई है. इस बार कुल 24 आईपीएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया गया है, जिसमें कई ज़िलों के एसएसपी और एसपी, आईजी व डीआईजी शामिल हैं. इस तबादले में वाराणसी परिक्षेत्र के आईजी मोहित गुप्ता को बड़ी जिम्मेदारी मिली है, उन्हें उत्तर प्रदेश शासन में सचिव गृह के पद पर नियुक्त किया गया है. (IPS OFFICERS TRANSFERRED IN UP)

    योगी सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, सहारनपुर के डीआईजी अजय कुमार साहनी को बरेली परिक्षेत्र का डीआईजी बनाया गया है, जबकि प्रयागराज में कुंभ मेले की सुरक्षा संभाल रहे वैभव कृष्ण को वाराणसी परिक्षेत्र का आईजी नियुक्त किया गया है. इसके अलावा, मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक सिंह को सहारनपुर परिक्षेत्र का डीआईजी बना दिया गया है.

    जिलों के एसएसपी में बड़े बदलाव
    अयोध्या के एसएसपी राजकरण नय्यर को गोरखपुर भेजा गया है, जबकि गोरखपुर के एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर अब अयोध्या के नए एसएसपी होंगे. इटावा के एसएसपी संजय कुमार को मुजफ्फरनगर का जिम्मा सौंपा गया है और पीएसी लखनऊ के सेनानायक अनूप कुमार सिंह को फतेहपुर का नया एसपी बनाया गया है.

    इसके अलावा कौशांबी के एसपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव को इटावा का एसएसपी बनाया गया है और गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में तैनात डीसीपी राजेश कुमार द्वितीय को कौशांबी का एसपी बनाया गया है. फतेहपुर के एसपी धवल अग्रवाल को गाजियाबाद कमिश्नरेट में डीसीपी नियुक्त किया गया है. वहीं, संत कबीर नगर के एसपी सत्यजीत गुप्ता को कानपुर कमिश्नरेट में डीसीपी बनाया गया है.

    रेलवे, भ्रष्टाचार निवारण और टेक्निकल सेवाओं में भी तबादले
    गोरखपुर रेलवे में तैनात एसपी संदीप कुमार मीना को संत कबीर नगर का नया एसपी बनाया गया है, जबकि भ्रष्टाचार निवारण संगठन मुख्यालय लखनऊ में तैनात एसपी लक्ष्मीनिवास मिश्र को गोरखपुर रेलवे का नया एसपी बनाया गया है.

    वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले भी अहम
    एडीजी स्तर के अफसरों में नीरा रावत को अब यूपी 112 की ज़िम्मेदारी के साथ-साथ प्रशासन का प्रभार नहीं मिलेगा, वे सिर्फ यूपी 112 की जिम्मेदारी देखेंगी. प्रशांत कुमार द्वितीय को एडीजी लखनऊ से हटाकर एडीजी प्रशासन, पुलिस मुख्यालय लखनऊ की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

    सीआईएसएफ से लौटे केएस इमैनुएल को पुलिस महानिरीक्षक, आर्थिक अपराध संगठन, लखनऊ बनाया गया है. उपेंद्र कुमार अग्रवाल को आईजी सुरक्षा से हटाकर आईजी लखनऊ परिक्षेत्र नियुक्त किया गया है.

    अन्य तबादले इस प्रकार हैं:
    रोहन पी कनय: आईजी टेक्निकल सर्विस से डीआईजी पीटीएस गोरखपुर
    राजीव नयन मिश्रा: डीआईजी पीएसी प्रयागराज से अपर पुलिस आयुक्त गौतम बुद्ध नगर
    शिवहरि मीणा: गौतम बुद्ध नगर से डीआईजी टेक्निकल सर्विस
    सत्येंद्र कुमार: डीआईजी प्रतीक्षारत से डीआईजी पीटीएस मेरठ
    राजेश कुमार सक्सेना: पीटीएस सुल्तानपुर से डीआईजी सुरक्षा मुख्यालय
    विकास कुमार वैद्य: डीआईजी स्थापना से उपनिदेशक, पुलिस अकादमी मुरादाबाद

  • सीएम योगी का बड़ा फैसला: अब तय समयसीमा में पास होंगे भवन मानचित्र, विकास योजनाओं में आएगी तेजी- YOGI GOVERNMENT

    सीएम योगी का बड़ा फैसला: अब तय समयसीमा में पास होंगे भवन मानचित्र, विकास योजनाओं में आएगी तेजी- YOGI GOVERNMENT

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (YOGI GOVERNMENT) ने राज्य के शहरी विकास कार्यों में तेजी लाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक के बाद एक अहम फैसले लिए हैं. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों में लंबित भवन मानचित्रों के मामलों की तत्काल समीक्षा की जाए और एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनका निस्तारण किया जाए. मुख्यमंत्री का यह निर्देश एक बड़ी प्रशासनिक पहल मानी जा रही है, जिससे जनता को राहत मिलने की पूरी उम्मीद है.

    बार-बार की आपत्ति पर रोक
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में साफ तौर पर कहा कि भवन मानचित्रों पर बार-बार आपत्तियां जताना गलत है. उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों को एक ही बार में आपत्तियों के साथ निपटाया जाए और बार-बार फाइलें रोकने की प्रवृत्ति पर रोक लगे. इस आदेश से प्राधिकरणों में कार्यरत कर्मचारियों की जवाबदेही तय होगी और आम नागरिकों को राहत मिलेगी.

    GIS आधारित मास्टर प्लान को जल्द अनुमोदित करें
    मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य के नगरों में जीआईएस आधारित मास्टर प्लान को मौजूदा माह की समाप्ति से पहले अनुमोदित कराया जाए. उनका कहना था कि शहरी नियोजन, आवासीय विकास, अधोसंरचना और डिजिटल प्रबंधन के कार्यों को समन्वित दृष्टिकोण से लागू करना अब आवश्यक हो गया है. जीआईएस बेस्ड प्लानिंग से योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी.

    सीएम योगी ने विकास प्राधिकरणों दिए निर्देश- (UP GOVERNMENT)

    कानपुर, आगरा और लखनऊ मेट्रो को मिलेगी रफ्तार
    बैठक में मेट्रो परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर 1 और 2 का कार्य इस वर्ष दिसंबर तक पूरा हो जाएगा. मोतीझील से कानपुर सेंट्रल स्टेशन तक 6.7 किलोमीटर का अंडरग्राउंड सेक्शन बनकर तैयार हो चुका है. वहीं, आगरा मेट्रो के पहले कॉरिडोर को दिसंबर 2025 तक और दूसरे कॉरिडोर को 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. लखनऊ मेट्रो के चारबाग से बसंतकुंज तक के सेक्शन पर कार्य तेजी से चल रहा है. मुख्यमंत्री ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के सीमा विस्तार और जेपीएनआईएसी (JPNAIC) को जल्द हस्तांतरित करने के भी निर्देश दिए.

    इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर बनेगा नई पहचान
    लखनऊ में 900 करोड़ की लागत से इंटरनेशनल एक्जीबिशन-कम-कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कार्य दो वर्षों में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. यह परियोजना 32.50 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही है और मुख्यमंत्री का मानना है कि यह नया सेंटर “नए लखनऊ की पहचान” बनेगा. इस प्रोजेक्ट के माध्यम से राज्य को एक वैश्विक स्तर की प्रदर्शनी और सम्मेलन सुविधा मिलेगी.

    यूपी-एससीआर के डीपीआर में नहीं होनी चाहिए देरी
    मुख्यमंत्री ने यूपी-एससीआर परियोजना की भी समीक्षा की, जिसमें लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी जैसे जिले शामिल हैं. यह परियोजना कुल 27,826 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को कवर करती है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस परियोजना की डीपीआर की प्रक्रिया में कोई भी देरी न हो और जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार की जाए.

    आगामी तीन महीनों की कार्ययोजना भी हुई तय
    समीक्षा बैठक में आगामी तीन महीनों की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई. इसमें उत्तर प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम-2025, लैंड पूलिंग पॉलिसी-2025, और भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2025 को लागू करने की प्रक्रिया शामिल है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की जाएंगी.

    शहरी विस्तार योजना को मिलेगा बढ़ावा
    मुख्यमंत्री ने शहरी विस्तार/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अनुमोदित परियोजनाओं को जून 2025 से दिसंबर 2025 तक चरणबद्ध तरीके से शुरू करने के निर्देश दिए. झांसी, बरेली, अलीगढ़, सहारनपुर, आगरा (ककुआ), कानपुर (न्यू कानपुर सिटी योजना), मथुरा (ट्रांसपोर्ट नगर), मुरादाबाद (डिडौसी), बुलंदशहर, गाज़ियाबाद, मेरठ और लखनऊ जैसे शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है. इन योजनाओं की समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए.

    चार महायोजनाएं इसी माह हों अनुमोदित
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीआईएस आधारित महायोजना संरचना के अंतर्गत प्रदेश के 59 नगरों की महायोजनाएं तैयार की जा रही हैं, जिनमें से 42 को अनुमोदन मिल चुका है. शेष चार महायोजनाएं—झांसी, मैनपुरी, फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ और बहराइच—के अनुमोदन की प्रक्रिया को इसी महीने के भीतर पूरा कर लिया जाए.

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