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बहराइच में भेड़ियों का आतंक: आंगन से मासूम को उठा ले गया आदमखोर, पीछा करने पर झाड़ी में छोड़कर भागा

बहराइच में भेड़ियों का आतंक, आंगन से 3 साल की बच्ची को उठा ले गया आदमखोर

बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में आदमखोर भेड़ियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। कैसरगंज इलाके से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां देर शाम घर के आंगन में खेल रही 3 साल की मासूम बच्ची को भेड़िया उठा ले गया। गनीमत रही कि परिजनों ने साहस दिखाते हुए शोर मचाया और भेड़िए का पीछा किया, जिससे घबराकर भेड़िया बच्ची को पास की झाड़ियों में घायल अवस्था में छोड़कर भाग गया।घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। बच्ची को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची के शरीर पर भेड़िए के दांतों और नाखूनों के गहरे निशान हैं।

घरों तक पहुंचा आदमखोर

ग्रामीणों का कहना है कि भेड़िए अब जंगलों से निकलकर सीधे आबादी वाले इलाकों में घुस रहे हैं। पहले ये घटनाएं खेतों या रास्तों पर होती थीं, लेकिन अब घर के आंगन तक मासूम सुरक्षित नहीं हैं। कैसरगंज क्षेत्र में बीते कुछ हफ्तों से लगातार भेड़ियों की गतिविधियां देखी जा रही हैं।

पहले भी बन चुका है मासूम शिकार

बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह भी इसी इलाके में एक मासूम बच्चा भेड़िए का शिकार बन चुका है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं और बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे।

वन विभाग का सर्च ऑपरेशन जारी

वन विभाग ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। ड्रोन कैमरों, ट्रैप कैमरों और पिंजरे लगाकर आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। विभाग का दावा है कि जल्द ही भेड़ियों को पकड़ लिया जाएगा, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है।

ग्रामीणों में गुस्सा, सुरक्षा की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में अतिरिक्त वनकर्मी और पुलिस बल तैनात किया जाए। साथ ही रात के समय गश्त बढ़ाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं। लोगों का कहना है कि जब तक भेड़ियों को पकड़ा नहीं जाता, तब तक भय का माहौल बना रहेगा।बहराइच में लगातार हो रहे भेड़िया हमले प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक मासूम इन आदमखोरों का शिकार बनते रहेंगे?

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