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औरैया बिधूना में संतान न होने से परेशान महिला ने किया आत्मदाह का प्रयास, हालत गंभीर

बिधूना में संतान न होने से परेशान महिला ने लगाई आग, हालत गंभीर

संवाददाता अमित शर्मा औरैया जनपद के बिधूना क्षेत्र से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां संतान न होने को लेकर घर में चल रहे विवाद और तानों से परेशान एक महिला ने खुद को आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। गंभीर रूप से झुलसी महिला को पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसकी नाजुक हालत को देखते हुए सैफई स्थित रिम्स अस्पताल रेफर कर दिया गया है।

यह घटना कुदरकोट थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, कानपुर के शिवराजपुर निवासी गुलशन बानो का विवाह करीब पांच साल पहले कुदरकोट निवासी राशिद से हुआ था। शादी के इतने वर्षों बाद भी संतान न होने के कारण पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। बताया जा रहा है कि गुलशन बानो को इस बात को लेकर परिवार और समाज से लगातार ताने सुनने पड़ते थे, जिससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थी।

राशिद दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करता है, लेकिन पिछले करीब एक महीने से वह घर पर ही था। इसी दौरान संतान न होने की बात को लेकर पति-पत्नी के बीच फिर से विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि मानसिक रूप से आहत गुलशन बानो ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली। महिला के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह आग बुझाकर उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। घायल महिला को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐरवाकटरा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिया। चिकित्सकों के अनुसार महिला का काफी हिस्सा झुलस चुका है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बेहतर इलाज के लिए उसे तुरंत रिम्स सैफई रेफर कर दिया गया।

पुलिस का कहना है कि फिलहाल महिला का इलाज प्राथमिकता है। मामले की जांच की जा रही है और पीड़िता के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि महिला पर किस स्तर तक मानसिक दबाव बनाया जा रहा था।

यह घटना एक बार फिर समाज में महिलाओं पर संतान को लेकर बनाए जाने वाले दबाव और मानसिक उत्पीड़न की गंभीरता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में परिवार और समाज की संवेदनशीलता बेहद जरूरी है, ताकि कोई भी महिला खुद को इतना असहाय न समझे कि उसे ऐसा खौफनाक कदम उठाना पड़े।

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