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IIT Kanpur suicide: IIT कानपुर में Ph.D. छात्र की आत्महत्या: 18 घंटे में क्या बदला? कैंपस में फिर उठा मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल

IIT Kanpur suicide

IIT Kanpur suicide: कानपुर। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में गिने जाने वाले IIT कानपुर से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंस के 28 वर्षीय Ph.D. छात्र रामस्वरुप ईशराम ने मंगलवार दोपहर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे IIT कैंपस में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है। साथी छात्रों ने शाम को कैंडल मार्च निकालकर मृतक को श्रद्धांजलि दी।

18 घंटे पहले तक सब सामान्य था

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मौत से कुछ घंटे पहले तक रामस्वरुप की मानसिक स्थिति को लेकर कोई बड़ा खतरा नहीं बताया गया था। IIT कानपुर के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेई के अनुसार, मंगलवार शाम 4 बजे उनका अपॉइंटमेंट तय था। इतना ही नहीं, मौत से पहले रामस्वरुप की काउंसलर से भी बातचीत हुई थी, जिसमें सेल्फ हार्म का रिस्क बेहद कम बताया गया था।

मेधावी छात्र, फिर भी क्यों टूटा हौसला?

रामस्वरुप ईशराम एक मेधावी शोध छात्र थे और अपनी रिसर्च को लेकर आगे की योजना बना रहे थे। वह जल्द ही IIT कानपुर से बाहर जाकर अपना करियर आगे बढ़ाना चाहते थे। हालांकि, वे पिछले कुछ समय से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज भी करा रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार छात्र अंदर ही अंदर दबाव झेलते रहते हैं, जो अचानक घातक रूप ले सकता है।

25 महीनों में 9 आत्महत्याएं, सिस्टम पर सवाल

यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पिछले 25 महीनों में IIT कानपुर कैंपस में आत्महत्या का यह 9वां मामला है।
सिर्फ पिछले एक महीने में यह दूसरी आत्महत्या है, जिसने प्रशासन और काउंसलिंग सिस्टम दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

IIT कानपुर के आत्महत्या मामलों की सूची

  • दिसंबर 2023: शोध सहायक डॉ. पल्ल्वी चिल्का
  • जनवरी 2024: M.Tech छात्र विकास मीना
  • जनवरी 2024: Ph.D. छात्रा प्रियंका जायसवाल
  • अक्टूबर 2024: Ph.D. छात्रा प्रगति
  • फरवरी 2025: रिसर्च स्कॉलर अंकित यादव
  • अगस्त 2025: सॉफ्टवेयर डेवलपर दीपक चौधरी
  • अक्टूबर 2025: B.Tech छात्र धीरज सैनी
  • दिसंबर 2025: B.Tech छात्र जय सिंह मीना
  • जनवरी 2026: Ph.D. छात्र रामस्वरुप ईशराम

प्रशासन और विशेषज्ञ क्या कहते हैं

IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि छात्रों के लिए 24 घंटे काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध है, लेकिन छात्र अपनी परेशानियाँ खुलकर साझा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेई का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्या कोई कमजोरी नहीं, बल्कि समय पर बातचीत और सहयोग से हर समस्या का समाधान संभव है।

बड़ा सवाल

जब काउंसलिंग, अपॉइंटमेंट और बातचीत सब मौजूद थी, तो फिर आखिर वह कौन-सा दबाव था जिसने एक होनहार छात्र को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया?

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