REPORT- चन्द्रशेखर नामदेव महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के कबरई विकासखंड से सिंचाई विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बरीपुरा मौजा में नहर का पानी अनियंत्रित रूप से छोड़े जाने के कारण एक दर्जन से अधिक किसानों की कई बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। किसानों का आरोप है कि पूर्व ग्राम प्रधान ने अपने निजी स्वार्थ के चलते नहर को जरूरत से ज्यादा खुलवा दिया, जिससे खेत तालाब में तब्दील हो गए।

अनियंत्रित नहर बनी किसानों के लिए आफत
जानकारी के अनुसार, बरीपुरा नहर से अचानक अत्यधिक मात्रा में पानी छोड़ा गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि नहर का पानी आसपास के खेतों में घुस गया। देखते ही देखते किसानों की लगभग 12 बीघा गेहूं की खड़ी फसल पानी में डूब गई। कई खेतों में पानी का स्तर चार फीट तक पहुंच गया, जिससे फसल के पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है।
पूर्व प्रधान पर गंभीर आरोप
डढ़हत माफ गांव के किसानों ने आरोप लगाया है कि पूर्व ग्राम प्रधान ने अपने फायदे के लिए नहर के फाटक क्षमता से अधिक खुलवा दिए। किसानों का कहना है कि पानी छोड़ने से पहले न तो कोई सूचना दी गई और न ही हालात का आकलन किया गया। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा, जिनकी महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
पीड़ित किसानों ने बताया कि जैसे ही खेतों में पानी भरना शुरू हुआ, उन्होंने तुरंत सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। कई बार फोन करने और मौके पर पहुंचने की मांग के बावजूद कोई अधिकारी समय पर नहीं पहुंचा। विभागीय उदासीनता और लापरवाही के चलते हालात और बिगड़ते चले गए।
किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी
आशाराम, मनसुख, सुमेरा, लखनलाल, केसरदास और राधारानी सहित कई किसान आज अपने खेतों के किनारे खड़े होकर बर्बाद फसल को देखने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि यही गेहूं की फसल उनके परिवार की आजीविका और कर्ज चुकाने का सहारा थी। फसल डूबने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
मुआवजे और कार्रवाई की मांग
पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही किसानों ने नहर संचालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते पानी रोका जाता, तो इस भारी नुकसान से बचा जा सकता था।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और किसानों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन पीड़ित किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है।

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