मथुरा: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली (VIRAT KOHLI SPIRITUAL JOURNEY) ने सोमवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी. इसके ठीक अगले दिन मंगलवार को वह अपनी पत्नी और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के साथ मथुरा के वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे. यह यात्रा पूरी तरह गोपनीय रही, जहां दोनों ने अपने परिवार के साथ संत से मुलाकात कर आध्यात्मिक मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया.
आध्यात्मिक गुरु से मुलाकात, विराट ने झुकाया सिर
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा आश्रम में पहुंचते ही सबसे पहले गुरु प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया. संत ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए पूछा, “खुश हो?” और कहा कि ठीक ही रहना चाहिए. इसके बाद संत प्रेमानंद महाराज ने विराट और उनके परिवार को धार्मिक उपदेश देते हुए कहा कि भगवान की कृपा से ही संत समागम संभव होता है.
उन्होंने बताया, “यह वैभव नहीं, पुण्य है। पुण्य से ही पापी को भी सुख की प्राप्ति होती है. अहंकार को मिटाकर ही मनुष्य परमशांति के मार्ग पर चल सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी मंदिर में जाने से भगवान की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि “राधा नाम” ही शांति का मार्ग है.
तीसरी बार पहुंचे आश्रम, पहले भी मिली थी प्रेरणा
गौरतलब है कि यह विराट कोहली का संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम का तीसरा दौरा था. इससे पहले जनवरी 2025 में विराट ने जब क्रिकेट में फॉर्म को लेकर जूझ रहे थे, तब भी आश्रम का दौरा किया था. उस समय अनुष्का शर्मा ने धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का आशीर्वाद मांगा था, जबकि विराट ने क्रिकेट में सफलता के लिए प्रार्थना की थी.
विराट कोहली ने सबसे पहले 4 जनवरी 2023 को अपने परिवार के साथ संत प्रेमानंद महाराज का दर्शन किया था. इन तीनों यात्राओं में विराट की श्रद्धा और आध्यात्मिक झुकाव साफ़ दिखता है.
संन्यास की घोषणा: इंस्टाग्राम पोस्ट से मचाया हलचल
सोमवार को विराट कोहली ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “टेस्ट क्रिकेट ने मेरी परीक्षा ली, मुझे आकार दिया और ऐसे पाठ सिखाए जो मुझे जीवनभर याद रहेंगे.” उन्होंने इस खेल को सम्मान और गौरव के साथ अलविदा कहा. विराट के इस फैसले से जहां खेल जगत में हलचल मची, वहीं उनके इस आध्यात्मिक कदम ने भी कई प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया.
विराट की धार्मिक आस्था और मानसिक संतुलन
विराट कोहली अक्सर आध्यात्मिक यात्राओं पर जाते हैं, जिससे उनके जीवन में मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति बनी रहती है. उनकी यह यात्रा न केवल क्रिकेट से जुड़े भावनात्मक पल को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि विराट अपने जीवन में धार्मिक मूल्यों को कितनी गंभीरता से लेते हैं.
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